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'नया साल शुरू लेकिन काला धन कहां है मोदीजी'
- Author, विनीत खरे
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, दिल्ली
नोटबंदी की घोषणा हुई. प्रधानमंत्री ने 50 दिनों की मोहलत मांगी. पचास दिन खत्म हो गए हैं लेकिन क्या देश का काला धन खत्म हो पाया?
सोशल मीडिया पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं के अलावा कई लोग प्रधानमंत्री से भी यही सवाल पूछ रहे हैं और चुटकी ले रहे हैं.
साल खत्म होने के पहले प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्र को संबोधित किया लेकिन नोटबंदी का असर कब तक रहेगा, एटीएम में हालात कब तक सामान्य हो पाएंगे, इस पर वह कुछ नहीं बोले.
काला धन नकद, संपत्ति, विदेश में जमा धन आदि के रूप में बंद है. नोटबंदी की घोषणा करते वक्त मोदी ने कहा था कि इससे काला धन समाप्त होगा. क्या ऐसा हो पाया है?
वैदेही सचिन ने ट्विटर पर कहा, "ऐसे सवाल मत पूछिए नहीं तो सरकार 2000 रुपए के नोट बंद करके 5000 रुपए के नोट ले आएगी."
सिलचर, असम, से स्वपन रॉय ने ट्विटर पर लिखा, "काला धन रखने वाले जहां थे वहीं हैं".
गयास अहमद लिखते हैं, "50 दिनों का कष्ट भी देश ने झेल लिया, 150 से ज़्यादा लोगों ने बैंक के कतारों में जान दे दी, अब तो बता तो, काला धन कहां है".
बंद किए गए 500 और 1000 रुपए के नोट देश की अर्थव्यवस्था की कुल नकदी का 86 प्रतिशत थे.
काले धन पर काम कर चुके प्रोफ़ेसर अरुण कुमार प्रधानमंत्री मोदी की घोषणा की तुलना व्यक्ति के शरीर से 85 प्रतिशत खून निकाल लेने से की.
वह कहते हैं, "अगर आप किसी के शरीर से 85 प्रतिशत खून निकाल लें और फिर हर हफ़्ते पांच-पांच प्रतिशत डालते रहें तो शरीर खत्म हो जाएगा. नकद से हम लोगों की आमदनी बांटते हैं. नोटबंदी से विदेश में रखे काले धन से कोई असर नहीं पड़ेगा."
नोटबंदी पर रिज़र्व बैंक ने अभी तक ताज़ा आंकड़े जारी नहीं किए हैं.
कई जानकार लगातार कह रहे हैं कि नकद भारत में काले धन की अर्थव्यवस्था का एक छोटा हिस्सा होता है और काले धन से निपटने के लिए नोटबंदी कारगर तरीका नहीं है.
प्रोफ़ेसर अरुण कुमार कहते हैं, "काले धन की कुल मात्रा करीब 300 लाख करोड़ से ज़्यादा होगी. इसमें से तीन लाख करोड़ रुपए नकद होगा. अगर आपने तीन लाख करोड़ नकदी को खत्म भी कर दिया तो वो कुल काला धन का मात्र एक प्रतिशत होगा. इससे काली अर्थव्यवस्था पर कोई असर नहीं पड़ेगा. फिर ऐसे भी लोग होंगे जिन्होंने अपना काला धन ठिकाने लगा लिया होगा. यानि नोटबंदी का कुल असर काले धन के 0.1 प्रतिशत पर ही पड़ेगा."
प्रोफ़सर कुमार के अनुसार सरकार का ध्यान काला धन पैदा करने को रोकने पर होना चाहिए.
वो कहते हैं, "भारत में जो काला धन पैदा होता है उसका मात्र 10 प्रतिशत देश से बाहर जाता है. बाकी 90 प्रतिशत तो यहीं रहता है. तो ऐसा नहीं कि काला धन जो बाहर है वो बहुत बड़ा है."
नोटबंदी से अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचा है. सरकार का कहना है कि ये असर कुछ वक्त के लिए है लेकिन प्रोफ़ेसर कुमार इससे सहमत नहीं.
हालांकि नोटबंदी पर आस्ट्रेलिया की उच्चायुक्त हरिंदर सिंधु ने कहा है कि ऑस्ट्रेलिया में भी नोटबंदी की बात उठ रही है. पाकिस्तान में सेनेट में 5,000 रुपए को बंद करने के लिए प्रस्ताव पारित किया गया लेकिन सरकार ने ऐसा करने से मना कर दिया. वेनेजुएला में सरकार ने नोटबंदी की लेकिन फ़ैसले को वापस ले लिया गया. क्या दूसरी सरकारों ने भारत से सीख ली है?
प्रोफ़ेसर कुमार के अनुसार दूसरे देशों में जहां नोटबंदी की बात हुई या हो रही है वहां ऊंचे मूल्य के नोट अर्थव्यवस्था का बहुत छोटा हिस्सा है लेकिन भारत में स्थिति अलग थी.
वो कहते हैं, "आस्ट्रेलिया जैसे देश में ऊंचे मूल्य के नोट बेहद छोटी मात्रा में हैं. भारत में 1978 में जब नोटबंदी हुई थी तब मैंने 1,000, 5,000 और 10,000 के नोट देखे ही नहीं थे. वो कुल नकदी का 0.6 प्रतिशत थे. ऑस्ट्रेलिया में अगर बड़ी नकदी बंद होती है तो उसकी अर्थव्यवस्था पर कोई असर नहीं पड़ेगा."