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'पिता की मौत के बाद भी उन्हें देख नहीं सका'
- Author, नितिन श्रीवास्तव
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, नूंह हरियाणा से
राजस्थान में कथित गोरक्षकों के हमले में घायल हुए पहलू खां की मौत के बाद उनके घर में ग़म का माहौल है.
पहलू खां के बड़े बेटे इरशाद को दुख है कि वो अपने पिता को उनकी मौत के बाद भी उन्हें देख नहीं सके.
अलवर में हुई इस घटना में घायल हुए करीब 50 साल के पहलू खां की इलाज के दौरान मौत हो गई थी.
हरियाणा के मेवात के रहने वाले पहलू खां के घर में चार बेटे, चार बेटियां, उनकी पत्नी और बूढ़ी मां भी हैं.
इरशाद कहते हैं कि पिता की मौत से मां सदमे में हैं और कुछ कह पाने की हालत में नहीं हैं.
वो घटना वाले दिन को याद करते हुए बताते हैं, ''31 मार्च को हम पशु खरीदने के लिए गांव से जयपुर गए थे . हम भैंस लेने के लिए गए थे लेकिन वहां हमें भैंस नहीं मिली, इसलिए हम दूध देने वाली दो गायें लेकर वहां से निकल आए.''
वो बताते हैं, ''करीब ढाई बजे हम वहां से रवाना हुए, जब हम बहरोड़ पहुंचे तो पुल को पार करते ही सात-आठ लोग बाइक पर हमारे पीछे आए और हमारी गाड़ी रोकने को कहा तो हमने गाड़ी रोकी. हमने उन्हें बताया कि हम जयपुर के पशु मेले से इन गायों को लेकर आ रहे हैं और पर्ची भी दिखाई, उन्होंने पर्ची देखी नहीं और फाड़कर फेंक दी.''
इरशाद बताते हैं कि हमलावरों ने एक बात भी नहीं सुनी और कहा कि किसी और काम के लिए गाय ले जा रहे हैं.
उन्होंने बताया पहलू खां समेत सभी लोगों को इतना पीटा गया कि वो बेसुध होकर सड़क पर गिर गए और उन्हें याद नहीं कि कितने लोग वहां मारपीट कर रहे थे.
इरशाद कहते हैं कि हमला करने वाले लोग तेल छिड़क कर आग लगाने की बात कर रहे थे.
इस घटना के 15-20 मिनट बाद पुलिस आई और हमला करने वालों को धमकाकर भगाया. वो बताते हैं कि प्रशासन ने एंबुलेंस बुलाकर घायलों को कैलाश अस्पताल पहुंचाया.
कैलाश अस्पताल पास ही में स्थित एक निजी अस्पताल है.
इरशाद बताते हैं, ''अस्पताल में दाखिल होने के तीसरे दिन मेरे पिता पहलू ख़ां ने दम तोड़ दिया, अस्पताल में हम उनसे मिल भी नहीं पाए. जब अस्पताल में भर्ती किया गया तो उन्हें और हमें इमरजेंसी में रखा गया तभी आख़िरी बार देखा था. ''
वो कहते हैं , ''मरने के बाद भी उनसे हमारी मुलाकात नहीं हुई. मेरे पिता को मौत के बाद प्रशासन की तरफ़ से सरकारी अस्पताल ले जाया गया और हम चार लोगों का अस्पताल से निकालकर थाने में डाल दिया. ''
इरशाद का कहना है कि प्रशासन ने अपनी पूरी कोशिश की लेकिन उन लोगों के आगे किसी की नहीं चलती.
पहलू खां का परिवार पशु पालन से जुड़ा हुआ था और इरशाद बताते हैं कि इसके अलावा परिवार के पास और कोई काम भी नहीं है.
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