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ELECTION SPECIAL: क़िस्सा अखिलेश और मुलायम की रैलियों का
- Author, ज़ुबैर अहमद
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
कुछ दिन पहले रामपुर में समाजवादी पार्टी की एक चुनावी रैली में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव आए थे. वहां लोगों ने कहा कि 'नेता जी' अब पार्टी के लिए प्रचार करने को तैयार हो गए हैं.
नेता जी यानी मुलायम सिंह यादव तैयार ज़रूर हुए, लेकिन अपने भाई के लिए. उन्होंने कल जसवंतनगर चुनावी छेत्र में इस चुनाव में पहली बार एक सभा को संबोधित किया. यहाँ से उनके छोटे भाई शिवपाल सिंह समाजवादी पार्टी के टिकट पर मैदान में हैं.
जब से यादव परिवार में युद्ध छिड़ा है मुलायम सिंह ने अपने बेटे अखिलेश के लिए प्रचार नहीं किया है.
इस घरेलू लड़ाई में ऐसा लगा कि अखिलेश यादव ने अपने पिता मुलायम सिंह और चाचा शिवपाल सिंह से बग़ावत की है. लड़ाई के बाद पार्टी की बागडोर अखिलेश ने संभाली और चुनावी मैदान में अपने पसंद के लोगों को उतारा.
ऐसा लगा कि पार्टी दो हिस्सों में विभाजित हो जाएगी. लेकिन आख़िरी समय में अखिलेश यादव ने अपने चाचा का ख्याल रखते हुए उन्हें जसवंतनगर से टिकट दिया जहाँ शिवपाल यादव 1996 से चुनाव जीतते आ रहे हैं.
सभा एक खुले मैदान में आयोजित की गई थी. बड़े-बड़े पोस्टरों में मुलायम सिंह और शिवपाल सिंह के चेहरे मुस्कुराकर लोगों का स्वागत कर रहे थे.
जाड़े की धूप में लोग नेता जी का बेसब्री से इंतज़ार कर रहे थे. जब सभा को स्थानीय नेता संबोधित कर रहे थे तो लोगों में जोश नहीं नज़र आया.
लेकिन जैसे ही मुलायम सिंह का हेलीकॉप्टर ज़मीन पर उतरा एकदम से लोग उन्हें देखने उमड़ पड़े.
मुलायम सिंह को सुनने चाचा शिवपाल और भतीजे अखिलेश दोनों के समर्थक आए थे. लोगों का कहना था मुलायम सिंह का भाषण पार्टी के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण होगा.
नेता जी ने लोगों से शिवपाल सिंह को जिताने की अपील की. सीधे तौर पर अपने बेटे या पारिवारिक झगड़ों के बारे में कुछ नहीं कहा. उनका एक बयान लोगों को बहुत भाया.
उन्होंने जब कहा कि समाजवादी पार्टी बूढी नहीं हुई है. अब भी जवान है तो इसका स्वागत लोगों ने तालियों और नारों से किया.
मतभेद गहरा है
भाषण के बाद वहां मौजूद लोगों से बातें करके कुछ दिलचस्प बातें निकल कर सामने आईं:
- सभा शिवपाल की थी लेकिन अखिलेश के समर्थक काफी संख्या में मौजूद थे.
- पार्टी के समर्थक अखिलेश यादव को दोबारा मुख्यमंत्री के रूप में देखना चाहते हैं.
- वो पारिवारिक झगड़े से अधिक प्रभावित नज़र नहीं आ रहे थे.
- कुछ कार्यकर्ताओं के अनुसार अखिलेश यादव की बाप से बग़ावत के कारण ज़मीन पर कार्यकर्ताओं में जोश की काफी कमी है.
- कार्यकर्ताओं के अनुसार परिवार में पड़े दरार को ऊपर से पाट दिया गया है. मतभेद गहरा है.
- अखिलेश यादव ने जिन लोगों टिकट दिए हैं, उनमें 35-40 शिवपाल के गुप्त समर्थक हैं. चुनाव में जीत के बाद शिवपाल सिंह 'अपने' जीते हुए विधायकों के साथ अखिलेश यादव से सौदेबाज़ी करेंगे. यानी पारिवारिक उठापटक दोबारा शुरू हो सकती है.
दो रैलियों की कहानी
पिता-चाचा रैली में बुज़ुर्ग अधिक थे. तीन दिन पहले बेटे अखिलेश की रैली में युवा अधिक थे.
रामपुर की रैली जसवंतनगर की रैली से कहीं बड़ी थी. रामपुर की रैली में लोग आख़िर तक डटे रहे.
लेकिन जसवंतनगर की सभा में मुलायम सिंह के भाषण के दौरान सैकड़ों लोग मैदान छोड़ कर वापस जाने लगे. जो लोग मंच के सामने कुर्सियों पर बैठे थे वो भाषण ख़त्म होने तक वहीं जमे रहे.
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