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'आईजी पुलिस कल्लूरी गिरफ़्तार हों'
- Author, आलोक प्रकाश पुतुल
- पदनाम, रायपुर से बीबीसी हिंदी डॉटकॉम के लिए
छत्तीसगढ़ में माओवाद प्रभावित बस्तर के आईजी पुलिस शिवराम प्रसाद कल्लूरी की गिरफ़्तारी की मांग बढ़ती जा रही है.
विपक्षी दल कांग्रेस समेत दूसरे राजनीतिक और सामाजिक संगठनों ने कहा है कि बस्तर में फर्ज़ी मुठभेड़ों में निर्दोष आदिवासियों को मारा जा रहा है.
दूसरी ओर शिवराम प्रसाद कल्लूरी ने कहा है कि एक भ्रम की स्थिति पैदा करके आंतरिक सुरक्षा क़ायम रखने में लगे हुये सुरक्षाबल का मनोबल गिराना बहुत बड़ा अन्याय है, देशद्रोह है.
इस बीच राज्य के गृहमंत्री रामसेवक पैंकरा ने कहा है कि छत्तीसगढ़ सरकार संविधान के दायरे में माओवादियों के साथ संवाद करने के पक्ष में है.
असल में शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका की सुनवाई के दौरान सीबीआई ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा है कि मार्च 2011 में सुकमा जिले के ताड़मेटला, मोरपल्ली और तिम्मापुर में आदिवासियों के 252 घर जला दिये गये थे और यह काम विशेष पुलिस अधिकारियों ने किया था. इन गांवों में तीन आदिवासियों की हत्या हुई थी और महिलाओं के साथ बलात्कार भी किया गया था.
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने माओवादी हिंसा को रोकने के लिये सरकार से शांति वार्ता की पहल के लिये भी कहा था.
सीबीआई की इस रिपोर्ट के बाद दंतेवाड़ा के तत्कालीन वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक शिवराम कल्लूरी को ज़िम्मेवार बताते हुये उनकी गिरफ़्तार की मांग उठ रही है.
छत्तीसगढ़ विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीएस सिंहदेव ने कहा है कि विधानसभा में भी कांग्रेस ने इस मुद्दे को उठाया था लेकिन सरकार ने इस मामले में सदन को गुमराह किया.
सिंहदेव ने कहा, "इस घटना के आरोपी तत्कालीन पुलिस अधिकारी आज भी बस्तर में पदस्थ हैं एवं राज्य सरकार की दमनकारी नीतियों के पोषक बन कर काम कर रहे हैं. हम सरकार से मांग करते हैं कि इस मामले में ज़िम्मेदार पुलिस अधिकारियों को निलंबित कर तत्काल वहां से अन्यत्र हटाया जाये तथा उनके विरुद्ध अपराध पंजीबद्ध कर, विधिक कार्यवाही संस्थित करे."
इधर आम आदमी पार्टी, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी, सीपीआईएमल लिबरेशन, छत्तीसगढ़ मुक्ति मोर्चा समेत 20 से अधिक राजनीतिक और सामाजिक संगठनों ने भी कहा है कि बस्तर में लगातार आदिवासियों की हत्या की जा रही है और इन फर्ज़ी मुठभेड़ों के लिये ज़िम्मेवार लोगों पर कार्रवाई होनी चाहिए.
मानवाधिकार संगठन पीयूसीएल की छत्तीसगढ़ इकाई के अध्यक्ष डॉक्टर लाखन सिंह ने कहा, "कल्लूरी पर इतने गंभीर आरोप के बाद सरकार उन्हें बचाने का काम कर रही है, यह लोकतांत्रिक मूल्यों को ख़त्म करने की तरह है. उन्हें तत्काल गिरफ़्तार करना चाहिए."
दूसरी ओर कल्लूरी ने पूरे मामले पर सफ़ाई देते हुये कहा, "इस मामले को राजनीतिक दृष्टि से नहीं देखा जाना चाहिए. हमें लगता है कि सीबीआई के समक्ष हम अपना पक्ष ठीक से नहीं रख पाये."
हालांकि उन्होंने माना कि जिन इलाकों में आगज़नी, हत्या और महिलाओं से बलात्कार के आरोप लगे हैं, उन इलाकों में उनके ही कहने पर चार सौ से अधिक जवान गये थे.
शिवराम प्रसाद कल्लूरी ने कहा, "मैं जब दंतेवाड़ा एसएसपी था, उसी समय 30 दिन में 108 सिपाही हमारे मरे थे, उसी इलाके में, उसी थाना क्षेत्र में. वहां फोर्सेस जाएंगी तो युद्ध होना ही होना है. गोलियां चलेंगी ही चलेंगी. बमबारी होगी ही होगी. बमबारी होगी और गरमी का मौसम है तो झोपड़ियां जलेंगी ही. हमने कहीं नहीं कहा कि झोपड़ियां नहीं जलीं. लेकिन एक पुलिस कार्रवाई के दौरान यह हुआ."
इधर इन तमाम आरोप-प्रत्यारोप के बीच छत्तीसगढ़ के गृहमंत्री रामसेवक पैंकरा ने माओवादियों से बातचीत के मुद्दे पर कहा है कि परस्पर संवाद ही लोकतंत्र का आधार है.
उन्होंने कहा, "नक्सल समस्या के निराकरण के लिए राज्य सरकार माओवादियों सहित किसी भी पक्ष से बातचीत के लिए खुले दिल से हमेशा तैयार है. बातचीत के लिए सरकार के दरवाजे हमेशा खुले हुए हैं, लेकिन यह बातचीत लोकतंत्र और संविधान के दायरे में होनी चाहिए."
उन्होंने पैंकरा ने कहा, "नक्सल समस्या के शांतिपूर्ण और स्थायी समाधान के लिए सरकार की नीति और नीयत बिलकुल साफ़ है."
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