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'अम्मा' की लोकप्रियता का राज़ इनसे पूछें
- Author, ज़ुबैर अहमद
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, चेन्नई से
जयललिता की मृत्यु से तमिलनाड के ग़रीब सब से दुखी हैं. किसी के लिए वो मसीहा थीं तो किसी के लिए माँ.
उनकी मौत ने इन ग़रीबों पर गहरा असर छोड़ा है. कई लोगों ने हमें बताया कि जयललिता की मौत उन लोगों के लिए एक निजी ट्रेजेडी है.
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ग़रीबों में उनकी लोकप्रियता का मुख्य कारण था उनकी हर तरह से सहायता करना. किसी को लैपटॉप दिया गया, किसी को साइकिल और किसी को नकद और सोने के सिक्के.
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उनके बारे में कहा जाता था कि ग़रीबों के लिए उनके दिल में दर्द था. ऐसे ही कुछ ग़रीबों से हमने मुलाक़ात की.
सुल्तान, मज़दूर
एक मोहल्ले में हमने पाया कि 'अम्मा' की एक बड़ी फोटो लगी थी जिसपर एक फूलों का हार चढा था. चेन्नई में ग़रीबों की एक बस्ती में लोग तस्वीर के पास आकर श्रंद्धाजलि दे रहे थे जिनमें हिन्दू, मुस्लिम और ईसाई सभी शामिल थे.
सुलतान ने इस तस्वीर को वहां लगाया था. वो बहुत भावुक थे कि 'अम्मा' अब इस दुनिया में नहीं रहीं. अम्मा उनकी माँ थीं. 'मैंने माँ को खो दिया.'
सुल्तान ने गर्व से अपनी बेटी और बहन को उनके लैपटॉप के साथ बुलाया और कहा ये 'अम्मा' का गिफ्ट है. पढ़ाई के लिए स्कूलों और कॉलेजों में जयललिता सरकार ने लैपटॉप बंटवाये थे.
सुल्तान की बेटी लैपटॉप का इस्तेमाल ख़ूब करती है. सुल्तान के अनुसार अगर अम्मा ना होतीं तो वो इन लड़कियों को अपनी कमाई से लैपटॉप कभी नहीं खरीद सकता था. उन्होंने कहा कि 'अम्मा' की याद उन्हें हमेशा सताएगी.
सेल्वो, आयु 45, पेशा धोबी
सेल्वो अम्मा कैंटीन की एक स्थानीय शाखा में रोज़ दो वक़्त का खाना खाते हैं. सेल्वो जैसे हज़ारों ऐसे ग़रीब हैं जो रोज़ अम्मा कैंटीन में खाना खाते हैं.
ऐसे हज़ारों ग़रीबों के लिए जयललिता ने अम्मा कैंटीन शुरू की थी. सेल्वो कहते हैं जयललिता के गुजरने से उन्हें गहरा दुख हुआ है. "उनका मरना अपनी माँ के मरने जैसा है. वो हमारी अम्मा थीं, हम सब की अम्मा थीं."
सेल्वो कहते हैं कि अगर अम्मा कैंटीन ना होती तो उन्हें महंगे दर पर बाहर से खाना खाना पड़ता जिसके लिए उनके पास पैसे नहीं हैं. "अम्मा कैंटीन का खाना सबसे सस्ता और सबसे अच्छा है."
अपनी पत्नी से तलाक़ के बाद वो अकेले एक कमरे वाली एक खोली में रहते हैं. धोबी का काम करते हैं. कमाई कम है लेकिन अपनी बेटी के स्कूल का खर्च भी उठाना पड़ता है. मगर वो कहते हैं जब तक अम्मा कैंटीन है उन्हें चिंता नहीं.
विद्या, आयु 60, हाउसवाइफ़
कुछ साल पहले विदया की बेटी राधिका की शादी हुई थी तो उसे अम्मा की सरकार की एक योजना के अन्तर्गत 25,000 रुपये नकद मिले और चार ग्राम का सोने का एक सिक्का.
उसने सोने के एक सिक्के और इससे जुड़े सर्टिफिकेट को बड़े गर्व से दिखाते हुए कहा कि उसे अम्मा के कारण ये सब कुछ मिला.
उस ने भावुक होकर कहा, "अम्मा ने महिलाओं के लिए बहुत कुछ किया. हमारी बेटी की शादी में नकद कोई दूसरा नेता नहीं देता. हम उन्हें बहुत मिस करेंगे."
विदया ईसाई धर्म की मानने वाली हैं. उन्होंने कहा की 'अम्मा' की सेहत की बहाली के लिए उन्होंने बहुत दुआ मांगी थी.
विनीता, 18 वर्ष, छात्रा
विनीता अपनी साइकिल पर सवाल होकर कहती हैं कि उनकी साइकिल उनकी नहीं 'अम्मा' की देन है.
युवतियों और छात्राओं के लिए जारी एक योजना के तहत उन्हें ये साइकिल मिली. उन्हें अम्मा पर गर्व है.
वो रोज़ इसी साइकिल से स्कूल जाती हैं. अम्मा की मृत्यु के बाद वो काफी भावुक दिखीं.
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