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जब मौलवियों को रातोरात बुलाकर 'निकाह' दिखाई गई
- Author, तृप्ति श्रीवास्तव
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
जब निकाह औरत की मर्ज़ी के बग़ैर नहीं हो सकता तो तलाक़ कैसे हो सकता हैं? यही वो सवाल था जिसने तीन तलाक़ जैसे मुद्दे पर भारत की सबसे सुपरहिट फ़िल्म 'निकाह' की कहानी लिखने के लिए लेखिका अचला नागर को मजबूर कर दिया था.
निकाह से पहले फिल्म का नाम था तलाक़ तलाक़ तलाक़
क़रीब 35 साल पहले बनी इस फिल्म को लेकर तब भी उतने ही विवाद उठे थे जितने आज इस मुद्दे को लेकर उठ रहे हैं. इसी फिल्म से पाकिस्तानी अदाकारा सलमा आग़ा ने बॉलीवुड में अपने करियर की शुरूआत की थी. राज बब्बर हीरो थे और दीपक पाराशर सह कलाकार थे. फिल्म में दिखाया गया था कि कैसे तीन तलाक़ एक औरत की ज़िंदगी में तूफ़ान ले आता है. मज़बूत स्टारकास्ट ना होने के बावजूद फ़िल्म सुपर डुपर हिट रही थी.
1982 में बीआर चोपड़ा के निर्देशन में फिल्म निकाह का नाम पहले तलाक़..तलाक़..तलाक़ रखा गया था. लेकिन तलाक़ नाम से पहले ही किसी निर्माता ने अपनी फ़िल्म के लिए रजिस्टर करवा रखा था.
फिल्म की लेखिका अचला नागर बताती हैं कि कैसे चरित्र अभिनेता इफ़्तिख़ार ने भी इस पर चुटकी ली थी, अचला ने बताया, "वो बोले कि अच्छा हुआ चोपड़ा साब आपने फ़िल्म का नाम तलाक़..तलाक़..तलाक़ नहीं रखा नहीं तो हम बीवी से कहते चलो तलाक़..तलाक़..तलाक़ देखने चलते हैं तो हमारा तो फ़िल्म देखने से पहले ही तलाक़ हो जाता."
अचला ने बताया कि फ़िल्म किसी मज़हब को ध्यान में रखकर नहीं बनाई गई थी बल्कि उसका मक़सद ये बताना था कि औरत को भी इंसान समझा जाए. लेकिन फिर भी विवाद उठ ही गए. अचला ने बताया कि "फ़िल्म रिलीज़ होने के चौथे दिन ही किसी ने मुस्लिम बहुल इलाक़े भिंडी बाज़ार में पोस्टर लगा दिए कि इस फ़िल्म में मज़हब के ख़िलाफ़ बातें की गई हैं. फ़तवे जारी कर दिए गए थे. तब रातोंरात विरोध करने वाले मौलवियों को बुलाकर फ़िल्म दिखाई गई थी."
भारत-पाकिस्तान में छा गई थी फिल्म
फ़िल्म समीक्षक और वरिष्ठ पत्रकार ज़िया-उस-सलाम कहते हैं कि ''भारत ही नहीं पाकिस्तान में भी फिल्म को लेकर प्रदर्शन हुए थे. कई जगहों पर इसकी रिलीज़ पर रोक लगा दी गई थी. कुछ मौलानाओं का कहना था कि इसमें तलाक़ तो दिखाया लेकिन हलाला के बारे में नहीं बताया गया."
अचला नागर का कहना है कि फ़िल्म रिलीज़ होने के बाद भारत ही नहीं पाकिस्तान की कई महिलाओं ने उनसे इस कहानी को लिखने के लिए शुक्रिया कहा था.
अचला ने बताया कि नासिक के पास धुले में उनसे मिलने कई मुस्लिम महिलाएं पहुंची थीं. एक मुस्लिम महिला ने बताया कि उनके प्रोफेसर पति ने उन्हें महज़ इसलिए तीन बार तलाक़ बोलकर रिश्ता तोड़ दिया था क्योंकि वो समय पर खाना नहीं दे पाई थीं. तो दूसरी को उनके शौहर ने फोन पर तलाक़ दे दिया था. वो निकाह देखने के बाद अपना दर्द उस फ़िल्म में देख पा रही थीं.
निकाह फ़िल्म देखकर तीन तलाक़ के ख़िलाफ़ हुईं फरहा
तीन तलाक़ को लेकर क़ानूनी लड़ाई लड़ रही सुप्रीम कोर्ट की वकील फराह फ़ैज़ के मामा उमर ख़ैय्याम सहारनपुरी ने बीआर चोपड़ा की फ़िल्म निकाह के लिए धार्मिक मामलों के सलाहकार के तौर पर काम किया था. फरहा ने जनवरी 2016 में तीन तलाक़ के ख़िलाफ़ याचिका दायर की थी.
फरहा बताती हैं कि " उस वक़्त मैं 8 साल की थी. तब फिल्म पर क़रीब 20 केस हुए थे. 15-20 दारुलइफ़्ताओं के दिए फ़तवे तो मेरे मामू ख़ुद इकट्ठे करके लाए थे. हमारे घर में तभी से इस मुद्दे पर चर्चा होती है. मैं आज इस मुद्दे को ख़िलाफ़ खड़ी हूं तो इसकी वजह वही लोग हैं जिनसे लड़ते हुए मैंने अपने मामू को देखा."
वैसे तो अमिताभ बच्चन की सौदागर जैसी कुछ और फिल्मों में भी तीन तलाक़ दिखाए गए हैं लेकिन संवेदनशील मुद्दे के तौर पर इसे निकाह फ़िल्म में ही उठाया गया.
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