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'माल्या को भारत लाने में 6 से 8 महीने लग सकते हैं'
- Author, वात्सल्य राय
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
भारत छोड़कर पिछले एक साल से ब्रिटेन में रह रहे विजय माल्या को मंगलवार को ब्रिटेन में गिरफ़्तार किया गया.
उन पर भारतीय बैंकों का 9000 करोड़ रुपये का क़र्ज़ न चुकाने का आरोप है. भारत में माल्या को 'विल्फ़ुल डिफ़ॉल्टर' घोषित किया गया है और ऐसे आरोप भी लगे हैं कि उन्होंने गिरफ़्तारी से बचने के लिए पिछले साल दो मार्च को देश छोड़ा था.
विजय माल्या ने अपनी गिरफ्तारी पर ट्वीट कर कहा, "ये इंडियन मीडिया का हव्वा है. जैसे कि उम्मीद थी, कोर्ट में आज प्रत्यर्पण की सुनवाई शुरू हुई."
अदालत में मंगलवार को उन्हें 8 लाख डॉलर की ज़मानत राशि और अपना पासपोर्ट जमा करवाने की शर्त पर ज़मानत पर रिहा किया गया.
भारत में ये सवाल पूछा जा रहा है कि माल्या को भारत प्रत्यर्पित करने में कितना वक़्त लग सकता है?
भारतीय मूल के ब्रितानी राजनेता लॉर्ड मेघनाद देसाई का कहना है कि इस प्रक्रिया में छह से आठ महीने का समय लग सकता है.
उन्होंने बीबीसी से कहा, "भारत सरकार ने माल्या के प्रत्यर्पण के लिए बहुत सारी कोशिशें की हैं. अंतिम कोशिश भारत के वित्त मंत्री अरुण जेटली ने की थी."
उन्होंने बताया, "पिछले महीने इंडो यूके कल्चरल ईयर के उद्घाटन के दौरान उन्होंने बोरिस जॉन्सन से बात की थी और फिलिप थॉमस से बात की. तब जाकर माल्या की गिरफ़्तारी मंजूर हुई."
लॉर्ड देसाई कहते हैं, "लेकिन सरकार अपने आप उन्हें प्रत्यर्पित नहीं कर सकती. इसके लिए कोर्ट के आदेश की ज़रूरत पड़ेगी."
विजय माल्या या किसी भी ऐसे व्यक्ति को प्रत्यर्पित करने में ब्रिटेन का क़ानून भी एक बाधा हो सकता है.
वो कहते हैं, "कानूनी प्रक्रिया को देखते हुए ऐसा लगता है कि प्रत्यर्पण में कम से कम छह से आठ महीने लग सकते हैं. इसकी मुख्य वजह है कि ब्रिटेन में प्रत्यर्पण का क़ानून मानवाधिकार संधि पर आधारित है."
लॉर्ड देसाई के मुताबिक़, "इसलिए कोर्ट को ये सुनिश्चित करना पड़ेगा कि अगर उन्हें प्रत्यर्पित किया जाता है तो उन्हें निष्पक्ष सुनवाई का मौका मिलेगा या नहीं."
वो कहते हैं, "अगर निष्पक्ष सुनवाई का मौका न मिलने की संभावना हो तो ब्रिटेन में किसी चरमपंथी को भी आसानी से प्रत्यर्पित नहीं कर सकते."
माल्या के ब्रिटेन जाने के बाद भारत सरकार ने उनका पासपोर्ट रद्द कर दिया था और उन्हें 'वॉन्टेड' घोषित कर दिया था.
वो उस समय राज्यसभा के सदस्य थे और बाद में उन्होंने इसकी सदस्यता से इस्तीफ़ा दे दिया था.
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