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हुर्रियत से दिल्ली का ट्रैक-टू डॉयलाग शुरु?
- Author, रियाज़ मसरूर
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता, श्रीनगर
भारतीय जनता पार्टी नेता और पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री यशवंत सिन्हा की अगुवाई वाले एक प्रतिनिधिमंडल ने अलगाववादी कश्मीरी नेता मीरवाइज़ उमर फ़ारुक़ और सैयद अली शाह गीलानी से मंगलवार को मुलाक़ात की है.
हालांकि यशवंत सिन्हा का कहना था कि इस टीम का सरकार से कोई लेना-देना नहीं है लेकिन मीरवाइज़ जो कि दो माह से क़ैद में थे उन्हें मुलाक़ात से एक दिन पहले ही रिहा कर दिया गया.
यशवंत सिन्हा की टीम ने उनसे उनके निवास स्थान पर मुलाक़ात की.
इस प्रतिनिधिमंडल में पूर्व एयर वाइस मार्शल कपिल काक, वार्ताकार वजाहत हबीबुल्लाह, पत्रकार भारत भूषण और समाजिक कार्यकर्ता शोभा भारवे शामिल हैं.
डेढ़ घंटे की मुलाक़ात के बाद मीरवाइज़ उमर फ़ारुक़ ने बताया, "अगर यह सरकार का भी प्रतिनिधिमंडल है तो इससे हमें कोई फर्क नहीं पड़ता. हमने उन्हें कहा है कि वो भारत सरकार को बता दें कि लोग यहां आज़ादी चाहते हैं. हमारी इस मांग के जवाब में भारत सरकार ने बहुत ज़ुल्म किए हैं."
गृहमंत्री राजनाथ सिंह के नेतृत्व में पिछले महीने भी एक सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल यहां आया था और कुछ सदस्यों ने व्यक्तिगत रूप से अलगाववादी नेताओं से मिलने की कोशिश की थी लेकिन तब दोनों ने बातचीत से इनकार कर दिया था.
यासीन मलिक उस समय भी जेल में थे.
यह पूछने पर कि इस बार हुर्रियत नेता प्रतिनिधिमंडल के साथ बातचीत के लिए कैसे सहमत हो गए? मीरवाइज़ ने कहा, "सोमवार शाम मुझे रिहा किया गया और मंगलवार सुबह मुझे पता चला कि ये लोग आए हैं. हो सकता है कि मुझे इसलिए रिहा किया गया हो कि मैं उनसे बात करूँ. मेरी बात गिलानी साहब से हुई. उन्होंने कहा कि उन्होंने प्रतिनिधिमंडल से बातचीत की है और मुझे भी बताया कि मैं साफ़ कर दूं कि हम लोग क्या चाहते हैं."
मीरवाइज़ ने बातचीत के बाद संवाददाता सम्मेलन में कहा, "पिछली बार सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल का दौरा एक मज़ाक था. यासीन मलिक जेल में थे और गीलानी घर में नज़रबंद थे. मुझे भी घर में ही क़ैद किया गया था. और फिर वे लोग तो कश्मीर समस्या की वास्तविकता स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं थे."
मीरवाइज़ ने आगे कहा, "हमने अटल बिहारी वाजपेयी के समय में भी बातचीत का रास्ता अख़्तियार किया था. तब वाजपेयी जी ने कहा था कि भारतीय संविधान नहीं बल्कि मानवता के दायरे में बात होगी. आजकल तो बच्चों को अंधा करके, उन्हें क़ैद करने और मारने का अभियान चलाया जा रहा है. यह न तो भारत के संविधान का दायरा है और न ही मानवता का."
कश्मीर घाटी में पिछले तीन महीने से भी ज़्यादा समय से कर्फ़्यू की स्थिति है. चरमपंथी बुरहान वानी की सुरक्षा बलों से मुठभेड़ में मौत के बाद से कश्मीरी लोगों ने आंदोलन छेड़ दिया है.
ख़राब सेहत की वजह से जेल से अस्पताल लाए गए यासीन मलिक ने एक बयान जारी कर कहा, "कश्मीरी लोगों की मौतों, घरों की तोड़फोड़, गिरफ्तारी, प्रतिबंध और लोगों को परेशान करने की सरकारी नीति के बीच दिल्ली से आने वाले किसी भी प्रतिनिधिमंडल से बातचीत बेकार होगी."
उनकी पार्टी लिबरेशन फ्रंट के अनुसार प्रतिनिधिमंडल ने उनके साथ मुलाकात की इच्छा भी जताई थी, लेकिन यासीन मलिक ने इस प्रस्ताव को नकार दिया.
इससे पहले अटल बिहारी वाजपेयी और मनमोहन सिंह के प्रधानमंत्री काल के दौरान हुर्रियत नेता कश्मीर पर होने वाली बातचीत में शामिल होते रहे हैं.
हालांकि भारत सरकार और हुर्रियत नेतृत्व की कश्मीर को लेकर राय अलग-अलग है लेकिन बातचीत के लिए कश्मीर गए इस भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने दावा किया कि मीरवाइज़ और गीलानी के साथ बेहद ख़ुशनुमा माहौल में बातचीत हुई.