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मुश्किल है भारतीय अर्थव्यवस्था का कैशेलेस होना: येचुरी
विपक्ष ने इस तर्क को ख़ारिज कर दिया है कि करेंसी पर रोक से अर्थव्यवस्था कैश से कैशलेस की तरफ बढ़ेगी.
राज्यसभा में नोटों के रद्द किए जाने पर जारी बहस के दौरान सीपीएम जनरल सेक्रेटरी सीताराम येचुरी ने कुछ अहम आंकड़े पेश किए:
येचुरी ने कहा भारत में '2.6 करोड़ लोगों के पास ही क्रेडिट कार्ड हैं. जबकि रिटेल शॉप और आउटलेट्स पर सिर्फ़ 14 लाख कार्ड रीडर हैं।'
सीपीएम नेता ने कहा क्या हम इसी तरह की व्यवस्था से अर्थव्यवस्था को कैशलेस बना लेंगे.
उन्होंने कहा मुल्क की 80 प्रतिशत से ज्यादा लोग कैश इकोनॉमी पर निर्भर हैं. सरकार के फ़ैसले का ट्रक ड्राइवर, मज़दूर, किसान, मछुआरों जैसे तबकों पर बुरा प्रभावित पड़ रहा है.
मोदी पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा, '1789 में फ्रांस के राज लुई 16वें की दुल्हन मेरी आंतोने को जब कहा गया कि लोगों के पास रोटी नहीं तब उन्होंने कहा था कि वे केक क्यों नहीं खाते. उसी तरह मोदी कह रहे हैं कि आपके पास रुपया नहीं है तो प्लास्टिक मनी का इस्तेमाल क्यों नहीं करते.'
हालांकि ऐसी रिपोर्ट भी आ रही है कि सरकार के इस फ़ैसले के बाद कार्ड स्वाइप मशीन की मांग बढ़ी है.
पेमेंट काउंसिल ऑफ इंडिया के चेयरमैन नवीन सूर्या ने हाल ही में बीबीसी हिन्दी से कहा था, ''इस मामले में अभी माक़ूल आंकड़ा देना मुश्किल है लेकिन जो ट्रेंड मिला है उससे पता चलता है कि प्री-पेड वॉलेट्स में 60 से 70 पर्सेंट का ग्रोथ है.''
उनका कहना था कि भारत में अब भी 90 फ़ीसदी लोग कैश का इस्तेमाल करते हैं जबकि महज़ 10 फ़ीसद ही डिजिटल अर्थव्यवस्था के साथ क़दम मिलाकर चल पा रहे हैं.
रिज़र्व बैंक ऑफ इंडिया की मार्च में आई रिपोर्ट में कहा गया है कि 88 प्रतिशत लोग डेबिट कार्ड का इस्तेमाल एटीएम से पैसे निकालने में करते हैं. मतलब एटीएम भी कैश निकालने में काम आ रहा है न कि कैशलेस प्रवृत्ति को बढ़ावा दे रही है.
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