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नीतीश सरकार का एक साल: पास या फ़ेल?
- Author, संजय कुमार
- पदनाम, निदेशक, सीएसडीएस
बिहार में नीतीश कुमार की मौजूदा सरकार ने अपना एक साल पूरा कर लिया है. अगर इस एक साल को बिहार सरकार के लिए इम्तहान माना जाए तो बतौर परीक्षक मेरे हिसाब से नीतीश कुमार ना केवल पास हुए हैं, बल्कि उनकी सरकार पहले डिविज़न से पास हुई है. हालाँकि रोज़ग़ार पैदा करने और स्कूल कॉलेज में शिक्षा के स्तर को बेहतर करने के बारे में काफ़ी कुछ किया जाना बाक़ी है.
ज़ाहिर है, ये अंक उन्हें बीते एक साल के दौरान किए गए काम और नीतियों के चलते ही मिला है. गठबंधन सरकार में उन नीतियों को आगे बढ़ाना आसान नहीं होता, जिनमें सहयोगी का पूरा समर्थन नहीं मिल पाता हो या फिर सहयोगी ख़िलाफ़ हो. बावजूद इसके मुख्यमंत्री के तौर पर नीतीश कुमार कई अहम नीतियों को लागू करने में कामयाब रहे. इनमें सबसे अहम बिहार में शराब की बिक्री पर पूरी तरह पाबंदी लगाना रहा.
ये सच है कि सरकार ने अपने सहयोगी दल के दबाव में गरीबों लोगों की आजीविका के साधन ताड़ी की बिक्री पर पाबंदी नहीं लगाई है, बावजूद इसके यह बीते एक साल के दौरान शासन के स्तर पर सबसे अहम फ़ैसला रहा.
हालांकि, विपक्ष के नेताओं ने शराबबंदी से संबंधी क़ानून, ख़ासकर सज़ा के प्रावधानों को क्रूर ठहराया है, लेकिन सरकार ने साहस दिखाते हुए क़ानून तोड़ने वालों के लिए सख़्त सजा का प्रावधान लागू किया है. क़ानून के मुताबिक शराबबंदी का उल्लंघन करने पर ना केवल दोषी, बल्कि उसके पूरे परिवार और यहां तक की गांव को सज़ा मिल सकती है.
यह उस सरकार के लिए छोटी उपलब्धि नहीं है, जो ऐसे सहयोगी दल पर निर्भर है, जो इस नीति का पूरी तरह समर्थन नहीं कर रहा है. मुझे इसमें कोई शक़ नहीं है कि ऐसी नीति का असर बिहार के लोगों के जीवन और उनकी अर्थव्यवस्था पर बड़े पैमाने पर होगा.
हालांकि, इस क़ानून को लागू करने में अब भी कुछ ख़ामियां हैं, लेकिन एक साल के छोटे अंतराल में इससे लोगों के जीवन में बदलाव आया है. क़ानून तोड़ने वालों के लिए सरकार ने कुछ ज़्यादा ही सख़्त सज़ा रखी है, लेकिन इस मामले में सरकार को डिस्टिंक्शन अंक दिए जा सकते हैं.
चूंकि नीतीश कुमार दस साल से मुख्यमंत्री हैं और वो मूलभूत समस्याओं को हल करने में काफ़ी हद तक कामयाब रहे थे, ऐसे में तीसरे कार्यकाल के दौरान महज एक साल के अंदर कोई अहम बदलाव कर पाना संभव नहीं था.
क़ानून-व्यवस्था, सड़कों की स्थिति और बिजली आपूर्ति - ये सब ऐसे क्षेत्र रहे, जिसमें नीतीश सरकार ने पहले भी काफ़ी अच्छा काम किया है और हाल के महीनों में भी उन्होंने इसे बेहतर बनाने के कोशिश की है. इस कार्यकाल में उन्होंने राज्य के पुलिस मुखिया के अधीन एक हेल्पलाइन शुरू की, जो 24 घंटे लोगों की मदद के लिए उपलब्ध है. इससे क़ानून-व्यवस्था की स्थिति और बेहतर ही होगी.
नीतीश ने अपने पिछले कार्यकाल के दौरान सड़कों की स्थिति को बेहतर बनाया था, इससे एक जगह से दूसरी जगह तक सफ़र करने में लोगों का काफ़ी समय बचने लगा था. हालांकि, बीते एक साल के दौरान बिहार में सड़कों का नेटवर्क बढ़ाने की दिशा में ख़ास प्रगति नहीं हुई है.
हो सकता है कि पटना को स्मार्ट सिटी में बदलने के मिशन के चलते नीतीश कुमार का ध्यान सड़कों पर ना गया होगा. बीते कार्यकाल के दौरान नीतीश ने बिहार में बिजली आपूर्ति की स्थिति को काफ़ी बेहतर बनाया था. उन्होंने बिहार में हर किसी के लिए मुफ़्त बिजली कनेक्शन देने की घोषणा की थी. हालांकि, अब तक ये स्पष्ट नहीं है कि ये कैसे संभव होगा. यही वजह है कि उन्हें इन तीन मुद्दों पर केवल पास करने लायक अंक दिए जा सकते हैं.
बिहार में आधारभूत विकास तो हुआ है, यह आम लोगों को संतोष भी देता है, लेकिन सरकार के सामने अब चुनौती दीर्घकालीन है- वो है रोज़गार देने की. यह केवल तेज अद्यौगिककरण से ही संभव है. राज्य सरकार ने हाल ही में इसके लिए एक रोड मैप बनाया है.
इसके अलावा राज्य सरकार ने ताड़ी पर आधारित उद्योग के लिए एक एक्शन प्लान भी तैयार करने का निर्देश दिया है. नई शुरुआत दिख रही है, लेकिन सरकार कहां तक जा पाएगी, ये देखना बाक़ी है. हालांकि, इन नई पहल के लिए राज्य सरकार की प्रशंसा होनी चाहिए.
नीतीश ने बिहार पब्लिक ग्रिविएंस रिड्रेसल एक्ट की शुरुआत की है, ताकि लोगों की शिकायतों को एक समय-सीमा के भीतर दूर किया जा सके. लेकिन यह सिस्टम कितना प्रभावी होगा, ये अभी नहीं कहा जा सकता.
शिक्षा भी एक ऐसा अहम क्षेत्र है, जो नीतीश सरकार के फोकस में नहीं दिखता. सरकार को स्कूली और कॉलेज शिक्षा व्यवस्था को सुधारने पर ध्यान देना चाहिए. हालांकि, सरकार ने आर्थिक हल, युवाओं का बल जैसी योजना शुरू की है, जिसका उद्देश्य बिहार के युवाओं की वित्तीय स्थिति को बेहतर बनाना है. लेकिन इसमें ज़्यादा कुछ नहीं किया गया है. इस पहलू में सरकार बुरी तरह नाकाम रही है.
बिहार सरकार ने पहले साल में लग्ज़री सामान की ख़रीद पर 13.5 प्रतिशत टैक्स लगाया है, यह गरीबों के प्रति सरकार के संवेदनशील होने का संकेत है. नीतीश ने तीसरे कार्यकाल की शुरुआत ठीक-ठाक की है. एक साल में अच्छा काम किया है, लेकिन अभी बहुत कुछ किया जाना बाक़ी है.
(संजय कुमार सेंटर फॉर द स्टडी ऑफ़ डेवलपिंग सोसायटीज- सीएसडीएस के निदेशक हैं. इस आलेख में उनके निजी विचार हैं.)
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