यूपी: महिला शिक्षकों के साड़ी पहनने वाला आदेश वापस

योगी आदित्यनाथ

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    • Author, समीरात्मज मिश्र
    • पदनाम, लखनऊ से बीबीसी हिंदी डॉटकॉम के लिए

उत्तर प्रदेश सरकार ने विश्वविद्यालय और डिग्री कॉलेजों के शिक्षकों को शालीन कपड़ों में आने संबंधी आदेश वापस ले लिया है. राज्य के उच्च शिक्षा निदेशक आरपी सिंह ने बीबीसी से बातचीत में इस बात की पुष्टि की.

उच्च शिक्षा निदेशालय ने 30 मार्च को एक सर्कुलर जारी किया था जिसमें कहा गया था कि 'विश्वविद्यालय के सभी शिक्षकों और अन्य संबंधित सदस्यों से शालीन कपड़ों में समय पर कार्यालय आने और अपना काम ज़िम्मेदारी के साथ करने का निवेदन किया जाता है. काम के दौरान जींस और टीशर्ट पहनने पर रोक रहेगी.'

जींस

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आदेश में महिला शिक्षकों को साड़ी और पुरुष शिक्षकों को औपचारिक तरीके से पैंट और शर्ट में आने को कहा गया था. इस आदेश के दायरे में राज्य के 158 सरकारी कॉलेजों के अलावा सरकार से सहायता पाने वाले 331 कॉलेज आते थे.

लेकिन इस आदेश के अलावा बायोमेट्रिक हाज़िरी लगाने जैसे कुछ अन्य आदेशों की राज्य भर में आलोचना हो रही थी. उत्तर प्रदेश विश्वविद्यालय महाविद्यालय शिक्षक महासंघ (एफयूपीयूसीटीए) ने शासन का कोई भी फ़रमान न मानने का पत्र जारी कर रखा है.

यही नहीं 9 अप्रैल को संगठन ने कानपुर में एक आपात बैठक भी बुलाई है जिसमें अगली रणनीति तय की जाएगी.

शर्ट

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संगठन के महामंत्री डॉक्टर विवेक द्विवेदी ने बीबीसी को बताया, "हम सिर्फ़ गुटखा और धूम्रपान प्रतिबंधित करने वाले आदेश का स्वागत करते हैं लेकिन ड्रेस कोड, बायोमीट्रिक हाज़िरी और संपत्ति की घोषणा जैसे आदेशों के ख़िलाफ़ हैं और सरकार की इस तानाशाही का राज्य भर के महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों के शिक्षक विरोध करेंगे."

योगी आदित्यनाथ

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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सरकारी कार्यालयों, स्कूलों और कॉलेजों में पान-मसाले और गुटखे पर प्रतिबंध लगा दिया था जिसके बाद उच्च शिक्षा निदेशालय का यह आदेश आया था. इससे पहले उच्च शिक्षा निदेशक आरपी सिंह ने कहा था कि आदेश में शिक्षकों के शालीन कपड़े पहनने पर ज़ोर दिया गया है.

उनके मुताबिक़, "शिक्षक छात्रों के लिए रोल मॉडल होते हैं, अगर वे शिष्ट कपड़े पहनेंगे तो बच्चे भी उसे अपनाएंगे. "

आरपी सिंह ने छात्रों के सामने आदर्श पेश करने के लिए अध्यापकों को काली या नीली पैंट और सफ़ेद या हल्की नीली शर्ट पहनने की सलाह दी थी. लेकिन शिक्षकों में इसे लेकर काफ़ी नाराज़गी थी और शायद इसी वजह से इस आदेश को वापस ले लिया गया है.

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