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यूपी : 'हत्या के बाद पुश्तैनी घर छोड़ने का सोच रहे हैं'
- Author, ज़ुबैर अहमद
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, बुलंदशहर से
उत्तर प्रदेश पुलिस ने 60 साल के एक मुसलमान की पिटाई के आरोप में तीन लोगों को गिरफ़्तार किया है.
गुलाम अहमद नाम के इस व्यक्ति की पिटाई के बाद मौत हो गई थी.
ये घटना उत्तर प्रदेश में बुलंदशहर के एक छोटे से गाँव सोही गाँव की है.
सोही एक छोटा सा गाँव है, यहाँ मुस्लिम आबादी और भी छोटी है.
यहाँ केवल चार मुस्लिम परिवार हैं, अब ये गिने चुने मुस्लिम परिवार भी यहाँ से पलायन करने की सोच रहे हैं.
ग़ुलाम अहमद इन चार परिवारों में से एक बड़े घर के सबसे बुज़ुर्ग व्यक्ति थे.
पुलिस के मुताबिक, "60 साल के ग़ुलाम अहमद मंगलवार सुबह आम के एक बगीचे में काम कर रहे थे जब पाँच युवक वहाँ आए और लोहे की छड़ों से उन्हें पीटना शुरू कर दिया. जब वो बेहोश हो गए तो युवक भाग गए."
हत्या करने के इल्ज़ाम में पुलिस को दो अन्य युवाओं की तलाश है.
युवा वाहिनी पर सवाल
गिरफ़्तार हुए युवाओं का संबंध हिंदू युवा वहिनी से बताया जाता है. ग़ुलाम अहमद के बेटों के अनुसार उनके पिता की हत्या में युवा वहिनी के पाँच लोग शामिल थे.
युवा वाहिनी की स्थापना योगी आदित्यनाथ ने की थी जो अब उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री हैं.
स्थानीय पुलिस अधिकारी एन सिंह के अनुसार गिरफ़्तार किए गए युवा किसी संगठन से नहीं जुड़े थे.
पुलिस के इस दावे के बावजूद युवा वाहिनी से जुड़े लोग कह रहे हैं कि गिरफ़्तार होने वाले युवा वाहिनी से जुड़े लोग हैं.
युवा वाहनी के बुलंदशहर के अध्यक्ष सुनील सिंह राघव कहते हैं, "गिरफ़्तार हुए युवा हमारे हैं लेकिन उन पर लगाया गया आरोप झूठा है."
उनका कहना था कि उनकी पार्टी के लोग ऐसा कभी नहीं कर सकते.
'पलायन की सोच रहे हैं'
इलाक़े में एक हफ़्ता पहले एक मुस्लिम युवा और हिंदू लड़की के कथित तौर पर फ़रार होने के बाद से तनाव है.
कहा जा रहा है कि ग़ुलाम अहमद पर हमले का कारण ये था कि शायद उन्हें फ़रार होने वाली जोड़ी का पता मालूम था.
एक स्थानीय पुलिस अधिकारी ने बीबीसी को बताया कि उनके अनुसार ये हमला पूर्व नियोजित नहीं था और वे लोग पहले से मारने के इरादे से नहीं आए थे.
ग़ुलाम अहमद के परिवार ने कहा है कि मुसलमान होने की वजह से उन्हें निशाना बनाया गया.
उनका कहना है कि वे गाँव में रहने को लेकर अब डरे हुए हैं और हमेशा के लिए अपना पुश्तैनी गाँव छोड़ने की बात कर रहे हैं.
शर्मिंदगी
गाँव के अधिकतर हिंदू सर झुकाए अपने घरों के अंदर बैठे हैं.
गांव के व्यक्ति ने कहा, "सोही ठाकुरों का गाँव है. इस पूरे इलाक़े ने हमारी ही चलती है. वो आए और हमारे गाँव वाले को पीट पीट कर मार डाला और हम कुछ ना कर सके."
गाँव के हिंदुओं में शर्मिंदगी इस बात की है कि वो ग़ुलाम अहमद को बचा ना सके. लेकिन शायद उन्हें इससे भी अधिक शर्मिंदगी इस बात से है कि एक मुस्लिम युवा और हिंदू लड़की पिछले एक हफ़्ते से अपने घर से फ़रार हैं.
ग़ुलाम अहमद के सब से बड़े बेटे यासीन के अनुसार, '' लड़के और लड़की के फ़रार होने के बाद युवा वाहिनी वाले हर रोज़ हमारे गाँव आते थे. हमारे गांव की लड़कियों से छेड़छाड़ करते थे."
यासीन की पत्नी ने कहा, ''वाहिनी वाले उन्हें परेशान करते थे और बुरी तरह से गालियाँ देते थे."
युवा वाहिनी के अध्यक्ष ये स्वीकार करते हैं कि इलाक़े के लोग उस हिंदू-मुस्लिम जोड़ी के फ़रार होने से परेशान थे.
सुनील सिंह का कहना था कि उनकी संस्था मुस्लिम विरोधी नहीं है.
वो कहते हैं, "हम उनके घरों को जाकर उन्हें घर ना छोड़ने की सलाह देंगे. हम यहाँ से उन्हें हरगिज़ पलायन करने नहीं देंगे.''
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