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भारत-पाक: कब रुकेगी सैनिकों के शवों के साथ बर्बरता?
- Author, भरत शर्मा
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
भारत ने सोमवार को आरोप लगाया कि उधमपुर में दो भारतीय सैनिकों को शवों के साथ पाकिस्तान ने बर्बरता की.
इससे पहले पिछले साल नवंबर में भारत ने आरोप लगाया था कि पाकिस्तान ने नियंत्रण रेखा के क़रीब उसके तीन सैनिकों को मारा है और इनमें से एक सैनिक के शव के साथ बर्बरता की गई.
पाकिस्तान ने इन आरोपों को सिरे से नकार दिया था. पिछले साल ही 30 अक्तूबर को सैनिक मनदीप सिंह की हत्या के बाद शव को नुकसान पहुंचाने का आरोप लगाया गया था.
2013 में भी इसी तरह का मामला उछला था, जब भारतीय सेना ने दावा किया कि नियंत्रण रेखा पर लांस नायक हेमराज का सिर कटा हुआ पाया गया.
क्या कहते हैं कानून?
दोनों देशों के बीच कारगिल की जंग के दौरान भी सैनिकों के शवों के साथ ऐसी बर्बरता की ख़बरें आई थीं.
ना तो सैनिकों के शव क्षत-विक्षत करने के आरोप नए हैं और ना ही उन पर दी जाने वाली सफ़ाई.
सैनिकों के शवों के साथ किस तरह का व्यवहार किया जाना चाहिए, इस बारे में अंतरराष्ट्रीय कानूनों में पर्याप्त निर्देश दिए गए हैं.
सवाल ये है कि अंतरराष्ट्रीय सीमा या फिर नियंत्रण रेखा पर सैनिकों या उनके शवों के साथ हुई बर्बरता को रोकने के क्या कारगर कदम हो सकते हैं?
अंतरराष्ट्रीय क़ानून के तहत जिनेवा कनवेंशन से लेकर ऑक्सफ़ोर्ड मैनुअल तक में, साफ़ कहा गया है कि शवों के साथ किसी तरह की बदसलूकी की इजाज़त किसी देश की सेना को नहीं है.
इंटरनेशनल कमेटी ऑफ़ द रेड क्रॉस के मुताबिक़ सैनिकों के शवों के साथ कोई छेड़छाड़ ना हो, इसे सबसे पहले क़ानून के तौर पर 1907 के हेग कनवेंशन में अपनाया गया, फिर इसे जिनेवा कनवेंशन में भी शामिल किया गया है.
जिनेवा कनवेंशन के अनुसार- ''टकराव में शामिल दोनों पक्षों को शवों को बुरे व्यवहार से बचाने के लिए क़दम उठाने चाहिए. युद्ध में मुठभेड़ या किसी और वजह से मारे गए शख़्स के शव का सम्मान किया जाना चाहिए.''
साल 1880 के ऑक्सफ़ोर्ड मैनुएल के मुताबिक़, ''युद्ध के मैदान में पड़े हुए शव के साथ बर्बरता पर पूरी तरह पाबंदी है.''
विशेषज्ञों का कहना है कि युद्ध में जानें जाती हैं, ये स्वाभाविक है. लेकिन मानवीय मूल्य और अंतरराष्ट्रीय कानून इस बात की इजाज़त नहीं देते कि शवों के साथ ज़्यादती हो.
बीबीसी ने इंडियन सोसाइटी ऑफ़ इंटरनेशनल लॉ की सेक्रेटरी जनरल और दिल्ली यूनिवर्सिटी में लॉ फैकल्टी की डीन रह चुकीं सुरिंदर कौर वर्मा से इस बारे में बात की है.
सुरिंदर कौर वर्मा ने कहा, ''अंतरराष्ट्रीय कानून के मुताबिक शवों से छेड़छाड़ या उनके अपमान की इजाज़त कतई नहीं दी जा सकती. इस बारे में कानून पूरी तरह स्पष्ट है.''
क्या शवों से बर्बरता के मामले को उठाने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कोई असरदार मंच है?
इसके जवाब में विशेषज्ञ सुरिंदर कौर वर्मा कहती हैं- ''ऐसा कोई मंच नहीं है. अगर इसे युद्धापराध कहा जाए, तो इस मामले को उठाने के लिए इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट है. लेकिन दिक्कत ये है कि ना तो भारत इसका हिस्सा है और ना ही पाकिस्तान.''
उन्होंने कहा, ''मामला उठाया जा सकता है, दबाव डालने के लिए. शव का अपमान, जानबूझकर किया गया अपराध है और इसकी शिकायत की जा सकती है. ये साबित करने पर कार्रवाई भी हो सकती है. इसे इंटरनेशनल कोर्ट में ला जा सकते हैं या ट्रिब्यूनल बनाया जा सकता है. लेकिन हमें ये भी देखना होगा कि क्या भारत-पाकिस्तान के बीच हालात उस हद तक पहुंच चुके हैं, जिन्हें अंतरराष्ट्रीय मंच तक ले जाएं.''
रक्षा विश्लेषक कोमोडोर (रिटायर्ड) उदय भास्कर ने बीबीसी से कहा, ''कारगिल के बाद ऐसी घटनाएं ज़्यादा बढ़ी हैं, वो भी ख़ास तौर पर पाकिस्तान की तरफ़ से. जंग और टकराव में भी एक मर्यादा होती है, जिसे लांघा नहीं जा सकता.''
उन्होंने कहा, ''जिनेवा कनवेंशन के ख़ाके में या दूसरे किसी अंतरराष्ट्रीय मंच पर ऐसा कोई फ़ैसला अभी तक नहीं आया है जिससे इस तरह की घटनाएं रोकी जा सकें. दुनिया भर में युद्ध के नाम पर जो ख़ून-ख़राबा जारी है, वो शवों के सम्मान से जुड़े नियमों से उलट है. ये चिंताजनक है.''
इस पर कोमोडोर उदय भास्कर ने कहा कि दोनों सेनाओं को अपने स्तर पर इस मुद्दे पर बात करनी चाहिए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं ना हों.