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'अम्मा' का दोबारा हुआ अंतिम संस्कार
- Author, इमरान कुरैशी
- पदनाम, बीबीसी हिंदी के लिए
तमिलनाडु की पूर्व मुख्यमंत्री जयललिता को दफ़नाए जाने से नाराज़ उनके परिवार के कुछ सदस्यों ने इसे प्रतिष्ठा का मुद्दा बना दिया है.
जयललिता के मैसूर में रहने वाले रिश्तेदारों ने उनका हिंदू रस्म के अनुसार दाह संस्कार किया. वे मैसूर के उच्च ब्राह्मण परिवार से आती थीं.
उनका लंबी बीमारी के बाद पांच दिसंबर को निधन हो गया था. उन्हें द्रविड़ पार्टी की परंपरा के अनुसार उनके मेंटॉर एमजीआर के नज़दीक मरीना बीच पर दफ़नाया गया था.
जयललिता को जिस तरह से दफ़नाया गया था, उसे लेकर उनके परिवार ने एतराज़ जताया था.
जयललिता के रिश्तेदार होने का दावा करने वाले वरदराजन कहते हैं, ''उन्होंने श्री वैष्णव परंपरा के अनुसार उनका अंतिम संस्कार नहीं किया. हमारी परंपरा में दाह संस्कार अनिवार्य है. उन्हें हिंदू धर्म के अनुसार भी नहीं दफ़नाया गया. उन्हें एक डब्बे में डाल दिया गया.''
वरदराजन का कहना था, ''उन्हें मोक्ष नहीं मिलेगा.''
वरदराजन एन जयराम की पहली पत्नी के भतीजे हैं और जयललिता जयराम की दूसरी पत्नी संध्या की बेटी थीं.
उन्होंने ही जयललिता का अंतिम संस्कार किया क्योंकि उनके सौतेले भाई एनजे वासुदेवन बहुत बुजुर्ग हैं.
वरदराजन का कहना था, ''उन्होंने मुझे जयललिता का अंतिम संस्कार करने के लिए पत्र दिया था. हमने मैसूर में अंतिम संस्कार करने से पहले कई पंडितों से बात की.''
जयललिता का अंतिम संस्कार मैसूर से 25 किलोमीटर दूर श्रीरंगपट्टनम में कावेरी नदी के तट पर हुआ.
पंडित रंगनाथ आयंगार का कहना था, ''श्री वैष्णव परंपरा के मुताबिक वैसे तो वासुदेवन को अंतिम संस्कार करना चाहिए था. हमने सूखी घास से बने ''दरबा'' को मृत शरीर मानते हुए अंतिम संस्कार किया है. हम नौंवी और दसवीं भी कर रहे हैं.''
लेकिन जयललिता की भतीजी दीपा जयराम का मानना है कि जिन्होंने जयललिता का ''औपचारिक देह'' संस्कार किया वो उनके रिश्तेदार नहीं हैं.
दीपा का कहना था, "जिन्होंने अंतिम संस्कार किया है, मुझे नहीं लगता वो असली रिश्तेदार हैं. हमारे ज्यादातर रिश्तेदार विदेशों में रहते हैं. "
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