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'रतन टाटा कर रहे थे मेरे काम में दख़लअंदाज़ी'
- Author, साइमन एटकिंसन
- पदनाम, एशिया बिज़नेस संवाददाता
टाटा समूह के चेयरमैन पद से अचानक हटाए जाने पर सायरस मिस्त्री ने पलटवार किया है.
बोर्ड को भेजे गए पांच पन्नों के एक ईमेल में सायरस मिस्त्री ने लिखा है कि लगातार उनके काम में दख़लअंदाज़ी की जा रही थी जिससे चेयरमैन पद पर उनकी स्थिति कमज़ोर हो रही थी.
सायरस ने कहा कि कई बार उन्हें ऐसे सौदों को मंज़ूरी देने को कहा गया जिनके बारे में उन्हें ज़्यादा जानकारी नहीं थी.
बीबीसी को इस ईमेल की कॉपी मिली है जिसके मुताबिक़ उन्होंने टाटा समूह को व्यापार में भारी नुक़सान की चेतावनी भी दी है.
सायरस के इस ईमेल के बाद बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज ने टाटा से इस बारे में सफ़ाई मांगी है.
टाटा समूह की होल्डिंग कंपनी टाटा संस ने सायरस मिस्त्री को पद से हाल ही में हटा दिया था और इसके पीछे विस्तार से कोई वजह भी नहीं बताई गई थी.
लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि कंपनी की रणनीति को लेकर मतभेद थे जिसे लेकर टाटा परिवार नाराज़ था.
यूरोप में टाटा के स्टील प्लांट को बेचने के सायरस के इरादे से टाटा परिवार नाख़ुश था. परिवार को कंपनी के वैश्विक विस्तार की अपेक्षा थी.
टाटा समूह से छुट्टी के बाद सायरस मिस्त्री ने लिखा है कि उन्हें हटाने के तरीक़े से 'बोर्ड को भी कोई प्रशंसा नहीं मिली है' और इससे ख़ुद उनकी और टाटा कंपनी की साख को काफ़ी नुक़सान हुआ है.
सायरस ने लिखा है कि जब 2012 में वो ग़ैर कार्यकारी निदेशक के पद से चेयरमैन बनाए गए तो उन्हें अंदाज़ा नहीं था कि उन्हें विरासत में कितनी गंभीर समस्याएं मिल रही हैं.
उन्होंने कहा कि कंपनी के अंदरूनी मामलों को सार्वजनिक नहीं करना चाहते लेकिन ये चेतावनी ज़रूर देना चाहते हैं कि उन्हें चेयरमैन बनते वक़्त जो पांच लाभहीन ईकाइयां विरासत में मिली थीं उनसे कंपनी को 1.18 ट्रिलियन रुपयों (18 अरब डॉलर) का नुक़सान हो सकता है.
उन्होंने जो मुद्दे उठाए उनमें कई होटलों, यूके और कीनिया में रसायन के व्यापार और यूरोप में स्टील प्लांट में विदेशी निवेश के कारण भारी क़र्ज़ के अलावा टेलिकॉम बिज़नेस में क़रीब एक अरब डॉलर के जुर्माने जैसे मुद्दे शामिल हैं.
सायरस ने टाटा पावर का भी ज़िक्र किया जिसमें टाटा ने कोयले के दामों को कम आंकने और स्थानीय ज़मीन के मालिकों से विवाद के चलते मुसीबतें मोल ली है.
दुनिया की सबसे सस्ती कार बनाने वाले टाटा के नैनो प्रॉजेक्ट को भी साइरस मिस्त्री ने घाटे का सौदा बताया.
उन्होंने कहा, ''किसी भी रणनीति के तहत कंपनी को इसे (प्रॉजेक्ट) बंद कर देना चाहिए. सिर्फ़ भावनात्मक कारणों से ही हम इस अहम फ़ैसले से अब भी दूर हैं.''
उड्डयन क्षेत्र में सहयोगियों के साथ टाटा के संयुक्त वेन्चर्स पर उन्होंने कहा कि ये पूर्व चेयरमैन रतन टाटा के दबाव में किए गए हैं.
उन्होंने कहा कि पूर्व चेयरमैन रतन टाटा ने उनसे एयर एशिया इंडिया की स्थापना के लिए मलेशिया एयर एशिया के साथ टाय-अप पर जल्द दस्तख़त करने को कहा, ये दबाव काफ़ी था लेकिन बेकार भी था.
उन्होंने कहा कि एयर एशिया इंडिया सौदे में कई छलपूर्ण लेन-देन हुए जिनकी बाद में जांच शुरू की गई.
सायरस मिस्त्री टाटा संस के 148 साल के इतिहास में पिछले 80 साल में टाटा परिवार के बाहर से चेयरमैन बनने वाले पहले व्यक्ति थे.
1930 से उनका परिवार टाटा का प्रमुख निवेशक रहा है और टाटा संस में 18 फ़ीसदी की हिस्सेदारी की कंपनियों पर नियंत्रण है.
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