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ELECTION SPECIAL: यूपी में वाराणसी समेत 40 सीटों पर मतदान
- Author, विनीत खरे, बीबीसी संवाददाता, वाराणसी
- पदनाम, लखनऊ से समीरात्मज मिश्र
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के सातवें और अंतिम चरण के लिए बुधवार आठ मार्च को मतदान हो रहे हैं. इस चरण में 40 सीटों के लिए 535 उम्मीदवारों के भाग्य का फैसला होगा.
करीब डेढ़ करोड़ वोटर 14 हज़ार से ज़्यादा मतदान केंद्रों में मतदान कर रहे हैं..
इस चरण में वाराणसी, गाज़ीपुर, जौनपुर, चंदौली, मिर्ज़ापुर, भदोही और सोनभद्र की 40 सीटों पर वोट पड़ रहे हैं, लेकिन सभी की निगाहें हैं हाईप्रोफ़ाइल चुनाव क्षेत्र वाराणसी पर.
सोनभद्र, मिर्ज़ापुर और चंदौली नक्सल प्रभावित क्षेत्र हैं जहां सुरक्षा के कड़े इंतज़ाम किए गए हैं.
40 सीटों में भाजपा ने 32 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे हैं. बसपा के उम्मीदवार सभी सीटों पर हैं. इसी तरह सपा 31 सीटों पर चुनाव लड़ेगी जबकि कांग्रेस नौ पर.
2012 के विधानसभा चुनाव में इन 40 सीटों में 23 सपा ने जीते थे जबकि चार भाजपा ने, तीन कांग्रेस ने और पांच बसपा ने.
भाजपा के पास इस चरण की जो चार सीटें थीं उनमें से तीन सीटें वाराणसी शहर की थीं. इन सीटों को बचाए रखना उसके सामने सबसे बड़ी चुनौती है.
पूर्वांचल के सबसे महत्वपूर्ण शहर वाराणसी में कुछ भी हो, उसका असर पड़ोस के चंदौली, जौनपुर, जौनपुर जैसे ज़िलों में पड़ता है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत तीन अन्य केंद्रीय मंत्रियों- मनोज सिन्हा, अनुप्रिया पटेल और महेंद्र नाथ पांडेय की संसदीय क्षेत्र की विधानसभा सीटें भी इसी चरण में आती हैं. इसके अलावा गृहमंत्री राजनाथ सिंह के गृह जनपद चंदौली में भी इसी चरण में मतदान हो रहे हैं.
इसलिए राष्ट्रीय स्तर के नेताओं का अपने क्षेत्रों में कितनी राजनीतिक पकड़ है, इसका फ़ैसला भी आज के मतदान में होगा. आइए जानते हैं, किन सीटों पर सभी की निगाह रहेगी.
वाराणसी
वाराणसी शहर की तीन विधानसभा सीटें हैं- वाराणसी उत्तर, वाराणसी दक्षिण और वाराणसी कैंट.
पिछले विधानसभा चुनाव में ये तीनों सीटें भाजपा के पास थीं. भाजपा की कोशिश है कि वो वाराणसी के ग्रामीण क्षेत्रों में अपनी पकड़ बनाए.
प्रधानमंत्री मोदी जिस तरह तीन दिन यहां सड़कों पर उतरे, उसे इसी कोशिश का हिस्सा बताया गया.
इस बार भाजपा ने वाराणसी दक्षिण से सात बार विधायक रहे श्याम देव चौधरी को हटाकर ब्राह्मण चेहरे नीलकंठ तिवारी को टिकट दिया. उनकी टक्कर होगी कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व सांसद राजेश मिश्रा से.
माना जाता है इससे स्थानीय भाजपा कार्यकर्ताओं में रोष था लेकिन श्याम देव चौधरी पर आरोप लगते रहे हैं कि हालांकि वो बेहद सादे स्वभाव के हैं, उनके पिछले सात कार्यकाल में विकास जैसे रुक सा गया था.
वाराणसी उत्तर से भाजपा के रविंद्र जायसवाल हैं लेकिन कैंट से विधायक ज्योत्सना श्रीवास्तव के बेटे सौरभ को टिकट दिया. कांग्रेस ने यहां से अनिल श्रीवास्ताव को टिकट दिया है.
वाराणसी में राहुल गांधी और अखिलेश यादव ने भी रोडशो किए हैं.
वाराणसी में भाजपा कैसा करती है, इसका असर भाजपा, मोदी और 2019 लोकसभा चुनाव पर पड़ सकता है. वाराणसी शहर में मुस्लिम आबादी देखते हुए उनका वोट भी महत्वपूर्ण होगा.
सेवापुरी (वाराणसी)
इस विधानसभा क्षेत्र में जयापुर गांव है जिसे पीएम मोदी ने गोद लिया था. यहां से भाजपा के सहयोगी अपना दल (सोनेलाल) ने नीलरत्न पटेल नीलू को चुनाव मैदान में उतारा है.
याद रहे कि भाजपा से गठबंधन के मुद्दे पर अपना दल दो फाड़ हो गया. अनुप्रिया पटेल गुट ने भाजपा के साथ गठबंधन किया जबकि उनकी मां कृष्णा पटेल का गुट, निषाद पार्टी और पीस पार्टी के साथ पूरे प्रदेश की 403 सीटों पर चुनाव लड़ रहा है.
अनुप्रिया के गुट और भाजपा के बीच सीटों में तालमेल को लेकर तनातनी रही लेकिन आखिरकार सहमति बनी. सेवापुरी में अपना दल (सोनेलाल) का प्रदर्शन कैसा रहेगा और पटेल समाज किस पर भरोसा जताएगा, इस पर सभी की निगाह रहेगी.
रोहनिया (वाराणसी)
रोहनिया को अपना दल का कर्मक्षेत्र कहा जा सकता है. कुर्मियों की इस पार्टी के जनक सोनेलाल पटेल कांशीराम के साथी थे लेकिन अनबन के कारण अलग हुए और 1995 में उन्होंने अपना दल बनाया.
बाद में उनकी पत्नी कृष्णा ने बागडोर संभाली लेकिन 2014 लोकसभा चुनाव के बाद हुए उपचुनाव में उनकी हार का दोष पार्टी में हुए दो फाड़ को दिया जाता है.
कृष्णा पटेल खुद यहां से मैदान में हैं. उनका मुकाबला सपा के महेंद्र सिंह पटेल से है.
सीट बंटवारे के तहत रोहनिया से भाजपा के सुरेंद्र नारायण सिंह चुनाव मैदान में हैं.
क्या रोहनिया में मोदी की रैली का असर कुर्मी वोटों पर पड़ेगा और वो भाजपा को वोट देंगे या फिर कुर्मी कृष्णा पटेल के साथ जाएंगे, ये देखना दिलचस्प होगा.
ऐसा इसलिए क्योंकि कई कुर्मी अनुप्रिया से नाराज़ हैं. उनका आरोप है कि केंद्रीय मंत्री बनने के बावजूद उन्होंने इलाके पर ध्यान नहीं दिया.
पिंडरा (वाराणसी)
वाराणसी ज़िले के पिंडरा इलाके से कांग्रेस-सपा की ओर से पांच बार चुनाव जीत चुके अजय राय चुनाव मैदान में हैं.
ये वही अजय राय हैं जिन्होंने 2014 लोकसभा चुनाव में वाराणसी से मोदी को चुनौती दी थी. बसपा ने बाबू लाल पटेल को उनके मुकाबले मैदान में उतारा है.
भाजपा को उम्मीद है कि मोदी का नाम उनकी और उनके सहयोगी दलों की नैया पार लगाएगी.
चंदौली
चंदौली जिले में मुगलसराय, सकलडीहा, सैयदराजा और चकिया (एससी) विधानसभा सीटें हैं. ये राजनाथ सिंह का गृहज़िला है इसलिए इस ज़िले में पार्टी का प्रदर्शन महत्वपूर्ण होगा.
विकास को तरस रहे इस ज़िले में लोग बदलाव चाहते हैं.
मुगलसराय सीट से पहली बार भाजपा ने किसी महिला को टिकट दिया है.
चंदौली मानव संसाधन राज्य मंत्री डा. महेंद्र नाथ पांडेय का संसदीय क्षेत्र भी है, इसलिए उनकी प्रतिष्ठा भी दांव पर है.
ताक पर है कई मंत्रियों की साख
केंद्रीय रेल राज्य मंत्री मनोज सिन्हा के संसदीय क्षेत्र गाज़ीपुर में भी इसी चरण में मतदान होगा.
इसके अलावा इस चरण में अखिलेश सरकार के कई मंत्रियों की भी साख दांव पर लगी है. ये मंत्री अपनी सीटों से एक बार फिर मैदान में हैं.
इनमें ग्रामीण अभियंत्रण सेवा विभाग के मंत्री पारसनाथ यादव मल्हनी से, ऊर्जा राज्य मंत्री शैलेंद्र यादव "ललई" शाहगंज से , बेसिक शिक्षा राज्य मंत्री कैलाश चौरसिया मिर्जापुर से और लोक निर्माण राज्य मंत्री सुरेंद्र सिंह पटेल सेवापुरी से चुनाव लड़ रहे हैं.
अखिलेश सरकार से बर्खास्त किये गए मंत्री ओम प्रकाश सिंह भी जमानियां से समाजवादी पार्टी के ही टिकट पर चुनाव मैदान में हैं.
इनके अलावा आखिरी चरण में कुछ और सियासी दिग्गजों की भी परीक्षा होनी है.
समाजवादी पार्टी से टिकट पाने में नाकाम रहे बाहुबली छवि के मौजूदा विधायक विजय मिश्र ज्ञानपुर, बीएसपी विधायक रमेश बिंद मझवां, सिबगतुल्लाह अंसारी मोहम्मदाबाद से एक बार फिर क़िस्मत आज़मा रहे हैं.
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