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क्या चीनी सामान का बहिष्कार मुमकिन है?
- Author, सुहैल हलीम
- पदनाम, बीबीसी संवाददाता
मंदिरों में मस्जिदों में गुरुद्वारों में... आम हिंदुस्तानियों के दिलों में और घरों में - चीन हर जगह है. साथ ही हर जगह हैं चीन से नफ़रत और मुहब्बत करने वाले भी.
दिल्ली के सदर बाज़ार के एक व्यवसायी सुनील बताते हैं, "चीन के गिफ़्ट आइटम इसलिए बहुत लोकप्रिय हैं क्योंकि वो सस्ते हैं, बहुत सुंदर हैं, बहुत प्रेज़ेंटेबल हैं. इस वक़्त पूरा सदर बाज़ार चीन से ही माल मंगा रहा है और हर ग्राहक की ज़ुबान पर एक ही बात होती है कि कुछ नया मिला, कुछ सस्ता मिला और बहुत सुंदर मिला".
राष्ट्रवाद की मौजूदा लहर में चीन के सामान के बहिष्कार की अपील जगह-जगह सुनाई दे रही है.
कनफे़डरेशन ऑफ़ आल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के महासचिव प्रवीण खंडेलवाल का कहना है, "उड़ी में जिस तरह से पाकिस्तान द्वारा हमला किया गया, वो सीधा देशभक्ति से जुड़ा और चीन ने पाकिस्तान का समर्थन किया. वहां से ये अभियान उभर कर आया कि हमें चीन समेत उन सब देशों को सबक सिखाना चाहिए जो भारत के हित के ख़िलाफ़ नज़र आते हों".
चीन भारत का सबसे बड़ा कारोबार सहयोगी है. पिछले साल भारत ने चीन से 61 अरब डॉलर का साज़ोसामान आयात किया था, जबकि भारत ने चीन को महज़ नौ अरब डॉलर का निर्यात किया. भारत में आयात किए जाने वाले सामान में गिफ़्ट आइटम्स, टीवी, कम्प्यूटर के सामान, फ़ोन और लैंप्स वगैरह शामिल हैं.
ये सूची लंबी है, ये सामान कभी सीधे चीन के नाम से बिकते हैं तो कभी मोहर लगने के बाद किसी और के नाम से.
दुकानदार नुकसान का दावा कर रहे हैं, लेकिन इसकी सही तस्वीर दिवाली के बाद ही सामने आ पाएगी.
हालांकि चीन को सबक सिखाना इतना आसान भी नहीं हैं क्योंकि उसका सामान सस्ता भी है और फिलहाल उसकी बराबरी करने वाला भी मौजूद नहीं है.
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