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उत्तराखंड की सड़कों पर उतरीं महिला 'चीता'
- Author, राजेश डोबरियाल
- पदनाम, देहरादून से, बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए
अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के मौके पर बुधवार को उत्तराखंड की सड़कों पर गश्त लगाने के लिए महिला चीता सड़कों पर उतरीं.
राज्य में पहली बार दुपहिया वाहनों पर गश्त करने वाले चीता फोर्स में महिलाओं को शामिल किया गया है.
यह महज़ इत्तेफ़ाक़ नहीं है कि महिला दिवस के मौके पर यह शुरुआत एक महिला एसएसपी की कोशिशों से हुई.
देश की पहली महिला डीजीपी कंचन चौधरी भट्टाचार्य इसी राज्य में ही तैनात हुई थीं.
बुधवार को डीजीपी एमए गणपति के साथ एसएसपी देहरादून स्वीटी अग्रवाल ने महिला चीता टीमों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया.
एसएसपी ने कहा कि वह महिलाओं को पुरुषों के समान ही काम करने के मौके देना चाहती हैं.
उन्होंने कहा कि चूंकि महिलाएं संवेदनशील होती हैं, लिहाजा वे कई मामलों को पुरुषों से बेहतर काम कर सकती हैं.
अभी कुल 24 महिला चीता टीमों को सड़क पर उतारा गया है. इनमें 48 महिला पुलिसकर्मी हैं.
इनमें से 22 नगर क्षेत्र में और दो देहात (थाना ऋषिकेश में) तैनात रहेंगी.
महिला चीता टीमें पुरुष चीता टीमों से अलग हैं. इन्हें वायरलेस सेट, बेटन (डंडे) के अलावा सीपीयू में लगने वाले सायरन, पीए सिस्टम (माइक और स्पीकर) के अलावा बेकन लाइट्स से लैस किया गया है.
शुरुआत में इन्हें आठ घंटे तक सुबह 10 से शाम छह बजे तक क्षेत्र में तैनात किया जाएगा.
इस दौरान खाने और रिफ्रेश होने के लिए आधे घंटे का समय भी दिया जाएगा.
इन महिला चीता दलों को आत्मरक्षा के लिए मार्शल आर्ट (जूडो और वुशु), फ़र्स्ट एड और दुपहिया चलाने का भी प्रशिक्षण दिया गया है.
महिला चीता दलों को छह दिन का गहन प्रशिक्षण दिया गया है.
दो दिन पहले चल रहे प्रशिक्षण के दौरान बीबीसी ने वुशु ट्रेनर अंजना रानी से बात की थी.
उन्होंने विश्वास जताया था कि ये सभी अपने पुलिसिंग काम के दौरान आने वाली चुनौतियों का अच्छी तरह से सामना कर सकती हैं.
महिला चीता दल में शामिल मीना नेगी कहती हैं, "महिला चीता दलों के सड़क पर उतरने से न सिर्फ़ महिलाओं को शिकायत करने का साहस मिलेगा, पुलिस की छवि भी सुधरेगी."