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चीन की सीमा पर ब्रह्मपुत्र नदी पर बने भारत के सबसे लंबा पुल का होगा उद्घाटन
- Author, सुबीर भौमिक
- पदनाम, बीबीसी हिंदी डॉटकॉम के लिए
भारत ने लोहित नदी के पर 9.15 किलोमीटर लंबा पुल बना है. यह भारत के पूर्वोत्तर के दो राज्यों अरुणाचल प्रदेश और असम को एक-दूसरे के साथ जोड़ेगा.
इस लिहाज से यह भारत का सबसे लंबा पुल होगा.
चीन का दावा रहा है कि अरुणाचल प्रदेश उसका क्षेत्र है और उसे वो 'दक्षिणी तिब्बत' के तौर पर पुकारता है.
चीन ने हाल ही में बौद्ध धर्मगुरु दलाई लामा के अरुणाचल प्रदेश की यात्रा का कड़ा विरोध किया था.
दलाई लामा की यात्रा को भारत सरकार ने हरी झंडी दी थी.
चीन अरुणाचल प्रदेश में फ़ौजी गतिविधियों की भी मुखालफत करता रहा है.
लेकिन भारत ने हमेशा अपना पक्ष मजबूती से रखा है और कहा है कि अरुणाचल प्रदेश पर उसका हक़ है.
अरुणाचल प्रदेश के रहने वाले केंद्रीय गृह राज्य मंत्री किरण रिजिजू ने पत्रकारों से कहा, "चीन चूंकि लगातार आक्रमक रूख अपनाए हुए है, इसलिए जरूरी है कि हम अपनी आधारभूत संरचना को इतना मज़बूत बनाएं कि अपने भू-भाग की सुरक्षा निश्चित कर सकें."
छह साल में तैयार हुआ पुल
रिजिजू ने इससे पहले कहा था कि, "अरुणाचल प्रदेश भारत का हिस्सा है और यह सच्चाई बदलेगी नहीं, भले ही कोई पसंद करें या ना करें."
ढोला साडिया पुल का निर्माण साल 2011 में शुरू हुआ था.
इस पुल का निर्माण नवयुग इंजीनियरिंग कंपनी ने किया है.
नवयुग इंजीनियरिंग कंपनी के एक अधिकारी ने बताया, "यह वाकई में एक मुश्किल काम था. मुआवजे की कुछ मसले की वजह से इसके निर्माण की गति भी थोड़ी प्रभावित हुई." हालांकि यह समय पर पूरा हुआ.
पुल के अलावा भारत एक टू-लेन ट्रांस अरुणाचल हाइवे का भी निर्माण कर रहा है. दूसरे विश्व युद्ध के समय की पुरानी सड़क को भी दुरुस्त कर रहा है.
इसके अलावा सड़क चौड़ी करने को लेकर चार प्रोजेक्ट्स पर भी काम कर रहा है.
भारी वजन ढोने वाले जहाजों की लैंडिंग के लिए भी लैंडिंग ग्राउंड्स तैयार किए जा रहे हैं. इससे भारत की रणनीतिक क्षमता में वृद्धि होगी.
रिटायर्ड मेजर जनरल गगनजीत सिंह ने बीबीसी से कहा, "हमें अपनी आधारभूत संरचना विकसित करनी ज़रूरी है ताकि चीन के साथ जंग के वक्त हम अपनी फ़ौज को समान की आपूर्ति कर सकें. यह पुल इसमें हमारी बड़ी मदद करेगा."
उन्होंने आगे कहा, "भारत ने अरुणाचल प्रदेश में दो दशकों से कोई विनिर्माण का काम नहीं किया है. 1962 की लड़ाई के बाद से कुछ लोगों को यह गलतफहमी थी कि चीन अगर दोबारा से हमला करता है तो सड़क मार्ग का इस्तेमाल करेगा. लेकिन अब हम सही दिशा में बढ़ रहे है."
बुनियादी ढाँचे पर ज़ोर
भारत के गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने भी राज्य में आधारभूत संरचना विकसित करने पर ज़ोर देने की बात कही है.
राजनाथ सिंह ने इंडो-तिब्बती सीमा सुरक्षा बल के जवानों से कहा, "हमें शांति चाहिए लेकिन वो शांति सम्मान के साथ होनी चाहिए. हम उन सभी को सबक सिखाने में सक्षम हैं जो ये सोचते हैं कि हम कमज़ोर है."
उनकी यह टिप्पणी चीन की उस आपत्ति के मद्देनज़र आई थी जिसमें चीन ने 'विवादित क्षेत्र में सैन्य आधारभूत संरचना के निर्माण' पर आपत्ति दर्ज की थी.
भारत ने पहले से ही पहाड़ी क्षेत्र में दो सैन्य डिवीजन तैनात कर रखे है और अब वो इसे बढ़ाने भी जा रहा है ताकि चीन को लेकर वो अपनी सुरक्षा पुख्त कर सकें.
मेजर जनरल गगनजीत सिंह कहते हैं, "लेकिन फ़ौज की ताकत तब तक बेकार है जब तक कि हमारे पास सड़कें और पुल नहीं है जिसके सहारे वो तेज़ी से एक जगह से दूसरी जगह पहुंच पाएं. लड़ाई के दौरान यह सबसे अहम बात होती है."
फ़ौज के एक इंजीनियर ने बीबीसी से कहा कि ढोला-साडीया पुल 60 टन वजन तक के टैंक का भार सह सकता है.
स्थानीय लोग भी पुल के निर्माण को लेकर खासे उत्साहित है.
गुंजन सहारीया ने बीबीसी से कहा, "यह कल्पना से परे है कि यह पुल वहां तैयार हुआ है जहां छह नदियां मिलती है. ये सभी ब्रह्मपुत्र में मिलती हैं."
असम के मुख्यमंत्री ने इस पर कहा है, "मैं वादा करता हूं कि यह सिर्फ़ फ़ौज के मतलब की चीज़ बनकर नहीं रह जाएगी बल्कि यह असम और अरुणाचल प्रदेश की आर्थिक तरक्की में मददगार होगा. और यह बड़े पैमाने पर पर्यटकों भी यहां ले आएगा."
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