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जानिए चक्रवात के नाम रखे कैसे जाते हैं
चक्रवाती तूफ़ान वरदा तमिलनाडु के तट से टकरा चुका है.
चेन्नई से नेल्लोर तक लगभग 90 किलोमीटर तक फ़ैले वरदा के कारण तटवर्ती इलाक़े में तेज़ हवाएँ चल रही हैं.
चेन्नई के कई इलाक़ों में बीजली गुल है और जन-जीवन ठप हो गया है. तमिलनाडु में दो लोगों के मारे जाने की ख़बर मिली है.
वितार से पढ़ें: आंध्र की तरफ बढ़ा वरदा, तमिलनाडु में दो की मौत
वरदा अरबी भाषा का शब्द है, जिसका मतलब होता है गुलाब. लेकिन चक्रवात के नाम रखे कैसे जाते हैं?
पढ़िए बीबीसी संवाददाता सौतिक बिस्वास का ये 2014 का लेख जिसमें उन्होंने बताया है चक्रवात के नाम रखे कैसे जाते हैं-
1953 से मायामी नेशनल हरीकेन सेंटर और वर्ल्ड मेटीरियोलॉजिकल ऑर्गनाइज़ेशन (डब्लूएमओ) तूफ़ानों और उष्णकटिबंधीय चक्रवातों के नाम रखता रहा है.
डब्लूएमओ जेनेवा स्थित संयुक्त राष्ट्र संघ की एजेंसी है.
लेकिन उत्तरी हिंद महासागर में उठने वाले चक्रवातों का कोई नाम नहीं रखा गया था. वजह ये थी कि ऐसा करना काफ़ी विवादास्पद काम था.
भारत के चक्रवात चेतावनी केंद्र के अधिकारी डॉक्टर एम माहापात्रा के मुताबिक़ इसके पीछे कारण यह था कि जातीय विविधता वाले इस क्षेत्र में काफ़ी सावधान और निष्पक्ष रहने की ज़रूरत थी ताकि यह लोगों की भावनाओं को ठेस न पहुंचाए.
साल 2004 में ये स्थिति तब बदल गई, जब डब्लूएमओ की अगुवाई वाला अंतरराष्ट्रीय पैनल भंग कर दिया गया और संबंधित देशों से अपने-अपने क्षेत्र में आने वाले चक्रवात का नाम ख़ुद रखने को कहा गया.
इसके बाद भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश, मालदीव, म्यांमार, ओमान, श्रीलंका और थाईलैंड को मिलाकर कुल आठ देशों ने एक बैठक में हिस्सा लिया.
इन देशों ने 64 नामों की एक सूची सौंपी. हर देश ने आने वाले चक्रवात के लिए आठ नाम सुझाए.
यह सूची हर देश के वर्ण क्रम के अनुसार है. इस क्षेत्र में जून 2014 में आए चक्रवात 'नानुक' का नाम म्यांमार ने रखा था.
सदस्य देशों के लोग भी नाम सुझा सकते हैं. मसलन भारत सरकार इस शर्त पर लोगों की सलाह मांगती है कि नाम छोटे, समझ आने लायक, सांस्कृतिक रूप से संवेदनशील और भड़काऊ न हों.
साल 2013 में भारत के दक्षिण-पूर्वी तट पर आए पायलिन चक्रवात का नाम थाईलैंड ने रखा था.
इस इलाक़े में आए एक अन्य चक्रवात 'नीलोफ़र' का नाम पाकिस्तान ने रखा था.
पाकिस्तान ने नवंबर 2012 में जिस चक्रवात का नाम रखा था उसे 'नीलम' कहते हैं.
डॉक्टर महापात्रा के मुताबिक साल 2014 में आया चक्रवात हुदहुद इस सूची का 34वां नाम था.
इस सूची में शामिल भारतीय नाम काफ़ी आम नाम हैं, जैसे मेघ, सागर, और वायु.
चक्रवात विशेषज्ञों का पैनल हर साल मिलता है और ज़रूरत पड़ने पर सूची फिर से भरी जाती है.
ऐसा नहीं कि 64 नामों की इस सूची को लेकर कोई विवाद नहीं रहा.
2013 में श्रीलंका की ओर से रखे गए 'महासेन' नाम को लेकर श्रीलंका के राष्ट्रवादियों और अधिकारियों ने विरोध जताया था जिसे बाद में बदलकर 'वियारु' कर दिया गया.
उनके मुताबिक़ राजा महासेन श्रीलंका में शांति और समृद्धि लाए थे. इसलिए आपदा का नाम उनके नाम पर रखना ग़लत है.
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