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निर्भया कांड के चार साल बाद कहाँ है पूरा मामला
बलात्कार का वो मामला, जिसने सड़क से संसद तक और देश से दुनिया तक, हर जगह तहलका मचा दिया. निर्भया गैंगरेप केस 2012 से 2016 तक आ पहुंचा है और दोषियों की सज़ा पर सुनवाई जारी है. ग़ौर कीजिए, ये पूरा मामला क्या रहा
16 दिसंबर, 2012: दिल्ली के मुनीरका में छह लोगों ने एक बस में पैरामेडिक छात्रा से सामूहिक बलात्कार और वहशीपन किया. घटना के बाद युवती और उसके दोस्त को चलती बस से बाहर फेंक दिया गया.
18 दिसंबर, 2012: राम सिंह, मुकेश, विनय शर्मा और पवन गुप्ता गिरफ़्तार. 21 दिसंबर को मामले में नाबालिग दिल्ली से और छठा अभियुक्त अक्षय ठाकुर बिहार से गिरफ़्तार.
29 दिसंबर, 2012: पीड़िता ने अस्पताल में दम तोड़ा.
3 जनवरी, 2013: पुलिस ने पांच बालिग अभियुक्तों के ख़िलाफ़ हत्या, गैंगरेप, हत्या की कोशिश, अपहरण, डकैती आदि आरोपों के तहत चार्जशीट दाख़िल की.
17 जनवरी, 2013: फ़ास्ट ट्रैक अदालत ने पांचों अभियुक्तों पर आरोप तय किए.
11 मार्च 2013: राम सिंह ने तिहाड़ जेल में आत्महत्या की.
31 अक्टूबर, 2013: जुवेनाइल बोर्ड ने नाबालिग को गैंगरेप और हत्या का दोषी माना और उसे प्रोबेशन होम में तीन साल गुज़ारने का फ़ैसला सुनाया.
10 सितंबर, 2013: फ़ास्ट ट्रैक अदालत ने चार अन्यों को 13 अपराधों के लिए दोषी ठहराया और 13 सितंबर को मुकेश, विनय, पवन और अक्षय को सज़ा-ए-मौत सुनाई गई.
13 मार्च, 2014: दिल्ली हाई कोर्ट ने चारों दोषियों की मौत की सज़ा को बरक़रार रखा.
2014-2016: दोषियों ने फ़ांसी की सज़ा को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है और शीर्ष अदालत फिलहाल इस पर सुनवाई कर रही है.