पश्चिम बंगाल: सरस्वती पूजा और मिलाद उन नबी को लेकर 'सांप्रदायिक तनाव'

- Author, अमिताभ भट्टासाली
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, कोलकाता
पश्चिम बंगाल के कई स्कूलों में सरस्वती पूजा और मिलाद-उन नबी को लेकर हिन्दू और मुस्लिम छात्रों के बीच तनाव का माहौल है. हावड़ा ज़िले के तेहट्टा हाई स्कूल को प्रशासन ने एक हफ़्ते के लिए बंद कर दिया है. यहां पर भारी संख्या में पुलिस बलों की तैनाती कर दी गई है.
24 परगना ज़िले में एक स्कूल के हेडमास्टर पर कुछ छात्रों ने हमला किया था. हावड़ा के स्कूल में तनाव का माहौल कई महीनों से था. यहां मुस्लिम छात्र मिलाद उन नबी मनाना चाहते थे. स्कूल प्रबंधन कमेटी के अध्यक्ष निहार रंजन भूइंया ने हिन्दू और मुस्लिम छात्रों के बीच तनाव को देखते हुए स्कूल बंद करने के फ़ैसला किया.
इलाके के रहने वाले एक व्यक्ति ने नाम ना बताने की शर्त पर कहा कि स्कूल में मिलाद उन नबी मनाने को लेकर कई बार बड़ी भीड़ इकट्ठी हुई और इस भीड़ को कई सीनियर मौलवियों ने संबोधित किया था.
हालांकि आख़िरी में प्रशासन ने मुस्लिमों को स्कूल में मिलाद उल नबी मनाने को मंज़ूरी नहीं दी. स्थानीय निवासियों ने बताया, ''इसके बाद मुस्लिम छात्रों के एक धड़े (जिसकी संख्या 25-30 से कम ही होगी) ने कहना शुरू कर दिया कि वह स्कूल में सरस्वती पूजा का भी आयोजन नहीं होने देगा.''
उन्होंने बताया, ''दशकों से स्कूल में सरस्वती पूजा मनाने की परंपरा रही है. ऐसे में हिन्दू छात्रों (अब इनकी संख्या काफी कम है) ने पूजा के एक दिन पहले सड़क को बंद कर दिया. इन्होंने सरस्वती की मूर्ति रखकर पूजा आयोजन करने का फ़ैसला किया. पुलिस ने इन्हें हटाया. आख़िरकार सरस्वती पूजा का आयोजन नहीं हो सका.
स्कूल में पुलिस अब भी तैनात है.
अब प्रबंधन समझ नहीं पा रहा है कि परीक्षा के लिए एडमिट कार्ड कैसे बांटा जाए. इस स्कूल से 250 से ज़्यादा छात्र को माध्यमिक और उच्चतर माध्यमिक बोर्ड की परीक्षा में हिस्सा लेना हैं.
अभी तक इस शैक्षणिक वर्ष का नया सत्र भी शुरू नहीं हो पाया है. हेडमास्टर उत्पल मलिक ने स्कूल बंद होने के दौरान इस्तीफ़ा दे दिया था.
उत्तरी 24 परगना का स्कूल बंद नहीं हुआ है लेकिन हेडमास्टर पर्थ प्रतिम बिस्वास ने कहा कि वो हमले के बाद से वह काफी दबाव में थे. उन्होंने कहा कि अपने ही कुछ छात्रों से प्रताड़ना सहनी पड़ी.

बिस्वास ने कहा, ''कुछ महीने पहले एक लड़की की आत्महत्या के बाद सब कुछ शुरू हुआ. मेरे पास 20 मौलवी पहुंचे. उन्होंने कहा कि उस लड़की की बरसी पर नबी दिवस का आयोजन किया जाए. मैंने उनसे साफ़ कहा कि इस पर मैं अपनी तरफ से कोई फ़ैसला नहीं ले सकता. इसके बाद प्रबंधन कमेटियों की कई बैठकें बुलाई गईं लेकिन कोई फ़ैसला नहीं लिया जा सका.''
छात्रों का एक धड़ा और मौलवी इस मांग के साथ हेडमास्टर के पास आते रहे. अंततः एक बैठक में बिस्वास ने सरस्वती पूजा और मिलाद उन नबी के लिए 20-20 रुपये का चंदा इक्ट्ठा करने की बात कही. इसमें दोनों समुदाय के छात्र शामिल हुए थे.
बिस्वास ने कहा, ''उन्होंने मिलाद उन नबी स्कूल के बगल के एक मैदान में मनाया. इसमें कई बाहरी लोग शामिल हुए. इसे लेकर हिन्दू छात्र बहुत डरे हुए थे लेकिन सरस्वती पूजा के पहले मुझसे अनुमति के लिए मेरे पास आए. मैं यहां बुरी तरह से पशोपेश में पड़ गया. मैंने कहा कि दोनों समारोह में शामिल होऊंगा अगर छात्र सौहार्दपूर्ण तरीके से इसे मनाएंगे, नहीं तो मैं किसी भी समारोह में नहीं जाऊंगा.'' सरस्वती पूजा के बाद बिस्वास पर उनके ही छात्रों के एक धड़े ने हमला बोल दिया.
मुस्लिम नेताओं के बीच इन विवादों को लेकर काफी गहमाहमी रही.
पश्चिम बंगाल अल्पसंख्यक युवा फेडरेशन ने बीबीसी से कहा, ''कई स्कूलों ने सरस्वती पूजा और मिलाद उन नबी दोनों मनाया. हालांकि कुछ स्कूलों में जहां मुस्लिम स्टूडेंट की आबादी ज़्यादा थी वहां प्रशासन ने मिलाद उन नबी मनाने की इज़ाजत नहीं दी. यह नाइंसाफी है.''
इसका नतीजा यह हुआ कि छात्रों और अभिभावकों के बीच काफी तनाव है.
प्रदेश के कई स्कूलों में भी इसका असर साफ़ दिख रहा है. इसे सड़कों पर भी महसूस किया जा सकता है.
तृणमूल कांग्रेस का कहना है कि दोनों समुदायों को बाहरी लोग भड़का रहे हैं.
जहां तेहट्टा हाई स्कूल है, उस इलाके के टीएमसी विधायक निर्मल माझी ने कहा, ''दोनों समुदायों को बाहरी लोग भड़का रहे हैं. इसमें कुछ राजनीतिक दल भी शामिल हैं, लेकिन हम उनकी मंशा कामयाब नहीं होने देंगे. प्रशासन और पुलिस मौके पर पहुंच चुकी है. हमलोग किसी भी तरह से कोई हस्तक्षेप नहीं कर रहे हैं. हमारा लक्ष्य सद्भावना कायम रखना है.''
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