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राहुल पर शीला की राय से पूरा देश सहमत है: अमित शाह
भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने उत्तर प्रदेश के आज़मगढ़ में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए कहा कि वह शीला दीक्षित की बात से सहमत हैं कि राहुल गांधी अपरिपक्व हैं. शाह ने कहा कि शीला जी की बात से पूरा देश सहमत है.
इससे पहले दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ने टाइम्स ऑफ इंडिया को दिए इंटरव्यू में कहा था कि कांग्रेस के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राहुल गांधी परिपक्व नहीं हैं और उन्हें वक़्त दिया जाना चाहिए. शीला दीक्षित से पूछा गया था कि राहुल गांधी इतना आक्रामक चुनाव प्रचार कर रहे हैं फिर भी कई राज्यों में हार का सामना क्यों करना पड़ा.
शीला दीक्षित ने इस इंटरव्यू में कहा है, ''हम परिवर्तन के दौर से गुजर रहे हैं. यह परिवर्तन पीढ़ी और राजनीतिक दोनों स्तर पर है. राजनीतिक भाषा तो पूरी तरह से बदल गई है. प्रधानमंत्री ने पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के लिए जो कहा उसे हम उदाहरण के तौर पर देख सकते हैं. यह बदलाव दृष्टिकोण, संबंध, भाषा और संपर्क हर स्तर पर देखा जा सकता है.''
शीला दीक्षित ने कहा, ''कांग्रेस इस बदले माहौल में ख़ुद को फिट करने की कोशिश कर रही है. और कृपया इस बात को आपको ध्यान में रखना चाहिए कि राहुल गांधी अभी पूरी तरह से परिवक्व नहीं हैं. उनकी उम्र भी इस लिहाज़ से कम है. वह 40 के पार हैं. उन्हें अभी वक़्त दिया जाना चाहिए. कांग्रेस कमजोर और हाशिये के लोगों का विकास करना चाहती है. राहुल जी इकलौते हैं जो किसानों की बात करते हैं.''
परिवर्तन के दौर से गुजर रही है कांग्रेस
शीला ने आगे राहुल का बचाव करते हुए कहा है, ''मेरा मानना है कि राहुल ने लंबा सफर तय किया है. वह अभी प्रधानमंत्री नहीं हैं क्योंकि अभी कोई मौका नहीं है. हालांकि वह काम कर रहे हैं. वह बैठकों में शामिल होते हैं. वह इकलौते हैं जो मन की बात बोलते हैं. यह अच्छा है कि वह बनावटी नहीं हैं.''
जब शीला दीक्षित के अपरिपक्व वाले बयान की चर्चा गर्म हुई तो उन्होंने ट्विटर पर इस मामले में सफाई दी है. शीला दीक्षित ने ट्वीट किया, ''राहुल के पास संवेदनशीलता है और यह एक परिपक्व नेता की ही पहचान है. उनकी भाषा में युवा जोश, साहस और बेताबी है. मेरे शब्दों को तोड़मरोड़कर पेश नहीं किया जाए.''
जब समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में गठबंधन नहीं हुआ था तब कांग्रेस ने शीला दीक्षित को मुख्यमंत्री उम्मीदवार घोषित किया था. कांग्रेस ने शीला के नेतृत्व में चुनाव प्रचार भी शुरू कर दिया था. कहा जा रहा था कि कांग्रेस ने यूपी में ब्राह्मण वोटों को आकर्षित करने के लिए शीला दीक्षित को आगे किया.
हालांकि पार्टी ने बाद में रणनीति बदलते हुए समाजवादी पार्टी से गठबंधन कर लिया और अखिलेश को गठबंधन का मुख्यमंत्री प्रत्याशी माना गया.