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कई महिलाओं को ही नहीं पता फीमेल कंडोम के बारे में
- Author, रूना आशीष
- पदनाम, मुंबई से बीबीसी हिंदी डॉटकॉम के लिए
'चूंकि इसे योनि में इंसर्ट करना होता है इसलिए फ़ीमेल कंडोम का इस्तेमाल शुरु-शुरु में तकलीफ़देह हो सकता है, लेकिन ये बहुत मस्त है और इसकी दो कोटिंग वीर्य को आसानी से सोख लेती है.'
मंजरी का परिचय फ़ीमेल कंडोम से चंद सालों पहले हुआ और ये 'आरामदायक और सुरक्षित साथी' तबसे उनके सहवास का तीसरा भागीदार है.
लेकिन 35-साल की मंजरी शायद उन इक्का-दुक्का औरतों में हैं जो फ़ीमेल कंडोम का इस्तेमाल करती हों.
फ़ीमेल कंडोम बनाने वाली कंपनी क्यूपिड के एक शोध के मुताबिक़ मुंबई में 60 फ़ीसद से ज़्यादा औरतों ने इसके बारे में सुना भी नहीं है.
मुंबई में एक पॉश इलाके में रहने वाली 32 साल की मेनका का छह साल का बेटा है, लेकिन वो कहती हैं, "सच मानिये. मैं इस विषय में कुछ भी नहीं जानती."
फ़ीमेल कंडोम बनानेवाली कंपनी क्यूपिड के मुताबिक़ भारत में इसकी सालाना खपत मात्र 40 से 50 हज़ार है. कंपनी के मुंबई में किए गए सर्वे में सिर्फ़ 36 प्रतिशत महिलाएं इन कंडोम्स के बारे में जानती थीं.
इस्तेमाल करनेवालों में से 32 फ़ीसद परिणाम से संतुष्ट लगीं. नौ प्रतिशत ऐसी भी थीं जो इसकी ज़रूरत नहीं महसूस करतीं. 19 फ़ीसद ने कहा वो आनंद की अनुभूति के लिए इसका इस्तेमाल करती हैं.
क्यूपिड दुनिया भर में उन तीन-चार कंपनियों में से एक है जो फ़ीमेल कंडोम बनाती हैं. यह कंपनी भारत में स्थित है लेकिन इसके कुल दो करोड़ पीसेज़ का अधिक हिस्सा विदेशों में बिकता है.
लेकिन कंपनी के चेयरपर्सन ओमप्रकाश गर्ग कहते हैं कि देश में महिलाओं को अभी भी नहीं मालूम कि ये उनके स्वास्थ्य का मामला है और उनके सेक्शुअल और रिप्रोडक्टिव अधिकारों का हिस्सा है.
कंपनी इसे अब मुल्क के अलग-अलग हिस्सों में पहुंचाना चाहती है जिसके लिए वो अब चंडीगढ़, अहमदाबाद और हैदराबाद जैसी जगहों पर सर्वे करवा रही है.
क्या केमिस्ट शॉप्स में फ़ीमेल कंडोम की मांग है?
बेंगलुरु के श्री तिरुपति मेडिकल्स के मालिक अमित शर्मा पिछले छह साल से शॉप चला रहे हैं लेकिन 'किसी ने भी फ़ीमेल कॉंडोम्स के लिए नहीं पूछा' है.
लेकिन पुणे के श्री साई मेडिको के शिवाजी कुमार भार का कहना है कि उनके स्टोर में हर महीने 30 से 50 फ़ीमेल कंडोम की मांग आती है.
कुमार का कहना है कि कुछ तो रेगुलर ग्राहक हैं और कुछ डिस्पले में देखकर ख़रीदने को उत्साहित होते हैं.
फ़ातिमा कहती हैं, "दो-दो बच्चे पैदा करने का दर्द और माहवारी क्या कम है जो अपनी योनि में एक और हलचल को बुलावा दूं. मैं तो शौहर को ही प्रोटेक्शन लेने के लिए कहती हूं."
स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉक्टर हेतल जोशी कहती हैं, 'फ़ीमेल कॉंडोम्स को संभोग से पहले ही लगाना पड़ता है. योनि में इनको इंसर्ट करना और इसका वहां टिके रहना एक परेशानी है जिसकी वजह से हम डॉक्टर्स इन्हें सुझाव को तौर पर भी बताने से बचने लगे हैं.'
डॉक्टर हेतल कहती है कि फ़ीमेल कंडोम का इस्तेमाल करनेवाली 20 फ़ीसद महिलाएं इसकी विफलता की बात करती हैं.
दिल्ली में रहनेवाली मीडिया स्टूडेंट नंदिनी रॉय को लगता है कि 'जिस तरीक़े से मेल कॉंडोम्स को प्रमोट किया जाता है, उसकी मार्केटिंग होती है, मैंने तो कभी फ़ीमेल कॉंडोम्स के पोस्टर या होर्डिंग नहीं देखे हैं.'
(पहचान बचाए रखने के लिए कुछ लोगों के नाम बदल दिए गए हैं.)
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