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गायत्री प्रजापति के अखिलेश मंत्रिमंडल में बने रहने पर राज्यपाल ने सवाल उठाए
- Author, समीरात्मज मिश्र
- पदनाम, लखनऊ से बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए
कथित बलात्कार के मामले में फँसे उत्तर प्रदेश के परिवहन मंत्री गायत्री प्रजापति के मंत्रिमंडल में बने रहने के मामले में राज्यपाल राम नाइक ने सवाल उठाए हैं.
उन्होंने इसे गंभीरता से लेते हुए मुख्यमंत्री को ख़त लिख स्थिति साफ़ करने को कहा है.
राज्यपाल ने उठाया राजनीतिक शुचिता का सवाल
मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को लिखे पत्र में राज्यपाल ने लिखा है, "उच्चतम न्यायालय ने कैबिनेट मंत्री, गायत्री प्रसाद प्रजापति पर एक महिला तथा उसकी नाबालिग पुत्री के साथ अपने साथियों सहित सामूहिक दुष्कर्म के आरोप को संज्ञान में लेते हुए गैर जमानती वारंट जारी किया है."
नाइक ने आगे जोड़ा है, "इस प्रकार के मंत्री के कैबिनेट में बने रहने तथा उनके विरुद्ध कोई कार्रवाई नहीं किए जाने से लोकतांत्रिक शुचिता, संवैधानिक मर्यादा व संवैधानिक नैतिकता का गम्भीर प्रश्न उत्पन्न होता है."
राज्यपाल ने पत्र में कहा है कि मुख्यमंत्री गायत्री प्रजापति के कैबिनेट में बने रहने के औचित्य पर वे अपने विचार जल्द से जल्द बताएं.
राज्यपाल ने मीडिया में आई उन ख़बरों का भी ज़िक्र किया है कि गायत्री प्रजापति के ख़िलाफ़ ग़ैर ज़मानती वारंट और 'लुकआउट नोटिस' जारी किया गया है और उनके विदेश भागने की भी आशंका है.
प्रजापति के ख़िलाफ़ 'लुकआउट नोटिस'
फ़िलहाल गायत्री प्रजापति का पासपोर्ट जब्त कर लिया गया है. उनके ख़िलाफ़ लुकआउट नोटिस भी जारी किया गया है.
यूपी के अपर पुलिस महानिदेशक (क़ानून व्यवस्था) दलजीत चौधरी के मुताबिक़, प्रजापति की तलाश में लखनऊ, कानपुर और अमेठी में कई जगह छापे मारे गए. उन्हें गिरफ़्तार करने के लिए स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) को भी लगाया गया है.
दलजीत चौधरी ने बताया कि पासपोर्ट को रद्द करने के लिए उत्तर प्रदेश पुलिस ने विदेश मंत्रालय से संपर्क किया है.
चौधरी के मुताबिक प्रजापति और इस मामले में छह दूसरे अभुयक्तों के ख़िलाफ़ ग़ैर ज़मानती वारंट जारी किया गया है.
इन सभी पर एक महिला से सामूहिक बलात्कार और उसकी नाबालिग बेटी के साथ बलात्कार की कोशिश का मुकदमा दर्ज है.