ये राज्यों के अधिकारों में दख़ल की शुरुआत हो सकती हैः विजयन

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- Author, इमरान क़ुरैशी
- पदनाम, बीबीसी हिंदी डॉटकॉम के लिए
केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने पशु क्रूरता अधिनियम के तहत लगाए गए नए प्रतिबंधों को लेकर अन्य मुख्यमंत्रियों को पत्र लिखा है.
विजयन का कहना है कि इससे मांस खाने वाले लोग तो प्रभावित होंगे ही, साथ ही इसका असर राज्यों के अधिकार, गणतांत्रिक व्यवस्था और अनेकता के मूल्यों पर भी पड़ेगा.
विजयन ने अपने पत्र में कहा है कि ये नियम लोकतंत्र के संघीय ढांचे और धर्मनिर्पेक्ष संस्कृति को बर्बाद करने के उद्देश्य से लाए गए हैं.

मुख्यमंत्रियों को लिखे अपने पत्र में विजयन ने लिखा है, "ये ऐसे ही अन्य क़दमों की शुरुआत हो सकता है जिनका उद्देश्य लोकतंत्र के संघीय ढांचे और हमारे देश की धर्मनिरपेक्ष संस्कृति को बर्बाद करना है."
लाखों लोगों के रोजगार पर होगा असर

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अपने पत्र में विजयन ने पशु क्रूरता अधिनियम केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय की ओर से लाए गए नए अधिसूचना का हवाला देते हुए कहा है, "ये नियम पशु व्यापार पर कई तरह के प्रतिबंध लगाते हैं जिनका लाखों लोगों के रोजगा पर असर होगा, ख़ासकर उन लोगों के जो कृषि क्षेत्र से जुड़े हैं."
उन्होंने लिखा, "इससे सभी राज्यों में कृषि आधारित ग्रामीण अर्थव्यवस्था में अफ़रा-तफ़री फैल जाएगी."
विजयन ने 23 मई को जारी की गई पर्यावरण मंत्रालय की अधिसूचना को राज्य सरकारों के अधिकारों में केंद्र सरकार का दख़ल बताया है.
उन्होंने लिखा, "ये केंद्रीय क़ानून के नियमों की आड़ में राज्य सरकारों को अधिकारों के हनन का एक छुपा हुआ प्रयास है."
नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों का हनन

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विजयन ने लिखा, "राज्य विधानमंडलों के अधिकार क्षेत्र में यह अवैध अतिक्रमण संविधान के बुनियादी पहलुओं में से एक मानी जाने वाली संघीय भावना का स्पष्ट उल्लंन है"
उन्होंने लिखा, "नियमों में शामिल विषय संविधान में राज्य सूची की 15 और 18 प्रविष्टियों में से हैं. "
विजयन ने अपने पत्र में ये भी कहा है कि लाए गए नए नियम संविधान में नागरिकों को मिले व्यापार करने के अधिकार का भी हनन करते हैं और संविधान की परीक्षा में ये नाकाम हो जाएंगे.
उन्होंने कहा कि ये नियम नागरिकों के अपनी पसंद का भोजन लेने की स्वतंत्रता के अधिकार का भी उल्लंघन करते हैं.
विजयन ने इससे पहले रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर इन नए नियमों को वापस लेने की गुज़ारिश की थी.
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