कहां किसकी प्रतिष्ठा दांव पर

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पांच राज्यों में कुल सात चरणों में हुए मतदान के बाद अब सबकी नज़रें परिणामों पर हैं.

इन चुनावों में कई दिग्गज नेताओं की प्रतिष्ठा दांव पर है.

उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी, भाजपा और बहुजन समाज पार्टी के बीच कांटे की टक्कर है.

उत्तर प्रदेश में कुल 403 सीटें हैं और बहुमत के लिए 202 का आंकड़ा पार करना होगा.

इन चुनावों में जहां सपा के अखिलेश की प्रतिष्ठा दांव पर है वहीं बीजेपी की तरफ से योगी आदित्यनाथ, केशव प्रसाद मौर्या से लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भी प्रतिष्ठा दांव पर है क्योंकि उन्होंने बाकी राज्यों की तुलना में यूपी में सबसे अधिक रैलियां की.

हां मायावती की बसपा का भविष्य भी इन चुनावों पर निर्भर करता है.

पंजाब

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पंजाब के उपमुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल के सामने आम आदमी पार्टी के सांसद भगवंत मान हैं. दूसरी ओर कांग्रेस ने युवा नेता और पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह के पोते और सांसद रवनीत सिंह बिट्टू हैं.

सुखबीर 2009 के उपचुनाव में जलालाबाद सीट जीतने के बाद से ही वहाँ से विधायक हैं तो बाकी दोनों के लिए मैदान नया है.

पंजाब की लांबी विधान सभा सीट से मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल पांचवीं बार अपनी किस्मत आजमा रहे हैं.

वैसे तो यह विधानसभा की सीट बठिंडा संसदीय क्षेत्र में आती है जहाँ से बड़े बादल की बहू हरसिमरत कौर बादल सांसद हैं.

पंजाब में 117 सीटें हैं और बहुमत के लिए बहुमत के लिए किसी भी पार्टी को 59 सीटों का आंकड़ा छूना होगा.

उत्तराखंड

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हरीश रावत इस पार दो जगहों किच्छा और हरिद्वार ग्रामीण से चुनाव लड़ रहे हैं. जबकि कांग्रेस के किशोर उपाध्याय और दिग्गज नेता इंदिरा हृदयेश भी मैदान में हैं.

बीजेपी की तरफ से मदन कौशिक, स्वामी यतिश्वरानंद, सतपाल महाराज, हरक सिंह रावत, अजय भट्ट, यशपाल आर्य और सौरभ बहुगुणा क़िस्मत आजमा रहे हैं.

चुनाव की घोषणा के बाद टिकट न मिलने पर दोनों ही पार्टियों के बहुत सारे नेता बाग़ी हुए और प्रतिद्वंद्वी पार्टी में जा शामिल हुए.

ऐसे में ये देखना दिलचस्प होगा कि कौन कहां बाजी मारता है.

70 विधानसभा सीटों वाले उत्तराखंड में बहुमत के लिए 36 सीटों का आंकड़ा चाहिए.

मणिपुर

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इबोबी सिंह के थौबाल चुनाव क्षेत्र से चुनाव लड़ रहे हैं और उनके विरोध में हैं भारतीय जनता पार्टी के बसंत सिंह और पीआरजेए की इरोम शर्मीला.

इरोम शर्मिला ने जब अपनी 16 साल लंबी भूख हड़ताल तोड़ने के बाद राजनीतिक दल बनाने का ऐलान किया तो साथ-साथ ये भी कहा कि वो मुख्यमंत्री बनना चाहती हैं.

एम गैखनगम प्रदेश के उप मुख्यमंत्री हैं. वो सूबे के गृह मंत्री भी हैं और नुंगबा चुनाव क्षेत्र से फिर से क़िस्मत आज़मा रहे हैं. उनका ताल्लुक़ रोंगमइ समुदाय से है.

पांच बार लगातार साएकोट से विधायक रह चुके हाओकिप इस बार फिर से मैदान में हैं. वो प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष भी हैं.

मणिपुर में 60 सीटें हैं और बहुमत के लिए 31 सीटें जरूरी हैं.

गोवा

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गोवा में आम आदमी पार्टी के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार एल्विस गोम्स हैं.

बीजेपी ने गोवा विधानसभा चुनाव लक्ष्मीकांत पारसेकर के नेतृत्व में लड़ा गया था.

वर्तमान में वो मेंड्रम विधानसभा क्षेत्र से विधायक हैं और इसी सीट से चुनाव में उतरे हैं.

पारसेकर को मनोहर पर्रिकर के केंद्रीय मंत्री बनने के बाद नवंबर, 2014 में गोवा का मुख्यमंत्री बनाया गया था.

गोवा में 40 सीटें और बहुमत के लिए 21 सीटें चाहिए.

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