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100 Women: गेमिंग की दुनिया में औरतों का बोलबाला
पेशेवर गेमिंग में बहुत कम महिलाएं ही भाग लेती हैं और जो लेती हैं, उन्हें भी अमूमन उत्पीड़न का सामना करना पड़ता है. पुरुषों की तुलना में उन्हें पैसे भी काफ़ी कम मिलते हैं.
गेमिंग के क्षेत्र में चोटी की दो महिलाओं ने बीबीसी से बात की और बताया कि वे किस तरह भेदभाव से लड़ रही हैं और दूसरी औरतों को इस क्षेत्र में आने के लिए प्रोत्साहित कर रही हैं.
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गेमिंग को इलेक्ट्रॉनिक स्पोर्ट्स या ई-स्पोर्ट्स भी कहते हैं. यह अविश्वसनीय रफ़्तार से बढ़ रही है. मैनेजमेंट सलाहकार कंपनी डेलोइट का अनुमान है कि साल 2016 में ई-स्पोर्ट्स का राजस्व 25 फ़ीसद बढ़ कर 50 करोड़ डॉलर हो जाएगा. इसे देखने वालों की तादाद भी बढ़ कर 15 करोड़ हो जाएगी.
पारंपरिक खेल के उलट ई-स्पोर्ट्स में शारीरिक ताक़त की कोई अहमियत नहीं है. इसके बावजूद इस क्षेत्र पर भी पुरुषों का ही बोलबाला है.
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पीउ सेंटर ने अपने शोध में पाया कि गेमिंग के क्षेत्र में पुरुष और महिलाएं बिल्कुल बराबर हैं. पर जितनी औरतें ख़ुद को गेमर समझती हैं, उसके दूने पुरुष ख़ुद को ऐसा मानते हैं. जब खेल में प्रतिस्पर्द्धा बढ़ जाती है तो महिलाओं की संख्या नाटकीय ढंग से कम हो जाती है.
स्टेफ़ हार्वे दुनिया की सबसे कामयाब गेमर्स में एक हैं. वे कहती हैं कि ई-स्पोर्ट्स में महिलाओं की संख्या पांच फ़ीसद है. इसकी मुख्य वजह इस खेल के साथ जुड़ी हुई परंपरावादी सोच है.
उन्होंने बीबीसी से कहा, "यह अभी भी लड़कों का क्लब है. लिहाजा, महिलाओं को अलग समझा जाता है."
गेमिेंग समुदाय में ऑनलाइन दुर्व्यवहार कई साल से आम है. ख़ास तौर पर 2014 और 2015 में कथित गेमरगेट विवाद हुआ था, जिसमें दोनों ही पक्षों ने परेशान किए जाने की शिकायत की थी.
स्टेफ़ को अतीत में बलात्कार की धमकी ऑनलाइन पर दी गई थी. वे कहती हैं, "मुझे परेशान किया गया और कहा गया कि वे मेरे शरीर से क्या कर सकते हैं. उन्होंने मुझे कहा था कि मैं अपने लिंग की वजह से इस जगह रहने लायक नहीं हूं."
उन्हें लगने लगा कि वे अपने काम को लेकर मायूस हो चुकी हैं. उन्होंने कहा, "यदि मेरा समुदाय मुझसे नफ़रत करे तो मैं ऐसा क्यों करूं. वह इसलिए कि मैं नारीवादी हूं, इसलिए कि मेरा मानना है कि गेमिंग में महिलाओं की अपनी जगह है."
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अक्टूबर में महिलाओं की गेमिंग में चोटी पर पंहुचने वाली 'टीम सीक्रेट' की लीडर जूलिया किरन हैं. उन्होंने कहा, "ऐसा हमेशा लगता है कि महिला टीमें मैदान में नहीं हैं. पुरुष गेमर हमें हाशिए पर खड़ा मानते हैं जिसकी कोई गिनती ही नहीं है."
इसका एक उपाय है, महिलाओं की अलग टीम और उनके लिए अलग टूर्नामेंट.
स्टेफ़ ने कहा, "मैं इसका सबूत हूं कि मुझे लगा कि औरतों को इसमें भाग लेना चाहिए और उन्हें यह विश्व कप जीतना चाहिए. जिन पर आप भरोसा कर सकें, उनसे प्रोत्साहन पाने से आपको मजबूती मिलती है."
लेकिन महिला टूर्नामेंट विवादों से बच नहीं सके. जूलिया समेत कई खिलाड़ियों को लगता है कि यह लैंगिक भेदभाव को और मजबूत करता है. जूलिया ने कहा, "यह देखने में अच्छा लगेगा कि पुरुष और औरतें एक साथ काम कर रही हैं."
टूर्नामेंट और स्पॉन्सरशिप के मामले में पुरुष और स्त्री में काफ़ी अंतर है. दोनों को मिलने वाली पुरस्कार राशि में भी बहुत अंतर है.
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पेरिस ई-स्पोर्ट्स वर्ल्ड कॉन्वेंशन में मिक्स्ड कंपीटीशन की पुरस्कार राशि 75,000 डॉलर रखी गई थी. पर महिलाओं के वर्ग में यह रकम सिर्फ़ 15,000 डॉलर थी.
इसी तरह चोटी के पुरुष खिलाड़ी की कमाई 25 लाख डॉलर तक होती है जबकि उसी स्तर की महिला खिलाड़ी को दो लाख डॉलर से भी कम मिलते हैं. दरअसल महिला टीमों से कम कमाई होती है, उन्हें कम स्पॉन्सर मिलते हैं और प्रचार भी कम मिलता है.
स्टेफ़ को उम्मीद है कि बड़ी कंपनियां महिलाओं की टूर्नामेंट और महिला खिलाड़ियों को समर्थन देने सामने आएंगी.
अमेज़ॉन के मालिकाना हक़ वाली गेमिंग स्ट्रीमिेंग साइट ट्विच साइटों पर किए जाने वाले दुर्व्यवहार से निपटने पर काम कर रही है. स्टेफ़ ने अपना ख़ुद का एक समाधान ढूंढ निकाला है.
मिसक्लिक्स एक संगठन है जो महिला खिलाड़ियों की गेमिेंग को स्ट्रीम करता है और उन्हें प्रमोट भी करता है.
स्टेफ़ का मानना है कि गेमिंग में कम पेशेवर महिला गेमर्स के होने की ऐतिहासिक वजहें भी हैं. वे कहती हैं, "भले ही गेमिंग में शारीरिक ताक़त का कोई मतलब नहीं हो, गेम डेवलप करने वालों ने पुरुषों के ख़ास रिफ़्लेक्स, कौशल और जागरूकता को ध्यान में रख कर काम किया."
उन्हें उम्मीद है कि ज़्यादा से ज़्यादा महिलाएं गेम डेवलप करेंगी, वे औरतों को ध्यान में रखेंगी और उन्हें प्रत्साहित करेंगी. वे कहती हैं, "मुख्यधारा के गेमर्स अधिक विविधता वाले हैं और यदि मैं एक व्यक्ति को भी प्रोत्साहित कर सकी तो ख़ुद को किसी लायक मानूंगी."