अख़िर सैकड़ों करोड़ के निर्भया फ़ंड का हो क्या रहा है?

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- Author, नितिन श्रीवास्तव
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
दिल्ली में 2012 में हुए निर्भया गैंगरेप केस और उसके बाद बने 'निर्भया फ़ंड को चार वर्ष से ज़्यादा हो चुके हैं.
इस घटना के बाद सरकार ने बलात्कार पर कड़ा क़ानून बनाया और अगले ही वर्ष निर्भया फ़ंड में 1,000 करोड़ की राशि डालनी शुरू कर दी है.
इस निर्भया फ़ंड के लिए नोडल एजेंसी भारत सरकार के महिला एवं बाल विकास मंत्रालय को बनाया गया था.
मंत्रालय के अनुसार इस फ़ंड में मार्च, 2017 तक 2348. 85 करोड़ रुपए डाले गए हैं.

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राशि के उपयोग के लिए जो 16 प्रस्ताव आए उनमें से 14 पास हुए जिसके लिए 2047.85 करोड़ रुपए की रकम भी पास हुई है.
लेकिन जो बात अहम है वो ये कि विभिन्न मंत्रालयों ने मार्च महीने तक सिर्फ़ 554.449 करोड़ रुपए की रकम खर्च करने का ब्योरा दिया है.
ग़ौरतलब है कि फ़ंड के शुरू होने के साल भर बाद ही इसके इस्तेमाल को लेकर सवाल उठने लगे थे.
सुप्रीम कोर्ट में उठाया सवाल
इसी वर्ष फ़रवरी महीने में वरिष्ठ वकील इंदिरा जयसिंह ने बतौर एमिकस क्यूरे यानी अदालत की मदद करने वाली वकील के तौर पर इस बारे में सवाल उठाए थे.
सुप्रीम कोर्ट से उन्होंने कहा था कि निर्भया फ़ंड के लिए आवंटित सैकड़ों करोड़ रुपयों का इस्तमाल नहीं हो रहा है.

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उन्होंने दो जजों वाली एक बेंच को बताया था कि इस फ़ंड की राशि शायद ही उन ज़रूरतमंद महिलाओं तक पहुँच पा रही है जिन्हें इसकी असल ज़रुरत है.
मामले की शुरुआत तब हुई जब सुप्रीम कोर्ट में दायर हुई एक याचिका में मांग हुई कि राज्य सरकारें और केंद्र शासित प्रदेश बताएं कि बलात्कार पीड़िताओं के मुआवज़े का क्या हुआ?
गवाहों की सुरक्षा के क्या प्रावधान?
अदालत में इस तरह के भी सवालों का जवाब मांगा गया कि बलात्कार या महलाओं के साथ शोषण जैसे मामलो में गवाहों की सुरक्षा के क्या नए प्रावधान बनाए गए हैं?
साथ ही इस बात पर भी जवाब मांगे गए कि निर्भया फ़ंड में जो पैसा जमा है उसे खर्च करने को लेकर सरकारी योजनाएं क्या हैं?
मामले की सुनवाई के दौरान ही इंदिरा जयसिंह ने ये भी कहा कि बलात्कार पीड़िताओं के लिए भारत के अलग-अलग राज्यों में अलग मुआवज़े की रक़म का प्रावधान है जिसमें असमानताएं हैं.
पिछले वर्ष मई महीने में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकारों से मामले पर जवाब माँगा जिसके जवाब में सरकार दो बार आंकड़े जारी कर चुकी है.

बीबीसी को मंत्रालय से मिली जानकारी के अनुसार 'मामले को लगातार प्राथमिकता दी जा रही है और गृह मंत्रालय से लेकर रेल मंत्रालय तक इस राशि का उपयुक्त इस्तेमाल करने में लगे हैं".
सरकार के अनुसार, "इतनी बड़ी रक़म का सही खर्च जल्दबाज़ी में नहीं किया जा सकता लेकिन इस लंबी प्रक्रिया पर काम जारी है".
हालांकि सच्चाई ये भी है कि सैकड़ों करोड़ रुपए की इस रक़म में महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के पास अभी तक क़रीब पांच सौ करोड़ रुपए के ख़र्च का ही हिसाब पहुंचा है.
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