ओडिशा: ईरानी महिला नरगिस बरी

    • Author, नूशा सोलुच
    • पदनाम, बीबीसी मॉनिटरिंग

भारत की एक जेल में बंद ईरानी मूल की ब्रिटिश चैरिटी वर्कर नरगिस कलबासी अशतारी को बरी कर दिया गया है.

ओडिशा स्थित रायगढ़ा अतरिक्त ज़िला मजिस्ट्रेट की अदालत ने उन्हें निर्दोष क़रार दिया है.

नरगिस अशतारी 2011 में भारत आई थीं.

वे देश के सबसे पिछड़े इलाके में अनाथ बच्चों के लिए काम करने लगीं, लेकिन महज़ तीन साल के अंदर वो ऐसे मुकदमे में फंस गईं जिसमें उन्हें भारत से बाहर जाने की इजाज़त नहीं मिल रही है.

28 साल की नरगिस कलबासी अशतारी को ईरानी मीडिया दयालु महिला के तौर पर पेश करता रहा है. उन्होंने अब तक का अपना जीवन शोषित और अनाथ बच्चों की देखरेख में बिताया है.

ईरान में उनके समर्थन में कई सोशल मीडिया यूज़र और वेबसाइट भी नजर आते हैं और उन्हें मुक्त कराने के लिए ईरान के विदेश मंत्री को कई अभिनेता, सेलेब्रिटी और वकीलों ने पत्र भी लिखा है.

उनके समर्थकों का मानना है कि वो भारत में गरीब बच्चों के बीच काम कर रही थीं, लेकिन स्थानीय राजनीति का शिकार हो गईं.

लेकिन भारत में ओडिशा के रायगढ़ा ज़िले के कई लोगों के मुताबिक नरगिस विदेशी चैरिटी संस्थान में काम करती हैं और वो आरोप लगाते हैं कि उनकी वजह से एक बच्चे की मौत हो गई है.

नरगिस को एक साल के क़ैद की सज़ा हुई थी. ये सज़ा उन्हें इसलिए मिली क्योंकि उनके द्वारा आयोजित एक पिकनिक में हुई लापरवाही के चलते एक बच्चे की मौत हो गई थी. उन्होंने सज़ा के ख़िलाफ़ अपील की और फ़िलहाल वो ज़मानत पर हैं.

इस मामले में अगली सुनवाई इस महीने के आख़िर में होगी. नरगिस मामले को जनजातीय राजनीति और भ्रष्टाचार से जोड़ते हुए कहती हैं, "सत्ता और पुलिस से मिले हुए प्रभावशाली लोगों ने मेरा उत्पीड़न किया है." उन्होंने इस मामले में अपनी याचिका चेंज डॉट ओआरजी वेबसाइट पर लिखी है जिसे सैकड़ों लोगों का समर्थन मिला है.

नरगिस के मुताबिक भारत में काम करना उनका सपना था, लेकिन उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि उन्हें क़ानूनी मामलों में उलझना होगा.

सपने के रास्ते में क़ानून

ये मामला पांच साल के लड़के असीम जिलाकारा की मौत से जुड़ा है. असीम 2014 में तब ग़ायब हुआ था जब वो अशतारी द्वारा आयोजित पिकनिक में हिस्सा लेने गया था.

असीम के माता-पिता अशतारी के यहां काम करते थे. कहा गया कि असीम पास की नदी में बह गया और फिर उसे तलाशा नहीं जा सका. अशतारी के मुताबिक बच्चे के माता-पिता ने पुलिस को अपने बेटे की मौत की वजह के बारे में उसी दिन बयान दिया था, लेकिन एक महीने के अंदर उन लोगों ने शिकायत दर्ज करा दी और कहा कि अशतारी ने उनके बेटे को नदी में फेंक दिया.

बच्चे की मां अंजना जिलाकारा का आरोप है, "अशतारी ने जान-बूझकर मेरे बेटे को मार दिया. उन्होंने मुझे उस दिन खाना बनाने को कहा था. खाना बनाने की जगह नदी से काफ़ी दूर थी. वो नशे में थीं. उन्होंने मेरे बेटे को पानी में फेंक दिया."

अशतारी इन आरोपों का खंडन करती हैं. उनका कहना है कि न तो वह बच्चा उनकी फ़ाउंडेशन से जुड़ा था और न ही उनकी देखभाल में था. उनके मुताबिक उन पर मुक़दमा तब दर्ज किया गया जब उन्होंने स्थानीय लोगों और अधिकारियों को रिश्वत देने से इनकार कर दिया.

स्थानीय अदालत ने उन्हें इस मामले में दोषी ठहराते हुए तीन लाख रुपया ज़ुर्माना भरने का आदेश दिया. अदालत ने ये माना कि नरगिस ने ख़तरनाक जगह पर पिकनिक का आयोजन किया था.

अदालत ने दी सज़ा

हालांकि नरगिस का आरोप है कि पुलिस और स्थानीय अधिकारी भी जनजातीय स्थानीय लोगों की मदद कर रहे हैं.

रायगढ़ा की पुलिस अधीक्षक शिवा सुब्रमनी कहती हैं, "उनके ख़िलाफ़ पर्याप्त सबूत हैं. अगर पुलिस भ्रष्ट है तो उन्हें ट्रायल के दौरान इसका उल्लेख करना था."

नरगिस का जन्म भले ईरान में हुआ हो, लेकिन चार साल की उम्र में वह ब्रिटेन चली गईं. कम उम्र की थीं तभी उनके माता-पिता का निधन हो गया. इसके बाद वह अपने दो भाइयों के साथ कनाडा अपने रिश्तेदारों के साथ रहने चली गईं.

नरगिस के छोटे भाई आमिर के मुताबिक वो बच्चों को पढ़ाती थीं और बच्चे उनसे प्यार करते थे. बच्चों के लिए अपना जीवन लगाने का फ़ैसला उन्हें दक्षिण एशिया ले आया.

पहले उन्होंने मालदीव में काम किया फिर श्रीलंका चली गईं. 2011 में भारत के सबसे ग़रीब इलाके, ओडिशा के मुकुंदपुर के गांव पहुंची. नरगिस ने यहां पर्शियन फ़ाउंडेशन की स्थापना की. इस फ़ाउंडेशन के लिए वह पैसा कनाडा में जुटाती थीं.

लेकिन जब उन्होंने अनाथ बच्चों के लिए दूसरा घर बनाया तो एक स्थानीय गैर सरकारी संगठन से तनातनी भी हो गई.

स्थानीय ग़ैर सरकारी संगठन के मैनेजर ताना रामानजुलु का आरोप है , "वह विदेशों से पैसे लाती थीं, लेकिन मनमर्ज़ी से ख़र्च करती थीं. वो आमदनी और ख़र्च का हिसाब नहीं रखती थीं. उनके काम में कोई पारदर्शिता नहीं थी."

'आगे बढ़ना चाहती हूं'

हालांकि नरगिस इन आरोपों का खंडन करते हुए बताती हैं, ''मैं अपने दोस्तों से डोनेशन लाती थी और मैंने कोई भी पैसा अपने ऊपर खर्च नहीं किया.''

हालांकि अप्रैल, 2015 में सरकार ने विदेशों से मदद लेने वाली करीब 9,000 गैर सरकारी संगठनों का पंजीयन रद्द कर दिया था.

वैसे ईरानी और ब्रितानी विदेश मंत्रालय नरगिस की मदद कर रहा है. ब्रिटेन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने बीबीसी से कहा, "2014 से ही अशतारी की काउंसलिंग कर रहे हैं. ज़रूरत पड़ने पर आगे भी मदद जारी रखेंगे."

नरगिस इन दिनों हैदराबाद स्थित ईरानी वाणिज्य दूतावास में रह रही हैं और शोषित और अनाथ बच्चों को अंग्रेज़ी सिखा रही हैं.

ईरान के विदेश मंत्री जावेद ज़ारीफ के मुताबिक वे भारतीय अधिकारियों के साथ मिलकर नरगिस को जल्दी ही मुश्किलों से निकालने की कोशिश कर रहे हैं.

नरगिस को भारत से बाहर जाने की इज़ाजत नहीं है. उन्होंने अपने टेलिग्राम अकाउंट में लिखा है, "मैं इन मुश्किलों से आगे निकलना चाहती हूं."

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