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तीन तलाक़- जो बातें आपको शायद पता न हों
- Author, ज़ुबैर अहमद
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
तीन तलाक़ के मामले में सुप्रीम कोर्ट की पांच सदस्यीय बेंच में से तीन जजों ने तीन तलाक़ को असंवैधानिक करार दिया है.
एक ही समय में तीन तलाक़ भारत के मुसलमानों से जुड़ी एक विवादित प्रथा है. इसके बारे में लोगों के पास सही जानकारी भी कम ही है.
इससे जुड़े कुछ सवालों के जवाब:
किन- किन देशों में इस पर पाबंदी है ?
पाकिस्तान और सऊदी अरब जैसे इस्लामी देशों में तीन तलाक़ पर पाबंदी है. ज़बानी तीन तलाक़ का चलन दुनिया में भारतीय मुसलमानों के बीच ही है और वो भी हनफ़ी विचारधारा को मानने वालों के बीच.
इस्लाम की चार ख़ास विचारधाराओं में से भारत में हनफ़ी धारा को मानने वालों का बहुमत है.
हनफ़ी धारा के मानने वालों के बीच तीन तलाक़ सही है. बाक़ी तीन धाराओं में "एक ही सांस में तीन बार तलाक़" को एक ही माना जाएगा. शादी ख़त्म करने के लिए कुछ महीनों के अंतराल में अलग-अलग समय में दो बार तलाक़ देना होगा.
लेकिन इस पर इस्लामी विद्वानों के बीच सहमति नहीं है. कुछ विद्वानों के अनुसार तो एक बार में तीन तलाक़ एक दम से ग़ैर इस्लामी है और ये क़ुरान के ख़िलाफ़ है. उनके अनुसार क़ुरान के सूरह बक़रा में तीन तलाक़ के बारे में जो बताया गया है, उससे साफ़ ज़ाहिर है कि एक ही समय पर, एक ही सांस में तीन बार तलाक़ कहना इस मुक़द्दस किताब के ख़िलाफ़ है.
तीन तलाक़ क्या है?
इस्लाम में तलाक़ देने के लिए तीन बार तलाक़ देना होता है. आम तौर से तीन तलाक़ अलग-अलग समय पर देना चाहिए ताकि अगर ग़ुस्से में तलाक़ कहा गया हो तो पति-पत्नी का रिश्ता टूटे नहीं.
अगर तीन बार "तलाक़, तलाक़, तलाक़" कहा गया हो, तब भी इसे एक ही तलाक़ माना जाएगा. लेकिन भारत के मुसलमानों के बीच अगर एक ही समय में जब मर्द अपनी पत्नी को एक ही सांस में तीन बार तलाक़ देता है तो इसे तीन तलाक़ मान लेते हैं और तलाक़ हो जाता है.
ज़बानी तीन तलाक़
कुछ लोग लिखित रूप से तलाक़ देते हैं. मुद्दा लिखित रूप से तीन तलाक़ देने का नहीं है. मुद्दा है ज़बानी एक बार में, एक ही सांस में तीन बार तलाक़ देने का है.
ज़्यादातर भारतीय मुसलमानों के बीच अगर एक मुस्लिम मर्द अपनी पत्नी को एक ही सांस में तीन बार ज़बानी तलाक़ कहता है तो उसकी शादी ख़त्म हो जाती है.
बाद में उसे पछतावा हो तो इसका कुछ नहीं किया जा सकता.
हलाला प्रथा
हाँ, अपनी पत्नी को दोबारा हासिल करने के लिए और उससे निकाह करने के लिए उसकी पत्नी को किसी दूसरे मर्द से शादी करनी होती है और फिर यदि वो 'खुला' या तलाक़ के ज़रिए अलग हो जाते हैं तो वो अपने पहले पति से दोबारा शादी कर सकती है. इसे हलाला कहते हैं. ये प्रथा अब ख़त्म होती जा रही है.
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