भारत में सेक्स टॉय का कारोबार कितना आसान?

- Author, आकृति थापर एवं जाल्टन एसी
- पदनाम, बीबीसी न्यूज़
भारत में कई चीज़ों का लोग इस्तेमाल तो करते हैं लेकिन उसे खुलेआम ख़रीदने से बचते हैं. लोग इन चीज़ों पर बात करने में भी लज्जा महसूस करते हैं.
भारत में सेक्स हमेशा से वर्जना की तरह रहा है. ऐसे में लोग सेक्स से जुड़ी चीज़ों को लेकर बात करने पर भी शर्म महसूस करते हैं. यहां कंडोम लेने के लिए लोग कोड वर्ड का इस्तेमाल करते हैं ऐसे में सेक्स टॉय तो दूर की बात है.

बीबीसी ने भारत में इन चीज़ों के व्यापार और लोगों के व्यवहार को लेकर एक पड़ताल की है.
मुंबई में 'दैट्स पर्सनल' नाम की एक कंपनी है जो भारतीयों में सेक्स और उससे जुड़े उत्पादों को लेकर शर्म और वर्जना को ख़त्म करने की कोशिश कर रही है.
'टैबू को ख़त्म करना होगा'
'दैट्स पर्सनल' कंपनी के संस्थापक समीर सरैया का दावा है कि वह भारतीयों के बीच इस लज्जा को ख़त्म करने की कोशिश कर रहे हैं.

दैट्स पर्सनल कंपनी एडल्ट्स गेम, वाइब्रेटर्स समेत ऐसे कई उत्पादों को बेचती है. समीर ने कहा कि वह भारतीय बाज़ार में दुनिया के बेहतरीन उत्पादों को मुहैया कराने की कोशिश कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि कई भारतीय लोग तो कंडोम मांगने में भी शर्म महसूस करते हैं.

समीर ने कहा, ''यहां लोगों को कंडोम लेना होता है तो काउंटर पर आकर वो कहते हैं कि उन्हें 'एक्स' चाहिए. लोग कंडोम मांगने के लिए एक्स को कोड वर्ड के रूप में इस्तेमाल करते हैं. लोग कंडोम को ब्लैक प्लास्टिक में ले जाते हैं ताकि कोई देख न ले.''
क़ानून का चक्कर
इन उत्पादों को लेकर भारतीयों के ऐसे व्यवहार के बीच बिज़नेस करना कितना आसान है? समीर का कहना है कि भारत का क़ानून बहुत जटिल है. हमारे पास इन उत्पादों का एक छोटा सबसेट होता है जो भारत में वैध है.

उन्होंने कहा, ''दूसरी बात यह कि ये उत्पाद भारत में कभी उपल्ब्ध नहीं रहे हैं. ऐसे में लोगों को हमें समझाने में कड़ी मेहनत करनी पड़ती है कि इसके क्या फ़ायदे हैं.''
समीर ने कहा, ''इस सामानों को बेचने में काफी मुनाफ़ा होता है, ऐसे में हम इस बिज़नेस के साथ बने हुए हैं.''












