राम मंदिर सभी भारतीयों के सहयोग से बने: आरएसएस

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बाबरी मस्जिद राम जन्मभूमि मामले को सहमति से हल करने के सुप्रीम कोर्ट के सुझाव का केंद्रीय मंत्री महेश शर्मा और उमा भारती के साथ-साथ हिंदू संगठन आरएसएस ने भी स्वागत किया है.
केंद्रीय मंत्री महेश शर्मा ने टीवी चैनल एनडीटीवी से कहा कि केंद्र इस मसले में मध्यस्थता करने के लिए तैयार है.
उधर केंद्रीय मंत्री उमा भारती ने कहा, 'मैं मानती हूं कि यह मुद्दा कोर्ट से बाहर सुलझ सकता है.'

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मंगलवार को बीजेपी नेता सुब्रमण्यम स्वामी की याचिका पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने सुझाया कि इस मसले को दोनों पक्ष कोर्ट से बाहर आपसी बातचीत के ज़रिए सुलझाने की कोशिश करें.
कोर्ट ने कहा कि दोनों पक्षों को बातचीत में ये ध्यान रखना चाहिए कि ये बहुत 'संवेदनशील' और 'आस्था से जुड़ा' मसला है.
आरएसएस धर्मसंसद की मानेगा
कोर्ट की टिप्पणी पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के नेता दत्तात्रेय होसबले ने कहा है कि सभी भारतीयों की भागीदारी के साथ एक विशाल राम मंदिर बनाया जाना चाहिए.

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दत्तात्रेय के हवाले से समाचार एजेंसी पीटीआई ने कहा कि 'धर्म संसद और कोर्ट जाने वाले पक्षों को मिलकर इसे तय किया जाना है.'
हालांकि बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी ने इस पर कोई खास उत्साह नहीं दिखाया है.

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बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी के संयोजक ज़फ़रयाब जिलानी ने कहा कि, 'बातचीत इससे पहले नाकाम रही है और कोर्ट से बाहर मामला हल होना संभव नहीं है.'
दोनो पक्ष बात करें- भाजपा प्रवक्ता
पीटीआई के अनुसार, पार्टी प्रवक्ता संबित पात्रा ने कहा कि 'हम इस पहल का स्वागत करते हैं और मानते हैं कि सभी पक्षों को कोर्ट से बाहर बातचीत करनी चाहिए.'
आडवाणी, उमा पर आरोप कब तय होंगे-ओवैसी

ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) पार्टी के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने ट्वीट किया है, 'हमें 1992 से ही इंतज़ार है कि बाबरी मस्जिद गिराने में आडवाणी, जोशी, उमा भारती के ख़िलाफ़ साजिश रचने का आरोप कब तय होगा.'
उन्होंने एक अन्य ट्वीट में कहा, 'कृपया ये याद रखें कि बाबरी मस्ज़िद मुक़दमा मिल्कियत के बारे में है जिसे इलाहाबाद कोर्ट ने ग़लत तरीक़े से पार्टनरशिप का मामला तय कर दिया और इसीलिये ये मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा है.'
ओवैसी ने कहा कि अदालत को इस मामले की रोज़ाना सुनवाई शुरू कर देनी चाहिए.
बातचीत से नहीं सुलझा था मसला- येचुरी

माकपा नेता सीताराम येचुरी ने कहा कि बातचीत से मसला नहीं सुलझा तभी तो यह मामला कोर्ट में गया था.
सुब्रमण्यम स्वामी ने इस मामले में जल्द सुनवाई करने का सर्वोच्च अदालत से आग्रह किया था, जिसके बाद कोर्ट ने ये टिप्पणी की है.
पिछले साल 26 फ़रवरी को सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में हस्तक्षेप करने के लिए स्वामी को इजाज़त दी थी.
उन्होंने विवादित स्थल पर राम मंदिर बनाए जाने की मांग वाली अर्जी दी थी.
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