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प्रेस रिव्यू: यहां बच्चियों को जबरन दिया था ग्रोथ हॉर्मोन
'हिंदुस्तान टाइम्स' में छपी एक ख़बर के अनुसार दिल्ली पुलिस ने प्रदेश के दक्षिणी इलाके में मौजूद एक आश्रय गृह के ख़िलाफ़ लड़कियों का यौन उत्पीड़न करने की शिकायत दर्ज की है.
अख़बार कहता है कि इस मामले में आश्रय गृह में रहने वाली 10 लड़कियों ने उनका यौन उत्पीड़न किए जाने, कम उम्र में शारीरिक रूप से परिपक्व बनाने के लिए ग्रोथ हॉर्मोन के इंजेक्शन देने और उनके साथ मारपीट करने की शिकायत की है.
दो लड़कियों ने आश्रय गृह के अधिकारियों पर यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए हैं जबकि एक लड़की का कहना है कि मारपीट की शिकायत करने पर उसे सज़ा के तौर पर भूखा रखा गया था.
ख़बर के अनुसार ये सरकारी आश्रय घर रेप पीड़िताओं, शहर की सड़कों से बचा कर लाई गई और मानव तस्करी से बचाई गई लड़कियों के लिए बनाया गया था.
अख़बार जनसत्ता में छपी एक अ ख़बर के अनुसार नीति आयोग ने साल 2024 से लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराने का सुझाव दिया है ताकि 'प्रचार मोड' के कारण शासन व्यवस्था में पड़ने वाले व्यवधान को कम से कम किया जा सके.
नीति आयोग ने चुनाव आयोग को इस पर गौर करने को कहा है और एक साथ चुनाव कराने का रोडमैप तैयार करने के लिए एक कार्यसमूह बनाने का सुझाव दिया है.
इस मामले में छह महीने के भीतर रिपोर्ट को अंतिम रूप दिया जाना है और अगले साल मार्च तक इसका अंतिम खाका तैयार किया जाना है.
'दैनिक जागरण' में छपी एक ख़बर के अनुसार हरियाणा के पलहेड़ी गांव में रविवार को एक पालतू आदमखोर कुत्ते ने घर में काम करने वाले एक अधेड़ उम्र के व्यक्ति को नोच-नोच कर मार डाला.
अख़बार के अनुसार अपने मालिक के सामने रॉटवीलर नस्ल का ये कुत्ता दो घंटे तक शव को नोचता रहा.
इस कुत्ते का नाम टाइगर है और इससे पहले भी इसने घर में काम करने वाले एक व्यक्ति पर हमला कर उसे घायल कर दिया था.
'इंडियन एक्सप्रेस' में छपी एक ख़बर के अनुसार बिहार के रोहतास प्रशासन ने अवैध खनन रोकने के लिए कैमूर पहाड़ियों की तरफ़ जाने वाले रास्तों को उड़ाने का फ़ैसला किया है.
ये फ़ैसला प्रदेश के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सासाराम ब्लॉक के दौरे के चार महीने बाद लिया गया है. नीतीश ने अवैध खनन रोकने के लिए सभी कोशिशें करने के लिए कहा था.
ख़बर के अनुसार रोहतास प्रशासन ने सासाराम के कुछ गांवों में 15 ऐसे रास्तों को चिन्हित किया है जो अवैध खनन के लिए कुख्यात हैं और उन्हें नष्ट करने के लिए टेंडर आमंत्रित किए गए हैं.
'पायनियर' में छपी एक ख़बर के अनुसार जम्मू-कश्मीर में अलगाववादी हिंसा के दौरान बीते 27 सालों में 40 हज़ार से अधिक लोगों की जानें गई हैं.
अख़बार के अनुसार कश्मीर में हिंसा को लेकर एक आरटीआई के उत्तर में गृह मंत्रालय ने ताज़ा आंकड़े जारी किए हैं जिसके मुताबिक बीते 27 सालों में अब तक राज्य में चरमपंथी गतिविधियों और चरमपंथ विरोधी अभियानों में 41,900 से अधिक लोगों की मौत हुई है.
1990 से अप्रैल 2017 तक की इस अवधि के दौरान मारे जाने वाले लोगों में आम नागरिक, सुरक्षाबल और चरमपंथी शामिल हैं. इस अवधि के दौरान घायल हुए सुरक्षाबलों के जवानों की संख्या 13 हज़ार से अधिक है.
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