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दान में मां का दूध: फ़ेसबुक पर बना ग्रुप
- Author, जयकुमार एस.
- पदनाम, बीबीसी तमिल सेवा
रक्त दान के लिए सोशल मीडिया पर अभियान चलाने की कोशिशें होती रहती हैं लेकिन चेन्नई में कुछ लोगों ने इसी तर्ज पर फ़ेसबुक पर एक नया ग्रुप बनाया.
ये ग्रुप 'मां के दूध के दान' को बढ़ावा देता है.
नैचुरल पैरेंटिंग कम्यूनिटी (एनपीसी) नाम का ये सोशल ग्रुप कुदरती तरीके से बच्चों के पालन पोषण पर जोर देता है.
इस ग्रुप के अनुसार, जहां तक मुमकिन हो सके, बच्चों को ऐसे पाला जाना चाहिए.
एनपीसी का फ़ेसबुक पेज खास तौर पर स्तनपान को बढ़ावा देने के मकसद से बनाया गया था. ये ग्रुप इस मसले पर लोगों को सलाह भी देता है.
नई माताओं के लिए ये सवाल हमेशा ही मुश्किल भरा होता है कि वे अपने बच्चों को क्या पिलाएं, अपना दूध या पाउडर वाला दूध.
नैचुरल पैरेंटिंग कम्यूनिटी पुरज़ोर तरीके से स्तनपान के फ़ायदों की वकालत करता है. वैज्ञानिक भी ये मानते हैं कि स्तनपान से बच्चों का कई तरह के रोगों से बचाव होता है.
मां का दूध
इस कैम्पेन से जुड़ीं महिला वॉलेंटियर्स भी ब्रेस्ट मिल्क डोनेशन के लिए सोशल मीडिया पर खूब ऐक्टिव हैं.
कैम्पेन से जुड़ी नई माताओं का मानना है कि एक मां का दूध दूसरी मां के बच्चे के लिए काम आ सकता है तो ये एक बेहतर रास्ता है.
एनपीसी फ़ेसबुक ग्रुप की महिलाएं अपना अतिरिक्त दूध दूसरे ज़रूरतमंद बच्चों को डोनेट कर रही हैं.
इस ग्रुप की एडमिन ऐश्वर्या जयरामन ने बताया कि मां का दूध डोनेट करने और उसे कलेक्ट करने के गाइडलाइंस के बारे में नैचुरल पैरेंटिंग कम्यूनिटी ज्वॉइन करते ही आसानी से जाना जा सकता है.
बड़े शहरों में एकल परिवारों के बढ़ते चलन के कारण ऐसे ग्रुप कारगर हो सकते हैं. इसी वजह से नैचुरल पैरेंटिंग कम्यूनिटी ग्रुप के सदस्यों की संख्या बढ़ रही है.
स्पेशल कैम्पेन
इस ग्रुप की एक और एडमिन शरण्या विजयकुमार कहती हैं, "ग्रुप में डॉक्टर्स भी हैं जो लोगों के साथ अपने अनुभव साझा करते हैं. इससे ग्रुप के दूसरे सदस्यों को भी मदद मिलती है."
पिछले साल एक डॉक्टर ने ब्रेस्ट मिल्क के लिए फौरन मदद मांगी थी. तभी से इस ग्रुप की बुनियाद पड़ी.
समूह से जुड़ी वहीदा सतीश कुमार कहती हैं कि अब वे लोग व्हॉट्स ऐप पर भी ये सर्विस शुरू करने के बारे में सोच रही हैं.
ग्रुप महीने में एक बार मिलता भी है.
इवेंट आयोजित किए जाते हैं और मदर्स डे जैसे मौकों पर स्पेशल कैम्पेन भी चलाया जाता है.
तमिलनाडु सरकार ने 2015 में मदर्स मिल्क बैंक की शुरुआत की थी.
राज्य के सात सरकारी अस्पतालों में इसे चलाया जा रहा है.
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