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देश में हालात अब नॉर्मल हो चुके हैं: जेटली
मोदी सरकार के विमुद्रीकरण के फ़ैसले को सही ठहराते हुए वित्तमंत्री अरुण जेटली ने कहा है कि यह एक ऐतिहासिक फ़ैसला है, जिसे पलटा नहीं जा सकता.
कुछ विपक्षी दलों ने इस फ़ैसले को वापस लिए जाने की मांग की थी. उन्हें जवाब देते हुए जेटली ने कहा कि इस फ़ैसले को वापस लेने का कोई सवाल पैदा नहीं होता.
जेटली ने दावा किया कि वे हालात का जायज़ा लेने के लिए रोज़ाना दिल्ली की बैंक शाखाओं का दौरा कर रहे हैं. जेटली के मुताबिक़ देश में करेंसी की कमी के चलते पैदा हुए 'बेसब्री के हालात' अब नॉर्मल हो चुके हैं.
गुरूवार को टीवी चैनलों पर दिखाए गए एक इंटरव्यू में अरुण जेटली ने कहा:
- फ़ैसला आने के दो दिन बाद तक स्थिति ज़रूर ख़राब थी, लेकिन उसके बाद भीड़ में लगातार कमी आई.
- बैंक कर्मियों को यह सरकार सलाम करती है, जिन्होंने लोगों के लिए समय से ज्यादा काम किया.
- एटीएम मशीनों का सिस्टम युद्धस्तर पर बदला गया.
- कोई काले धन को बैंकों से बदलवा नहीं सके, इसके लिए लिमिट को घटाकर 2000 किया गया.
- कुछ दिनों तक लोगों को जो दिक्क़ते पेश आई, वो पहले से संभावित था.
- रिज़र्व बैंक के पास पर्याप्त करेंसी है, इसलिए 'आर्थिक इमरजेंसी' जैसा कुछ नहीं हो सकता.
- कुछ राजनीतिक दल और कुछ राज्य सरकारें इससे भाग रहे हैं और सहयोग नहीं कर रहे.
- लेकिन कुछ दिनों के भीतर करेंसी बदलने का दुनिया का सबसे बड़ा अभियान सफलतापूर्वक पूरा हो जाएगा.
इस फ़ैसले के बाद मोदी सरकार पर यह आरोप लगे थे कि बीजेपी सरकार ने चुनिंदा लोगों को इस बड़े फ़ैसले की जानकारी लीक कर दी थी.
इसके जवाब में अरुण जेटली ने कहा, "सूचना लीक करने की बात कहकर जो लोग संयुक्त संसदीय समिति बनाने की मांग कर रहे थे, वो संसद में चर्चा के दौरान एक भी सबूत नहीं दे पाए. ऐसे में जांच दल बनाने का कोई मतलब नहीं बनता."
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