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जेएनयू के दलित छात्र ने की कथित तौर पर ख़ुदकुशी
दिल्ली पुलिस का कहना है कि जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में दलित शोध छात्र मुथुकृष्णनन जीवानंदम का शव सोमवार शाम एक मित्र के घर फंदे से लटका मिला है. पुलिस इसे आत्महत्या का मामला मान रही है लेकिन ये भी कह रही है कि उसे कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है.
दिल्ली पुलिस में अतिरिक्त डीसीपी चिन्मय बिस्वाल ने बीबीसी संवाददाता वात्सल्य राय को बताया "सोमवार शाम पांच बजे पीसीआर कॉल आई थी. कॉल के बाद पुलिस टीम मुनिरिका विहार के एक घर पहुंची. मौके पर पहुंची पुलिस को एक कमरा अंदर से बंद मिला. पुलिस जब दरवाज़ा तोड़कर अंदर घुसी तो शव पंखे से लटकता मिला."
उन्होंने बताया, "अभी तक हमें लग रहा है कि ये निजी कारण से आत्महत्या का मामला है. हमें कोई सुसाइड नोट नहीं मिला है. अभी इसे यूनिवर्सिटी से जोड़कर देखने का कोई कारण हमारे पास नहीं है."
मुथुकृष्णनन जीवानंदम ने फ़ेसबुक पर रजनी कृष के नाम से अपना प्रोफ़ाइल बनाया था जिस पर उन्होंने हाल ही में कुछ पोस्ट में जेएनयू में समानता के मुद्दे पर सवाल उठाए थे.
दिल्ली पुलिस में अतिरिक्त डीसीपी चिन्मय बिस्वाल से जब रजनी कृष की सोशल मीडिया पोस्टों के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि अभी हम उनकी सोशल मीडिया पोस्टों को आत्महत्या से जोड़ कर नहीं देख रहे हैं, लेकिन उनकी भी जांच की जाएगी.
मृतक मुथुकृष्णनन जीवानंदम उर्फ रजनी कृष तमिलनाडु के सेलम ज़िले के रहने वाले थे और एक साल पहले उन्होंने जेएनयू में दाख़िला लिया था.
पुलिस के मुताबिक, रजनी कृष सोमवार को अपने एक दक्षिण कोरियाई मित्र के घर गए थे जिन्होंने होली के मौके पर जेएनयू के अपने दो-तीन मित्रों को घर पर खाने के लिए आमंत्रित किया था.
पुलिस का कहना है कि आत्महत्या से पहले रजनी कृष कमरे में सोने चले गए थे. पुलिस का कहना है कि उन्होंने कमरा अंदर से बंद कर लिया था. जब दरवाज़ा बाहर से खटखटाया गया और कोई जवाब नहीं मिला तो पुलिस को जानकारी दी गई.
पुलिस का कहना है कि फिलहाल शव को शवगृह में रखा गया और मंगलवार को पोस्टमार्टम किया जाएगा.