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नोटबंदी: पैसे के लिए मज़दूर ने कराई नसबंदी!
- Author, हृदयेश गुप्त
- पदनाम, अलीगढ़ से बीबीसी हिंदी डॉटकॉम के लिए
पांच सौ और एक हज़ार रुपए के नोट का इस्तेमाल बंद होने के बाद, लोगों की परेशानी सरकार की ओर से उठाए गए कई कदमों के बाद भी कम नहीं हो रही है.
हालात यहां तक पहुंच गए हैं कि बीबीसी के संपर्क में आए एक व्यक्ति ने तो माना है कि नोटबंदी के बाद पेश आ रही समस्याओं से निपटने के लिए उसने नसबंदी कराई है.
ये मामला उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में सामने आया है. अलीगढ के ख़ैर थाना क्षेत्र के नहरौला गांव निवासी पूरन शर्मा ने पैसों के लिए नसबंदी कराने की बात कही है.
घर बनाने में मज़दूरी करने वाले पूरन शर्मा जहां काम करते थे, वहां नोटबंदी के बाद काम मिलना बंद हो गया. उनके सामने रोज़ी-रोटी का संकट पैदा हो गया, न तो उन्हें काम मिल रहा था और न पैसे.
ऐसे में उन्हें किसी ने बताया कि नसबंदी करवाने पर सरकार दो हज़ार रुपए दे रही है.
यह सुनकर पैसे की ख़ातिर दो बेटों और एक बेटी के पिता पूरन शर्मा अपनी पत्नी की नसबंदी करवाने के लिए अस्पताल गए. उनकी पत्नी मूक-बधिर हैं.
मूक बधिर होने की वजह से डॉक्टर ने उनकी पत्नी की नसबंदी करने से इनकार कर दिया और पूरन को ही नसबंदी कराने की सलाह दी.
इसके बाद दो हज़ार रुपए की ख़ातिर पूरन ने अपनी नसबंदी करा ली.
अलीगढ़ के मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) का काम संभाल रहे डॉक्टर रूपेंद्र गोयल ने बताया, ''मेहरौना निवासी पूरन शर्मा अपनी पत्नी की नसबंदी करवाने के लिए शिविर में आए थे. लेकिन उनकी पत्नी मूक-बधिर हैं. इसलिए उनकी नसंबदी नहीं की गई, क्योंकि नसबंदी के लिए उनकी सहमति नहीं ली जा सकती थी. इसके बाद पूरन शर्मा को नसबंदी की सलाह दी गई. इस पर वो तैयार हो गए और उनकी नसबंदी कर दी गई.''
उन्होंने बताया कि पुरुषों की नसबंदी को प्रोत्साहित करने के लिए सरकार नसबंदी कराने वाले पुरुष को दो हज़ार रुपए की सहायता देती है. यह सहायता पूरन शर्मा को भी बैंक के माध्यम से दी गई.
इसी गांव के निवासी राजकरन तिवारी बताते हैं कि पूरन बहुत ही ग़रीब हैं और मज़दूरी करके अपना परिवार चलाते हैं. लेकिन नोटबंदी के बाद से उनके सामने समस्या पैदा हो गई थी. इस वजह से उन्हें नसबंदी करानी पड़ी.