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करोड़ों उंगलियां के लिए कम पड़ जाएगी स्याही
- Author, नितिन श्रीवास्तव
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, दिल्ली
अमिट स्याही या इन्डेलिबल इंक बनाने का ज़िम्मा कर्नाटक की मैसूर पेंट्स एंड वार्निश लिमिटेड (एमपीवीएल) नाम की कंपनी के पास ही है, जिस पर अब लाखों-करोड़ों बैंक ग्राहकों के लिए भी ये स्याही बनाने का काम सौंपा गया है.
दशकों से चुनाव में इस्तेमाल होने वाली स्याही इसी सरकारी कंपनी में तैयार होकर देश के दूसरे हिस्सों में जाती है.
सीनियर बैंक अधिकारियों का कहना है पैसे बदलने के समय अमिट स्याही के इस्तेमाल के सरकारी फ़ैसले के बाद से हालांकि कंपनी में चौबीसों घंटे काम हो रहा है लेकिन एमपीवीएल ने साफ़ कर दिया है कि वो ऑर्डर के मुताबिक़ ही स्याही बना पाएंगे.
सरकार चाहती है कि एमपीवीएल 5 एमएल और 10 एमएल की छोटी शीशियों में इंक भेजने की बजाय, बड़े कन्टेनरों का इस्तेमाल शुरु करे लेकिन कंपनी ने इस पर हामी नहीं भरी है.
फ़िलहाल कंपनी ने क़रीब 35,000 शीशियां आरबीआई को मुहैया कराईं है जिन्हें अलग-अलग जगहों पर भेजा जा रहा है.
लेकिन ये आरबीआई के कुल 2,75,000 शीशियों के ऑर्डर से बहुत कम है. एमपीवीएल का कहना है कि पुरी सप्लाई में अभी वक्त लग सकता है.
हालांकि इस बीच चुनाव आयोग ने वित्त मंत्रालय को चिट्ठी लिखकर बैंकों में इंक का इस्तेमाल करने से मना किया है.
कुछ राज्यों में 19 नवंबर को होने जा रहे उपचुनावों का हवाला देते हुए चुनाव आयोग ने स्याही के निशान का विकल्प ढ़ूंढने की बात कही है.
रहा नए नोट बनने और उनके वितरण का सवाल, तो सूत्रों के अनुसार हवाई अड्डों पर तैनात वायु सेना के एएन-32 मालवाहक विमान भी नोटों को देश के दूसरे हिस्सों में पहुंचाने में लगे हैं.
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