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वो दीवाना कातिल और ऑक्सफ़ोर्ड डिक्शनरी
- Author, आभा शर्मा
- पदनाम, बीबीसी हिंदी डॉटकॉम के लिए
ऑक्सफ़ोर्ड डिक्शनरी को तैयार करने में कोई 50 बरस लगे. इसमें हज़ारों लोगों का योगदान रहा पर जिस शख़्स ने इस काम में बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया वो था एक दीवाना और कातिल.
अमरीकन सिविल वार में सर्जन रहे अमीर शख़्स विलियम चेस्टर मायनर ने अपनी कैद के हर लम्हे का इस्तेमाल इसे तैयार करने में किया.
जयपुर साहित्य उत्सव में "मर्डर, मैडनेस एंड द ऑक्सफ़ोर्ड डिक्शनरी" सत्र में सर्जन ऑफ़ क्रोथोर्न किताब के लेखक साइमन विंचेस्टर ने बताया कि मायनर की कहानी अनजानी ही रह जाती यदि ऑक्सफ़ोर्ड डिक्शनरी के संपादक जेम्स मरे ख़ुद उनसे मिलने बर्कशायर नहीं जाते.
डिक्शनरी की तैयारी के वक्त जब एक अक्षर का काम पूरा हो जाता था तो इस काम में मदद करने वालों को बधाई देने के लिए ऑक्सफ़ोर्ड में एक जश्न होता था.
मायनर इसमें कभी शामिल नहीं हो पाए क्योंकि वे तो मनोरोगी अस्पताल में थे. आख़िर में जेम्स मरे ने ख़ुद जाकर उनसे मिलने का निश्चय किया.
वे अभी तक मायनर को इस मनोरोग केंद्र में कार्यरत डॉक्टर समझते आ रहे थे. वहां पहुँचने पर मालूम हुआ कि अस्थिर मानसिक हालत में उनसे एक आयरिश नागरिक का क़त्ल हुआ था.
सिविल वार में सर्जन के नाते उन्हें एक आयरिश के गाल पर अंग्रेजी अक्षर "डी" बनाने को कहा गया था जिसका मतलब था "डेजर्टर" यानि भगोड़ा.
तब से ही उनकी मानसिक स्थिति बिगड़ गई. उन्हें यह लगता था कि ये व्यक्ति उनसे बदला लेगा और इसी डर के कारण उनसे एक व्यक्ति का क़त्ल हो गया.
उन्हें इस जुर्म के लिए कोई सज़ा नहीं हुई क्योंकि अपराध ख़राब मानसिक हालत के कारण हुआ था.
जोनाथन शैनिन के साथ बेहद रोचक सत्र में साइमन विंचेस्टर ने बताया कि मायनर ने अपना जुर्म कबूला था और उस विधवा की आर्थिक मदद भी की थी. इससे प्रभावित होकर ये महिला उनके लिए बहुत सी किताबें पढ़ने को लाकर देती थीं.
उन्हीं किताबों के बीच मायनर को वो चार पन्ने का ब्रोशर मिला था जिसमें जेम्स मरे ने ऑक्सफ़ोर्ड डिक्शनरी बनाने में मदद की अपील की थी.
जब भी डिक्शनरी की ओर से उन नए शब्दों की सूची जारी होती जिसमें उनके प्रयोग के उदहारण चाहिए होते, मायनर फ़ौरन सम्बंधित जानकारी भेजते.
करीब चार दशक तक सबसे ज्यादा योगदान किसी ने दिया तो वे मायनर ही थे.
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