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रेलवे ने मुआवज़ा न दिया, 'ट्रेन हुई ज़ब्त'
- Author, इमरान क़ुरैशी
- पदनाम, बैंगलौर से, बीबीसी हिंदी डॉट कॉम के लिए
कर्नाटक के हरिहर स्टेशन पर अदालत ने किसान का मुआवज़ा न चुकता करने पर एक ट्रेन को रुकवा दिया.
ट्रेन स्टेशन पर लगभग ढेढ घंटे रुकी रही और उसे तब ही जाने दिया गया जब रेलवे के अधिकारी ने लिखित में कोर्ट को आश्वासन दिया कि किसान का मुआवज़ा जल्द चुकता किया जाएगा.
अदालत के एक अधिकारी ने नाम ना बताने की शर्त पर बताया कि हरिहर स्टेशन पर रेलवे सुरक्षा बल की सहायता से मैसूर जा रही सिद्धगंगा इंटर सिटी एक्सप्रेस को औपचारिक तौर पर ज़ब्त कर लिया.
साल 2006 में रेलवे ने रेलवे ट्रैक बनाने के वास्ते हरिहर गांव के 62 साल के शिवकुमार की एक एकड़ से ज़्यादा ज़मीन का अधिग्रहण किया था.
लेकिन जब रेलवे ने मुआवज़ा देने में आनाकानी की तो शिवकुमार ने अदालत का दरवाज़ा खटखटाया.
2013 में अदालत ने आदेश दिया कि रेलवे शिवकुमार को 36 लाख रुपए मुआवज़े की राशि और ब्याज मिलाकर कुल 38.20 लाख रुपए दे.
लेकिन जब ऐसा नहीं हुआ तब अदालत ने ट्रेन को ही ज़ब्त करने का फ़ैसला सुना दिया.
शिवकुमार के वकील के जी एस पाटिल ने बीबीसी को बताया, ''क़रीब 100 मिनट बाद जब (रेलवे) अधिकारियों ने अदालत को लिखित में मुआवज़ा देने का भरोसा दिया तब ट्रेन को आगे जाने दिया गया.''
शिवकुमार ने बताया, ''रेलवे अधिकारियों ने अदालत को लिखित में दिया है कि वो सात दिन में मुआवज़े की राशि चुका देंगे.''
एक रेलवे अधिकारी ने नाम ना बताये जाने की शर्त पर कहा, ''हां, मुआवज़ा देने में देर हुई है इसके बावजूद ये बड़ा अजीब सा मामला है.''
एक यात्री टीवी एक्टर सिही कही चंद्रू ने बताया, ''पहले मुझे लगा कि ट्रेन किसी ख़राबी की वजह से रुकी है. काफ़ी देर तक जब ट्रेन आगे नहीं बढ़ी तो मैंने पूछताछ की. जब मुझे पता चला कि ये कोर्ट के आदेश के तहत जबरन रोकी गई है तो मुझे बहुत ग़ुस्सा आया, मुझे ये बेहद हास्यास्पद लगा.''
अधिकारियों का कहना है कि रेलवे एक्ट की धारा 187 के मुताबिक़ रेलेव की संपत्ति को केंद्र सरकार की सहमति के बिना ज़ब्त नहीं किया जा सकता है.
उन्होंने दावा किया एक दूसरी अदालत का इसी तरह का हुक्म हाई कोर्ट के ज़रिये ख़ारिज किया जा चुका है.
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