मोदी और अमित शाह से बड़े इवेंट मैनेजर नहीं हैं पीके

प्रशांत किशोर

इमेज स्रोत, MANISH SAANDILYA

प्रशांत किशोर यानी पीके 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा की जीत का श्रेय ले रहे थे, उनका दावा था कि चाय पर चर्चा जैसे उनके आइडिया की वजह से नरेंद्र मोदी सत्ता में आए.

मोदी और प्रशांत किशोर

इमेज स्रोत, PTI

उसके बाद भाजपा से उनकी खटपट हो गई, उन्होंने बिहार में भाजपा को हराने की सुपारी ली.

उन्होंने लालू और नीतीश की जोड़ी को जीत दिलाने के लिए पोस्टरों के रंग बदलवाने से लेकर, डीएनए सैंपल तक दिल्ली भिजवाए.

इसके बाद लगा कि पीके के पास कोई जादू की छड़ी है, वो जिस पार्टी के रणनीतिकार बनेंगे उसकी जीत के रास्ते बन जाएँगे.

बिहार चुनाव

इमेज स्रोत, MANISH SHANDILYA

यही वजह है भंवर में फँसी कांग्रेस ने अपनी नैया पार लगाने के लिए उनका सहारा लेने का फ़ैसला किया.

बिना किसी पार्टी के साथ वैचारिक जुड़ाव या प्रतिबद्धता के सिर्फ़ अपनी प्रोफ़ेशनल फ़ीस के लिए काम करने वाले पीके एक बार फिर चर्चा में थे.

पीके ने एक तरह से कांग्रेस की कमान संभाल ली, पार्टी के नेताओं की बैठक की अध्यक्षता करने लगे, उन्हें काम बाँटने लगे.

चुनाव और इवेंट मैनेजमेंट

यह चर्चा चल पड़ी कि अब चुनाव भी पूरी तरह इवेंट मैनेजमेंट बन चुके हैं.

उनकी खाट सभा के बारे में प्रधानमंत्री मोदी ने तंज़ करते हुए कहा था कि उनकी खाट खड़ी हो जाएगी, और वही हुआ भी.

मतगणना

इमेज स्रोत, Reuters

एक बार फिर साबित हुआ कि अगर चुनाव इवेंट मैनेजमेंट है तो मोदी और शाह कहीं बड़े इवेंट मैनेजर हैं.

लोग सपा-कांग्रेस गठबंधन की हार के बाद पूछ रहे हैं कि पीके कहाँ हैं?

यूपी के साफ़ रुझान सामने आते ही बिहार भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व उप मुख्यमंत्री सुशील मोदी ने पीके को 'भाड़े का सैनिक' कहा.

पीके के पिछले कारनामों को भी लोग अब नए ढंग से देख रहे हैं.

बीजेपी समर्थक

इमेज स्रोत, AP

2014 की बीजेपी का जीत का क्रेडिट पार्टी के लोगों ने उनको कभी नहीं दिया, लेकिन बिहार की जीत का श्रेय उन्हें मोटे तौर पर मिला था.

लेकिन इस बार के बाद उनकी प्रोफ़ेशनल सर्विस के कितने ग्राहक मिलेंगे, कहना मुश्किल है.

पीके नेता नहीं हैं, लेकिन राजनीति को अच्छी तरह से समझते हैं, इस बार उन्हें अच्छी तरह समझ में आया होगा कि इस खेल के नियम हर बार बदल जाते हैं.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)