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कुछ शहरों में हर दिन बदलेंगी पेट्रोल-डीज़ल की कीमतें
अगर आप हर महीने-दो महीने पर पेट्रोल-डीजल की बदलती क़ीमतों से परेशान हैं तो सोच लीजिए कि आने वाले दिनों में ये क़ीमतें हर दिन बदलने वाली हैं.
तेल कंपनियों के एक नए प्रस्ताव के तहत भारत के कुछ शहरों में पेट्रोल और डीज़ल की क़ीमतों को अंतरराष्ट्रीय क़ीमतों से जोड़ा जाएगा.
भारतीय तेल कंपनियां मसलन इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन, भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन और हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्प इस योजना के लिए तैयार हैं कि हर दिन अंतरराष्ट्रीय मार्केट के हिसाब से भारत के कुछ शहरों में पेट्रोल दिया जाए.
आईओसी के चेयरमैन बी अशोक ने पीटीआई से कहा, 'हम चाहेंगे कि देश के सभी पेट्रोल पंपों पर अंतरराष्ट्रीय बाज़ार के हिसाब से पेट्रोल-डीज़ल मिले.'
उन्होंने बताया कि पहले ये पायलट योजना पुड्डुचेरी, आंध्र प्रदेश के विशाखापटनम, राजस्थान के उदयपुर, झारखंड के जमशेदपुर और चंडीगढ़ में लागू की जाएगी.
इस बारे में पूछे जाने पर पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का कहना था कि इस फैसले से सरकार का कोई लेना देना नहीं है और हर दिन तेल की कीमतें बदलने का प्रस्ताव विशेषज्ञों की राय पर लिया जा रहा है.
अभी कैसे तय होती है क़ीमत
इस समय भारत में तेल की क़ीमतें अंतरराष्ट्रीय बाज़ार से जुड़ी हुई तो हैं लेकिन हर दिन के हिसाब से नहीं.
हर माह की पहली तारीख और 16 तारीख को औसत अंतरराष्ट्रीय कीमत और करेंसी की रेट के आधार पर तेल की क़ीमतें तय की जाती हैं.
कई बार ऐसा भी होता है कि तेल की क़ीमतें काफी नीचे जाने पर भी उपभोक्ता तक वो फायदा नहीं पहुंचता है और इसे लेकर कंपनियों और सरकार की काफ़ी आलोचना भी होती रहती है.
अब कंपनियों के नए पायलट से हर दिन ये क़ीमतें बदलेंगी. उम्मीद जताई जा रही है कि लोगों की ये शिकायत ख़त्म हो जाएगी कि कंपनियां तेल की कम क़ीमत पर होने वाले फ़ायदे को लोगों तक नहीं पहुंचा रही हैं.
हालांकि अभी ये पायलट कुछ ही शहरों में शुरू होगा. यह पूछे जाने पर कि योजना कब से शुरू होगी, आईओसी के चेयरमैन ने कहा कि ऐसा एक महीने में हो सकता है.
हालांकि उन्होंने कोई तारीख नहीं बताई लेकिन मीडिया रिपोर्टों में कहा जा रहा है कि एक मई से ये पायलट शुरू हो सकता है.
सरकार और तेल कीमतें
जून 2010 में ये फैसला किया गया था कि पेट्रोल की क़ीमतें अब सरकार तय नहीं करेगी.
इसके बाद अक्तूबर 2014 में डीज़ल की क़ीमतों को भी सरकार के नियंत्रण से अलग कर लिया गया.
सैद्धांतिक रूप से तेल कंपनियों को पेट्रोल और डीज़ल की क़ीमतें तय करने का हक है लेकिन ये फैसले अभी भी राजनीतिक रुख़ को देखकर किए जाते हैं क्योंकि सभी तेल कंपनियां सरकारी हैं.
एक अप्रैल को आख़िरी बार पेट्रोल की कीमतें बदली थीं और इसमें करीब चार रूपए की गिरावट आई थी जबकि डीज़ल के रेट करीब तीन रुपए गिरे थे.
कंपनियों ने ये फैसला करीब ढाई महीने बाद किया था. पांच राज्यों में हो रहे विधानसभा चुनाव के दौरान तेल कंपनियों ने पेट्रोल-डीजल की क़ीमतों में कोई फेरबदल नहीं किया था.
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