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जब मां से मिले तेंदुए के बिछड़े बच्चे
- Author, अश्विन अघोर
- पदनाम, मुंबई से बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए
पुणे जिले के जुन्नर तहसील में गन्ने के खेतों में तेंदुओं का आना अब कोई नई बात नहीं है. ठंड से बचने और लोगों की नज़र से छुपने की पर्याप्त जगह होने के कारण तेंदुए अक्सर खेतों में घुस आते हैं, और किसानों की परेशानी का सबब बन जाते हैं.
लेकिन मंगलवार को जब जुन्नर के नज़दीक सोमाटवाडी गाँव के पास गन्ने के खेत में तेंदुए के दो बच्चे मिले, तो लोगों ने उन्हें बचाकर माँ से मिलाने की कोशिश करना उचित समझा.
बच्चे मिलने की खबर तुरंत इलाके में स्थित मानिकडोह लेपर्ड रेस्क्यू सेंटर को दी गयी. वन विभाग के अधिकारी वाइल्डलाइफ एसओएस संस्था के पशु चिकित्सक डॉ अजय देशमुख के साथ मौके पर पहुंचे.
जांच के बाद पता चला के एक बच्चा नर था और दूसरी मादा. डॉ अजय देशमुख ने बताया, "दोनों की उम्र करीब तीन हफ्ते होगी. उनकी अभी आँखे भी नहीं खुली थीं."
ऐसे में उन बच्चों को उस जगह बिना संरक्षण के छोड़ देना ख़तरे से खाली नही था.
कई गाँववालों ने बताया कि उन्होंने एक तेंदुए को खेत के आस-पास के इलाके में चक्कर लगाते देखा है और वो मानते हैं कि यह माँ तेंदुआ होगी जो बच्चों को ढूंढ रही होगी.
डॉ देशमुख ने बताया, "बच्चों को हम साथ ले आए. फिर गुरूवार शाम 7 बजे हमने पूरे एहतियात के साथ दोनों बच्चों को प्लास्टिक के बक्सों में रख कर उन्हें वहीं रख दिया जहां वो हमें मिले थे. वहां पर रिमोट कंट्रोल से चलने वाले दो कैमरे भी लगा दिए ताकि हम बच्चों और उनकी माँ के पुनर्मिलन का वीडियो बना सकें."
क़रीब दो घंटे के इंतज़ार के बाद बच्चों की माँ वहां आयी. उसने बड़े ही सफाई से दोनों बच्चों को बक्सों से निकाला और उन्हें साथ ले कर जंगल में ग़ायब हो गई.
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