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यूपी: 36 फ़ीसदी विधायकों के ख़िलाफ़ आपराधिक केस
उत्तर प्रदेश के नए चुने गए 402 विधयकों में से 143 यानी 36 फ़ीसदी के ख़िलाफ़ घोषित रूप से आपराधिक केस दर्ज हैं. जबकि 2012 की विधानसभा में ये संख्या 189 यानी 47 फ़ीसदी थी.
उत्तर प्रदेश इलेक्शन वॉच और एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म ने 403 में से 402 विधायकों के हलफ़नामे का अध्ययन कर ये आँकड़े जारी किए हैं. केवल एक विधायक का शपथपत्र इसमें शामिल नहीं है.
नई विधानसभा में अगर गंभीर आपराधिक मामलों की बात करें तो 107 विधायकों के ख़िलाफ़ मामले दर्ज हैं यानी 26 प्रतिशत विधायक. 2012 में ये आँकड़ा 24 फ़ीसदी था.
इसमें हत्या, हत्या की कोशिश जैसे जुर्म शामिल हैं.
यूपी :पार्टी के हिसाब से आपराधिक मामले
- भाजपा- 114 विधायक
- सपा- 14 विधायक
- बसपा- 5 विधायक
- कांग्रेस- 1 विधायक
- निर्दलिय- 3
यूपी :पार्टी के हिसाब से गंभीर आपराधिक मामले
- भाजपा-83 विधायक
- सपा- 11 विधायक
- बसपा- 4 विधायक
- कांग्रेस- 1 विधायक
- निर्दलिय- 3
यूपी के प्रमुख आँकड़ों पर एक नज़र
- हत्या का आरोप : आठ विधायकों के ख़िलाफ़ हत्या (आईपीसी सेक्शन 302) का मामला
- हत्या की कोशिश का आरोप: 34 विधायकों के ख़िलाफ़ आईपीसी सेक्शन 307 के घोषित मामले
- महिलाओं के ख़िलाफ़ अपराध : भाजपा विधायक अशोक कुमार राणा के ख़िलाफ़ आईपीसी की धारा 354 के तहत मामला.
पंजाब का हाल
पंजाब की बात करें तो इस बार की विधानसभा में 117 में से 16 विधायकों के ख़िलाफ़ आपराधिक मामले दर्ज हैं. जबकि पिछली बार संख्या 19 थी.
11 विधायकों पर गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं जिसमें हत्या, लूट और चोरी जैसे मामले हैं.
पार्टी के हिसाब से सबसे ज़्यादा आपराधिक मामले कांग्रेस विधायकों की झोली में हैं (9), आप (4 विधायक), अकाली दल ( एक विधायक) और लोक इंसाफ़ पार्टी (2 विधायक).