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बसपा में मिला मुख़्तार अंसारी को आसरा
- Author, समीरात्मज मिश्र
- पदनाम, लखनऊ से बीबीसी हिंदी डॉटकॉम के लिए
पूर्वी उत्तर प्रदेश के चर्चित विधायक मुख़्तार अंसारी और उनका परिवार बहुजन समाज पार्टी में शामिल हो गया.
उन्हें शामिल करने की घोषणा ख़ुद पार्टी अध्यक्ष मायावती ने लखनऊ में की.
यही नहीं, अंसारी बंधुओं के परिवार वालों में से तीन लोगों को विधान सभा का टिकट देने की घोषणा भी कर दी गई.
समाजवादी पार्टी में अंसारी भाइयों की परिवार और पार्टी सहित वापसी पिछले कुछ महीनों से चर्चा में थी. उनकी पार्टी क़ौमी एकता दल के विलय की समाजवादी पार्टी में घोषणा भी हो गई थी लेकिन उस घोषणा को मंज़ूरी नहीं मिल पाई.
आख़िरकार जब समाजवादी पार्टी ही पूरी तरह से अंसारी बंधुओं का विरोध करने वाले अखिलेश यादव के अधीन आ गई तो इन लोगों ने बहुजन समाज पार्टी में ही घर वापसी का फ़ैसला किया.
पार्टी में शामिल करने की घोषणा के साथ ही मुख़्तार अंसारी को मऊ से, उनके बेटे अब्बास अंसारी को घोसी से और मुख़्तार अंसारी के बड़े भाई सिबगतुल्ला अंसारी को मोहम्मदाबाद सीट से टिकट देने का भी ऐलान कर दिया गया.
मुख़्तार और सिबगतुल्ला फ़िलहाल इन्हीं सीटों से मौजूदा विधायक भी हैं.
मायावती ने कहा कि इसके पहले भी मुख़्तार के परिवार को बसपा में शामिल किया गया था और उनके पूरे परिवार ने बसपा के झंडे और बैनर तले विधानसभा व लोकसभा का चुनाव लड़ा था लेकिन बाद में सपा के दबाव के कारण उन्हें बसपा से अलग किया गया, जिसका उन्हें पश्चाताप भी है.
बीएसपी नेता मायावती ने ये भी कहा कि मुख़्तार अंसारी का नाम जिस कृष्णानंद राय की हत्या से जोड़कर देखा जाता है, वो सपा सरकार के कार्यकाल में हुई और उसकी सीबीआई जांच भी हुई है. इसमें इनके ख़िलाफ़ पुख्ता सबूत नहीं जुटाए जा सके हैं.
मुख़्तार अंसारी फ़िलहाल जेल में बंद हैं. उनकी गिनती पूर्वांचल के दबंग नेताओं में की जाती है.
ख़ुद मायावती इनका नाम लेकर समाजवादी पार्टी को अभी तक कोसती रही हैं. लेकिन सवाल उठता है कि अब उनके सामने ऐसी क्या मजबूरी आ पड़ी जो उन्होंने मुख़्तार अंसारी को परिवार सहित पार्टी में शामिल किया.
लखनऊ में वरिष्ठ पत्रकार सुनीता ऐरन कहती हैं, "दरअसल, इस समय सपा और बसपा का पूरा ध्यान मुस्लिम वोटों को अपनी तरफ़ करने पर है. अंसारी बंधुओं का पूरे प्रदेश में तो नहीं लेकिन पूर्वांचल के कुछ ज़िलों में प्रभाव है. ज़ाहिर तौर पर मायावती ने इसी को ध्यान में रखकर ये फ़ैसला किया है."
अंसारी बंधुओं को पार्टी में शामिल करते हुए मायावती ने ये भी सफ़ाई दी कि इससे उनकी सरकार बनने के बाद कानून व्यवस्था पर कोई आंच नहीं आएगी. ख़ासकर मुख़्तार अंसारी के प्रति हमदर्दी जताते हुए मायावती ने कहा कि अगर उन्हें षडयंत्र के तहत फँसाया गया है तो उन्हें न्याय भी दिलाया जाएगा.
लेकिन जानकारों का कहना है कि इस फ़ैसले के बाद मायावती को राजनीतिक लाभ कितना होगा ये तो चुनाव के बाद ही पता चलेगा लेकिन जिस आक्रामकता के साथ वो क़ानून व्यवस्था के मामले में समाजवादी पार्टी सरकार को घेरती थीं, उसमें वो धार नहीं रह जाएगी.
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