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बेनामी संपत्ति के बारे में जानें 7 बातें
रविवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 'मन की बात' कार्यक्रम में बेनामी प्रॉपर्टी पर रोकथाम लगाने के मुद्दे पर ज्यादा सख़्त कानून लाने की बात की.
इस सिलसिले में बेनामी संपत्ति निरोधक कानून, 1988 में इस साल बदलाव में भी किया गया है.
लेकिन सवाल उठता है कि दरअसल ये बेनामी संपत्ति क्या होती है और आम लोग इसे कैसे समझें.
सात खास बातें
- जब संपत्ति खरीदने वाला अपने पैसे से किसी और के नाम पर प्रॉपर्टी खरीदता है तो यह बेनामी प्रॉपर्टी कहलाती है.
- लेकिन शर्त ये है कि खरीद में लगा पैसे आमदनी के ज्ञात स्रोतों से बाहर का होना चाहिए. भुगतान चाहे सीधे तौर पर भी किया जाए या फिर घुमा फिराकर.
- अगर खरीदार ने इसे परिवार के किसी व्यक्ति या किसी करीबी के नाम पर भी खरीदा हो तब भी ये बेनामी प्रॉपर्टी ही कही जाएगी.
- सीधे शब्दों में कहें तो बेनामी संपत्ति खरीदने वाला व्यक्ति कानून मिलकियत अपने नाम नहीं रखता लेकिन प्रॉपर्टी पर कब्ज़ा रखता है.
- 1988 के काननू में किया गया संशोधन इस साल 1 नवंबर से लागू हो गया है. इसके तहत केंद्र सरकार के पास ऐसी प्रॉपर्टी को जब्त करने का अधिकार है.
- बेनामी संपत्ति की लेनदेन के लिए दोषी पाए गए व्यक्ति को सात साल तक के कैद की सजा हो सकती है और प्रॉपर्टी की बाजार कीमत के एक चौथाई के बराबर जुर्माना लगाया सकता है.
- काले धन पर जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट की तरफ से गठित की गई कमिटी ने 3 लाख से ज्यादा के नकद लेनदेन पर रोक लगाए जाने की सिफारिश की थी.
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