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छत्तीसगढ़ में जनधन खातों की हक़ीक़त
- Author, आलोक प्रकाश पुतुल
- पदनाम, रायपुर से बीबीसी हिंदी डॉटकॉम के लिए
देश भर में नोटबंदी के बाद छत्तीसगढ़ में ग़रीबों के लिए खुलवाए गए प्रधानमंत्री जन धन खातों पर बहस शुरू हो गई है. सरकार यह मान कर चल रही है कि जन-धन खातों की जांच के बाद बड़ी रक़म सामने आएगी.
राज्य के गृहमंत्री रामसेवक पैंकरा का कहना है, "सभी ज़िलों में अधिकारियों को जन-धन खातों पर नज़र रखने के लिए कहा गया है. माओवाद प्रभावित इलाकों में खास तौर पर इन खातों की जांच-पड़ताल के लिए कहा गया है. हम यह मान रहे हैं कि इन खातों में काला धन जमा करने की कोशिश हो सकती है."
लेकिन अभी तक के आंकड़े बता रहे हैं कि नोटबंदी के तीन हफ्ते बाद भी छत्तीसगढ़ में ये जन-धन खाते खस्ताहाल में हैं.
पूरे देश में खोले गये जन-धन खातों में 22.84 प्रतिशत खाते ज़ीरो बैलेंस वाले हैं लेकिन छत्तीसगढ़ में ऐसे ज़ीरो बैलेंस वाले खातों की संख्या पूरे देश में सबसे अधिक है.
प्रधानमंत्री जन धन योजना की वेबसाइट पर जारी आंकड़ों के अनुसार 30 नवंबर तक छत्तीसगढ़ में जन धन खातों की संख्या 1 करोड़ 19 लाख 14 हज़ार 626 है, लेकिन इनमें से 39 लाख 32 हज़ार 844 खातों में फूटी कौड़ी तक नहीं है. यह कुल खातों का 33 फ़ीसदी है.
अगर छत्तीसगढ़ में सभी जन धन खातों में जमा रक़म की बात की जाए तो यह 1842.86 करोड़ रुपए है. इस तरह औसतन हर खाते में लगभग 1547 रुपए जमा हैं.
राष्ट्रीय स्तर पर आंकड़ों की पड़ताल करें तो पता चलता है कि 9 नवंबर तक देश में ज़ीरो बैलेंस वाले खातों की संख्या 5 करोड़ 93 लाख 67 हज़ार 309 थी. 30 नवंबर तक इनमें से केवल 452561 खाते ऐसे थे, जिनमें पैसे जमा कराये गए, यानी नोटबंदी की घोषणा के बाद से 30 नवंबर तक ज़ीरो बैलेंस वाले केवल 0.76 प्रतिशत खातों में ही पैसे डाले गये हैं.
छत्तीसगढ़ में आम आदमी पार्टी के नेता आनंद मिश्रा ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री मोदी ने मुरादाबाद की रैली में भी जनधन खातों को लेकर बात की लेकिन वो उन उद्योगपतियों, नेताओं की बात नहीं कर रहे हैं, जिनके पास काला धन है.
आनंद मिश्रा कहते हैं- "नोटबंदी के पूरे फ़ैसले में ग़रीब आदमी प्रताड़ित हो रहा है. जबकि सरकार खुद ही काले धन को सफ़ेद धन में बदलने के कदम बता रही है. ध्यान पलटने के लिये जनधन खाता और कैशलेस इकॉनामी की बात हो रही है."
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