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आईटी कंपनियों के संगठन नैसकॉम का प्रतिनिधिमंडल अमरीका में
अमरीकी कांग्रेस में वीज़ा कटौती को लेकर लाए गए प्रस्ताव के खिलाफ भारत ने लॉबिंग तेज़ कर दी है.
इस कटौती की वजह से टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में काम कर रहे दक्षिण एशियाई देशों के कुशल कामगारों के लिए नौकरियों का संकट पैदा हो गया है.
इन देशों के 35 लाख से अधिक लोग अमरीका में काम कर रहे हैं.
केंद्रीय वाणिज्य मंत्री निर्मला सीतारमण ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स से कहा, '' हमने डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन से भारत के 150 अरब डॉलर की आईटी इंडस्ट्री से जुड़े अमरीकी नागरिकों के हितों के बारे में बताया है.''
उन्होंने कहा, '' अमरीका में भारतीय निवेश ने अमरीकी लोगों को रोजगार दिया है. इस बात को अमरीकी प्रशासन के ध्यान में लाया गया है.''
भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कुछ दिन पहले अमरीका से अपील की थी कि वो कुशल भारतीय कामगारों को खुले मन से स्वीकार करें.
टाटा कंसल्टेंसी, इंफ़ोसिस और विप्रो जैसी भारतीय साफ्टवेयर कंपनियों ने 1990 के दशक में वाई2के की समस्या से निपटने में पश्चिमी देशों की कंपनियों की मदद की थी.
राष्ट्रपति ट्रंप की नौकरियों के मामले में अमरीकीयों को प्राथमिकता देने की रट ने, उनके सबसे बड़े बाज़ार के सामने ख़तरा पैदा कर दिया है.
अमरीकी कांग्रेस में पिछले महीने पेश किए गए प्रस्ताव में एच-1 बी वीज़ा के लिए न्यूनतम वेतन को बढ़ाकर दो गुने से भी अधिक कर दिया गया है. इसका आईटी कंपनियों की लागत पर बहुत अधिक असर पड़ेगा, जिनका मुनाफ़ा पहले से ही कम है.
आईटी कंपनियों का संगठन नैसकॉम इस प्रस्ताव के खिलाफ अमरीकी सांसदों और कंपनियों के बीच लॉबिंग कर रही है. वह सांसदों और कंपनियों से कह रही है कि वो प्रशासन पर कुशल कामगारों के अमरीका आने पर रोक न लगाने के लिए कहें.
नैसकॉम का एक प्रतिनिधिमंडल कैपिटल हिल और व्हाइट हाउस में इस मामले को आधिकारिक बनाने के लिए इन दिनों अमरीका में है.
सीतारमण ने कहा, '' हमें नए प्रशासन के साथ बातचीत करनी होगी. हम हर स्तर पर लगातार बात कर रहे हैं.''
अमरीका भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझीदार है. लेकिन दोनों देशों के बीच सामान का व्यापार काफी मंदा है. यह पिछले तीन साल से व्यापार करीब 67 अरब डॉलर तक ही बना हुआ है.
वहीं साफ्टवेयर के निर्यात में पिछले वित्त वर्ष उससे पहले के वित्त वर्ष की तुलना में 10 फ़ीसद की वृद्धि दर्ज की गई.
अमरीकी कांग्रेस की ओर से हर साल जारी होने वाले एच-1बी वीज़ा की अधिकतम सीमा तय किए जाने के बाद भारत सबसे अधिक यह वीज़ा पाने वाला देश है.
हर साल 65 हजार भारतीयों को यह वीजा मिलता है. इंफोसिस के अमरीकी कर्मचारियों में से 60 फ़ीसद से भी अधिक के पास एच-1बी वीज़ा है.
सीतारमण ने कहा कि सेवा व्यापार पर अंतरराष्ट्रीय समझौते में विवादों के समाधान में बहुत अधिक समय लगेगा.
उन्होंने कहा, '' यह समय देशों के एक साथ बैठने और समस्याओं पर नज़र डालने का है.''