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तमिलनाडु: शशिकला का खेल बिगाड़ सकते हैं पनीरसेल्वम?
- Author, इमरान क़ुरैशी
- पदनाम, बैंगलुरु से बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए
तमिलनाडु में मुख्यमंत्री पद के लिए चल रही रस्साकशी में ओ पनीरसेल्वम को एआईएडीएमके की महासचिव वीके शशिकला के लिए रास्ता छोड़ना पड़ सकता है.
लेकिन शशिकला के लिए एक बड़ा विरोध खड़ा करने में पनीरसेल्वम सफल हुए हैं और अब भी वो उनकी खुशियों में भी खलल डाल सकते हैं.
बीते कुछ दिनों में हुई उठापटक में यह बात साफ़ हो गई है कि पार्टी के अधिकतर सदस्य शशिकला के साथ हैं. पनीरसेल्वम को बीते चार दिनों में सिर्फ़ आधा दर्जन सदस्यों का समर्थन ही मिल सका है, हालांकि कई बार ये दावे किए गए हैं कि यह संख्या जल्द ही बढ़ जाएगी.
पनीरसेल्वम का समर्थन कर रहे नेताओं को उम्मीद थी कि वो और नेताओं को अपने खेमे में खींच सकेंगे. आख़िर सभी को अंदाज़ा था कि शशिकला के शपथग्रहण में राज्यपाल विद्यासागर राव देरी कर रहे हैं ताकि इस समय में पनीरसेल्वम अपने लिए ज़रूरी संख्या जुटा सकें और सदन में बहुमत साबित करने का दावा कर सकें.
हालांकि पनीरसेल्वम ने आरोप लगाया है कि उन्होंने दबाव में आकर इस्तीफ़ा दिया है और शशिकला का चुनाव ग़लत तरीके से हुआ है, राज्यपाल के सामने देश के क़ानून ओर संविधान का पालन करने के अलावा दूसरा रास्ता नहीं. पार्टी ने औपचारिक तौर पर शशिकला को अपना नेता चुना है.
राजनीतिक विश्लेषक जी सत्यमूर्ति कहते हैं, "शशिकला के शपथग्रहण में जो देरी की जा रही है वह साफ़ तौर पर केंद्र में बीजेपी के कारण ही है. तमिलनाडु में सिवाए एक ज़िले के बीजेपी के पास बड़ा आधार नहीं है. तो ऐसे में राज्य में अपने कदम जमाने की ये उनकी कोशिश थी."
उनका कहना है, "ज़रूरी संख्या ना जुटा पाने की सूरत में पनीरसेल्वम के लिए मुख्यमंत्री बनना बहुत मुश्किल है. उनके पास अभी छह मंत्री हैं. और अब उन्हें शशिकला की खुशी कम करने के लिए कम से कम एक दर्जन समर्थकों की ज़रूरत है."
234 सदस्यीय सदन में 50 फीसद समर्थन दिखाने के लिए एआईएडीएमके को 118 सदस्यों की ज़रूरत है. शशिकला के खेमे में फिलहाल 134 सदस्यों मे से 129 सदस्य हैं.
पार्टी को दो-फाड़ करने के लिए पनीरसेल्वम को 90 विधायकों का समर्थन चाहिए जो कि मौजूदा समय में लगभग असंभव लगता है. उनके खेमे ने कई बार 35 तक विधायकों का समर्थन होने का दावा किया है, हालांकि अभी इसके कोई सबूत पेश नहीं किए गए हैं.
सत्यमूर्ति करते हैं, "जब जयललिता थीं तब शशिकला ने कई विधायकों का अपमान किया था, हो सकता है इसका फ़ायदा पनीरसेल्वम को मिले और वो अपने समर्थन में कुछ और नेता ले आएं."
राजनीतिक विश्लेषक केएन अरुण पनीरसेल्वम खेमे के इस दावे को नहीं मानते कि संसद में बहुमत साबित करने का मौका आया तो कई विधायक उनके खेमे में चले जाएंगे. वो कहते हैं, "उन्हें 20-25 से अधिक सदस्यों का समर्थन नहीं मिलेगा. वो मुख्यमंत्री नहीं बन पाएंगे."
पार्टी कैडर की बात करें तो यह एक जगह है जहां पनीरसेल्वम के लिए भारी समर्थन है. अरुण कहते हैं, "पनीरसेल्वम को लोग पसंद कर रहे हैं और इस कारण विधायकों पर अपना पक्ष स्पष्ट करने के लिए दवाब पड़ रहा है कि वो शशिकला या पनीरसेल्वम में से किसी एक को चुन लें."
सत्यमूर्ति इस बात से सहमत हैं. वो कहते हैं, "लोग समझते हैं कि पार्टी कैडर शशिकला के साथ नहीं है और ये सही भी है. और कैडर की तरफ से आ रहे दवाब के कारण यह समझा जा रहा है कि नेता अपने विधानसभा क्षेत्रों में वापस नहीं जा पाएंगे. लेकिन हम यह कह सकते हैं कि जयललिता के पोज़ गार्डन वाले घर को मेमोरियल बनाने की उनकी बात गुगली ही थी."
24,000 वर्ग फीट का जयललिता का घर शहर के महंगी संपत्तियों में गिना जाता है और इसे उनकी पहचान के साथ जोड़ कर देखा जाता है. जयललिता की मौत के बाद भी शशिकला वहीं रहती हैं और इस कारण भी पनीरसेल्वम और पार्टी काडर समेत कई लोग उनसे नाराज़ हैं.
तमिलनाडु में जारी राजनीतिक संकट जल्द ख़त्म होता नहीं दिखता. ये बात भी ग़ौर करने वाली है कि सुप्रीम कोर्ट ऐसे मामलों में जल्दी फ़ैसला नहीं सुनाता जहां उनके फ़ैसले के गंभीर राजनीतिक मायने होते हैं.
सुप्रीम कोर्ट में वकील संजय हेगड़े के अनुसार, बीते महीने जल्लीकट्टू खेलों पर लगे बैन को हटाने के बारे में भी कोर्ट ने कोई फ़ैसला नहीं दिया था.
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